मध्यप्रदेश को अभी तक बड़ी ही आत्मग्लानि के साथ यह निंदा झेलनी पड़ रही थी कि कुपोषण से सबसे ज्यादा बच्चों की मृत्यु इस राज्य में हो रही है. हालांकि बाल कल्याण विभाग की पोषण योजनाएं व कार्यक्रम चलते रहे लेकिन भ्रष्टïाचार की पृष्ठभूमि में वे गांवों तक उचित ढंग से पहुंच नहीं पाते थे.

लेकिन अब मध्यप्रदेश इस मामले में गौरवान्वित भी हुआ है कि गत दस साल में पहली बार शिशु मृत्यु दर में सबसे ज्यादा पांच अंकों की कमी मध्यप्रदेश में दर्ज की गई है. जबकि सेम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की वर्ष 2011 की रिपोर्ट के अनुसार राष्टï्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर केवल तीन अंकों में ही कम हुई है. रिपोर्ट के अनुसार सन् 2000 में मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर 87 थी जो घटकर 2009 में 67 हुई और वर्ष 2010 में यह पांच अंक घटकर 62 हो गई. इन दस वर्षों में राज्य में प्रति वर्ष शिशु मृत्यु दर लगातार नीचे आती गई. इसके लिये 33 जिलों अस्पतालों में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाईयों को क्रियाशील किया गया. अगले माह मार्च तक 7 और ऐसी इकाईयां सक्रिय हो जाएंगी. इनमें गत वर्ष लगभग 30 हजार बच्चों की चिकित्सा कर लगभग 25 हजार बच्चों का जीवन बचाया गया. राज्य में शत-प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित किया जा रहा है. राज्य में जननी सुरक्षा योजना, प्रसूता को पौष्टिïक आहार व उपचार की विशेष योजनाओं से भी स्वस्थ बालक जन्म वृद्धि हो रही है. नवजातों की देखभाल के लिये 80 प्रतिशत स्टाफ को विशेष रूप से प्रशिक्षित दिया जा चुका है.

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