नई दिल्ली, 24 अगस्त. वित्तमंत्री पी. चिदंबरम को बड़ी राहत प्रदान करते हुए उच्चतम न्यायालय ने 2जी मामले में उनके खिलाफ दायर याचिका को आज खारिज कर दिया और कहा कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश या वित्तीय फायदा हासिल करने की प्रथम दृष्टया कोई सामग्री नहीं है । याचिका में चिदंबरम को सह अरोपी बनाने का आग्रह किया गया था ।

न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन की पीठ ने कहा, ”पी. चिदंबरम के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता और सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका विचार करने योग्य नहीं है । इसलिए यह खारिज की जाती है ।” यह याचिका जनता पार्टी के प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की थी । स्वामी ने याचिका में आग्रह किया था कि चिदंबरम के खिलाफ जांच का निर्देश दिया जाए और उन्हें पूर्व संचार मंत्री ए राजा के साथ सह आरोपी बनाया जाए । पीठ ने उनके आग्रह को खारिज करते हुए कहा कि आपराधिक साजिश का मामला सिर्फ इस संदेह के आधार पर नहीं चलाया जा सकता कि फैसला लेने के लिए दूरंसचार विभाग के अधिकारियों और दोनों विभागों के मंत्रियों राजा तथा तत्कालीन वित्तमंत्री चिदंबरम के बीच बैठक हुई थी ।

न्यायालय ने कहा कि इस बारे में ”प्रथम दृष्टया कोई सामग्री नहीं है कि चिदंबरम ने कोई आर्थिक लाभ हासिल किया और न ही यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड में कोई सामग्री है कि उन्होंने तत्त्कालीन वित्तमंत्री के रूप में अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया । न्यायाधीशों ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन में घटिया प्रबंधन को आपराधिक साजिश का हिस्सा नहीं कहा जा सकता । यह दूसरी बार है जब चिदंबरम को न्यायिक राहत मिली है । इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने गत चार फरवरी को 2जी मामले के एक सह आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया था ।

पुनर्विचार याचिका करेंगे दायर स्वामी

नई दिल्ली। भले ही जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी का 2जी मामले में चिदंबरम को आरोपी बनाने का यह प्रयास विफल हो गया हो, लेकिन वह इतनी आसानी से हार नहीं मानने वाले। उन्होंने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा चिदंबरम को क्लीन चिट देने के फैसले के खिलाफ एक पुनर्विचार याचिका दायर करेगे। स्वामी के इन तेवरों पर सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने हमला बोलते हुए कहा है कि वह सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसा करते हैं।

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को बड़ी राहत मिल गई है। एक लाख 76 हजार करोड़ के 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में चिदंबरम को सहआरोपी बनाने की सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका देश की शीर्ष अदालत में खारिज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चिदंबरम के खिलाफ आपराधिक साजिश या वित्तीय फायदा हासिल करने के प्रथम दृष्टया कोई सबूत नहीं हैं। इस बीच, कांग्रेस ने भी कहा है कि चिदंबरम का इस मामले से कुछ भी लेना-देना नहीं है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने कहा है कि कांग्रेस को बहुत खुश नहीं होना चाहिए।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने स्वामी की याचिका खारिज होने के बाद कहा कि हम यह बात शुरू से ही कह रहे है। चिदंबरम की तरफ से कोई अनियमितता नहीं की गई है। इधर, भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मैंने पूरा फैसला नहीं देखा है, लेकिन सरकार को इसे लेकर इतना खुश नहीं होना चाहिए। भाकपा नेता और 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य गुरुदास दासगुप्ता ने भी कहा कि यह सरकार की कोई जीत नहीं है। गौरलतब है कि चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई जाच कराने की याचिका सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन नाम की गैर सरकारी संस्था से जुडे प्रशात भूषण ने दायर की है। सुप्रीम कोर्ट दोनों याचिकाओं को स्वीकार कर लेता तो केंद्र की मुश्किलें बढ़ सकती थीं। कोर्ट केंद्र को नोटिस जारी कर सकता था। साथ ही, सीबीआई को जाच का आदेश दे सकता था।

फरवरी में सीबीआई की विशेष अदालत ने चिदंबरम को सह आरोपी बनाने की स्वामी की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि चिदंबरम के खिलाफ आपराधिक साजिश का कोई मामला नहीं बनता। इसके बाद स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। स्वामी ने अपनी याचिका में कहा था कि 2008 में जब चिदंबरम वित्तमंत्री थे तब उन्होंने तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए.राजा के साथ मिलकर दूरसंचार कंपनियों को सस्ते में स्पेक्ट्रम बेचना का फैसला लिया था। इसलिए राजा जितने जिम्मेदार हैं उतने ही चिदंबरम भी जिम्मेदार हैं।

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