• बालश्रम के खिलाफ उत्तरप्रदेश में बच्चे चला रहे है  मुहिम

मुरादाबाद, 24 अक्टूबर. उत्तर प्रदेश में बच्चों के समूह हाथ से बनाई कॉमिक्स और नुक्कड़ नाटकों के जरिए लोगों में बाल अधिकार के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

मुरादाबाद जिले में करीब 150 स्कूली बच्चों के समूह यहां पीतल के बर्तन बनाने वाली इकाइयों में हो रहे बालश्रम के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। जिले के अधिकांश घरों में पीतल के बर्तन बनाने का काम होता है और परिवार के सारे सदस्य इसमें शामिल रहते हैं। बालश्रम के खिलाफ इस अभियान में शामिल 14 वर्षीय अशरफ ने कहा कि यह बात सही है कि अपने बच्चों से कठोर शारीरिक परिश्रम कराने वाले माता-पिता को समझाए बिना इस सामाजिक बुराई से नहीं लड़ा जा सकता। साथ ही बालश्रमिकों को इसमें शामिल किए बिना इसे कुशलतापूर्वक नहीं चलाया जा सकता। कॉमिक्स से हमें इस काम में मदद मिलता है।

शहर की शिवनगर झोपड़पट्टी में रहने वाले और बालश्रमिक रह चुके अशरफ ने कहा कि हम लोगों द्वारा हाथ से तैयार की गई कॉमिक्स से बालश्रमिक आकर्षित होते हैं, फिर वे हम से घुल-मिल जाते हैं, वरना वे आमतौर पर बाहरी लोगों से बातचीत भी नहीं करते। अशरफ और उसके जैसे अन्य बच्चों को बालश्रम के खिलाफ अभियान चलाने के लिए प्रशिक्षण देकर तैयार करने का श्रेय एक गैर सरकारी संगठन ‘अंकुर युवा चेतना शिविर को जाता है जो यूनिसेफ के साथ मिलकर मुरादाबाद में बाल अधिकारों के लिए काम करता है।
अंकुर युवा चेतना शिविर के परियोजना अधिकारी भुवन सिंह ने कहा कि शिविर में 10 से 14 साल के करीब 150 बच्चे शहर के 11 अलग-अलग इलाकों के हैं, जो इस सामाजिक बुराई से लडऩे में हमारा सहयोग कर रहे हैं।  कॉमिक्स के जरिए जागरूकता फैलाने के अतिरिक्त ये बच्चे नुक्कड़ नाटक कर लोगों, खासकर अशिक्षितों को इस सामाजिक बुराई के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इसके अलावा बच्चे चित्रकला के माध्यम से घर-घर बालश्रम के खिलाफ संदेश फैला रहे हैं। सिंह के मुताबिक इस मुहिम में सामान्य छात्रों के अलावा कई वैसे बच्चे भी शामिल हैं जो कभी बाल मजदूर रह चुके हैं। लेकिन अब वे मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं…अब वे मजदूरी न कर नियिमत स्कूल जाते हैं। इन बच्चों के समूह विभिन्न इलाकों में जाकर अभिभावकों को प्रेरित करते हैं कि वे अपने बच्चों से काम करवाने के बजाय उन्हें स्कूल भेजें। यूनिसेफ में काम करने वाले अंशुमन कौल ने बतायाहमारे द्वारा 2009 में किए गए एक सर्वे में सामने आया कि मुरादाबाद में 9,000 बाल मजदूर व श्रम करने वाले बच्चे हैं। श्रम करने वाले बच्चों से तात्पर्य है जिनके परिजन बिना पैसे दिए उनसे अपने कारोबार में मदद लेते हैं। बच्चों के ऐसे समूह गठित करने का हमारा उद्देश्य बाल मजदूरों को होने वाली परेशानियों को बेहतर तरीके से समझाना और उन्हें मुख्यधारा में लाना। बच्चों के समूहों के प्रयासों से जनवरी 2010 से अब तक करीब 160 बाल मजदूरों को मुरादाबाद के विभिन्न स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया है।

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