बीजिंग, 22 मार्च. चीन ने भारत के साथ लगी अपनी विवादित सीमा के पास शिनघाई-तिब्बत पठार के ऊंचाई वाले इलाके में एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया है जिसमें उसने पहली बार बहुउद्देश्य लड़ाकू विमान जे-10 का परीक्षण किया।

आधिकारिक मीडिया ने यहा बताया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी [पीएलए] वायु सेना ने शिनघाई-तिब्बत पठार पर ‘अपनी तरह के पहले अभियान में’ जमीनी हमलों का प्रशिक्षण लिया। पीएलए डेली द्वारा जारी एक रिपोर्ट और चित्रों के मुताबिक जे-10 रेजीमेंट के जमीनी चालक दल ने 3500 मीटर ऊंचे पठार पर शून्य से 20 डिग्री नीचे के तापमान में विमानों में ईंधन भरा और उनमें गोला बारूद लादा। इन लड़ाकू विमानों ने तेजी से उड़ान भरी और परंपरागत तथा लेजर निर्देशित बमों के जरिए विभिन्न लक्ष्यों को निशाना बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों ने दिन और रात दोनों में ही उड़ान भरी। ऐसा दूसरी बार है जब आधिकारिक मीडिया ने स्वदेश निर्मित जे-10 लड़ाकू विमानों को लेजर निर्देशित बमों का इस्तेमाल करते तस्वीर जारी की है।

इस अभ्यास को एक और आधिकारिक समाचार पत्र द ग्लोबल टाइम्स ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इन अभ्यासों के बारे में समाचार प्रकाशित किया जाना काफी दुर्लभ माना जाता है जिसे भारतीय पक्ष को एक संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है जो वास्तविक नियंत्रण रेखा [एलएसी] से लगे अपने सीमाई क्षेत्रों में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तैनात कर रहा है। चीन ने जे-10 विमान पाकिस्तान को भी दिया है और इस विमान को पिछले साल तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में पीएलए द्वारा आयोजित किए गए अभ्यास में शामिल किया गया था। ग्लोबल टाइम्स ने एविएशन व?र्ल्ड मासिक पत्रिका के पूर्व उप मुख्य संपादक बाई वेई के हवाले से कहा कि जे-10 विमान का प्रारंभ में डिजाइन हवाई क्षेत्र में श्रेष्ठता हासिल करने के लिए किया गया था।  यह हवाई युद्ध में माहिर है, लेकिन आधुनिक सेंसर, वैमानिकी और जमीन पर हमला करने वाले गोला बारूद के साथ जमीनी हमले में भी अच्छा कर सकता है। समाचार पत्र ने बताया कि जे-10 की गतिविधिया शिन्घाई-तिब्बत पठार पिछले महीनों में आम हो गई है।

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