भारत ने बिछाया सीमाओं पर रेल-सड़कों का जाल : रक्षामंत्री ने दी जानकारी

नई दिल्ली, 21 दिसंबर. भारत ने चीन द्वारा सीमा के पास किए गए ढांचागत विकास को देखते हुए अपने क्षेत्र में रेलों का जाल बिछाने का निर्णय लिया है. चीन के सीमावर्ती तीन राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरूणाचल प्रदेश में दस रेल परियोजनाओं के विकास की पहचान की गई है.

सुरक्षा जरूरतों पर विशेष ध्यान-रक्षा मंत्री एके एंटनी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि चीन से लगी सीमा पर सामरिक महत्व की 73 सडकें भी बनाई जानी है. उन्होंने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा जरूरतों पर विशेष ध्यान दे रही है. सीमावर्ती इलाकों में आवश्यक ढांचागत विकास किया जा रहा है. इनमें रेल, रोड और हवाईपट्टियों का विकास शामिल है.

सैन्य बलों की क्षमता बढ़ाने पर बल-इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सैन्य बलों की क्षमता बढ़ाई जा रही है. एक सवाल के जवाब में एंटनी ने स्वीकार किया कि जुलाई में चीनी सेना के एक गश्ती दल ने नियंत्रण रेखा के ढाई सौ मीटर भीतर घुसकर पत्थरों से बनी एक 200 फुट ऊंची कच्ची दीवार को गिरा दिया था जिस पर भारत ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया. यह दीवार फिर से बना दी गई है.

दो साल में खरीदे 140 लड़ाकू विमान-भारत ने अपने सैन्य बलों की हवाई ताकत को बढ़ाने के लिए पिछले दो साल में करीब 140 लड़ाकू विमानों की खरीदारी के सौदे किए हैं. रक्षामंत्री ए.के. एंटनी ने बताया कि वायु सेना के लिए इस अवधि में 50 सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमान खरीदे गए और लड़ाकू पायलटों की ट्रेनिंग के लिए 40 हाक उन्नत जेट ट्रेनरों एवं 20 स्वदेशी हल्के लडाकू विमान तेजस की खरीदारी के सौदे पर हस्ताक्षर किए गए. उन्होंने बताया कि नौसेना की हवाई ताकत को भी बढाया जा रहा है और उसके लिए 29 मिग-29 के विमानों की खरीदारी का सौदा किया गया है. ये विमान भारत रूस से मिलने वाले विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्श्कोव पर तैनात किए जाएंगे. एंटनी ने कहा कि सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के लिए 2010-11 में जो राशि रखी गई थी उसका शत प्रतिशत खर्च हो चुका है.

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