भारत चाहे जो करे सो कर ले

बीजिंग, 12 दिसंबर. ताकतवर मुल्कों के बीच समुद्री क्षेत्र में प्रभुत्व को लेकर टकराव और तेज होने के आसार हैं। प्रशांत महासागर में चीन के सैन्य अड्डा खोलने संबंधी ऐलान ने भारत के अलावा पड़ोसी मुल्कों में खलबली मचा दी है। खबरों के मुताबिक चीन प्रशांत महासागर में सेशल्स द्वीप पर अपना पहला सैन्य अड्डा खोलने वाला है।

नौसेना को सही समय पर मिलेंगे हथियार
चीन का मानना है कि वह नौसेना को संसाधन बेहतर तरीके से मुहैया कराने के लिए यह सैन्य अड्डा खोलने जा रहा है। चीन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक चीनी नौसेना को डिफेंस मिशन के दौरान बेहतर और समय पर सैन्य हथियार और उपकरण की आपूर्ति हो सकेगी।

भारत से वार्ता पर असर पडऩे की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन का यह कदम भारत के साथ आगामी रक्षा स्तर के वार्ता को प्रभावित कर सकता है। हाल ही में सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर भारतीय मीडिया में कई खबरें आई थी।

नौसैनिक अभ्यास की भी योजना
इससे पहले चीन ने कहा था कि वह पश्चिमी प्रशांत महासागर में नियमित तौर पर वार्षिक नौसैनिक अभ्यास करेगा। चीन ने कहा कि ऐसा करना उसका अधिकार बनता है और उसे इससे नहीं रोका जाना चाहिए। चीन अपनी नौसेना के आधुनिकीकरण के तहत नई पनडुब्बियां, जहाज और एंटी शिप बैलेस्टिक मिसाइल बना रहा है। इसके अलावा चीन इसी साल अगस्त में पुराने रूसी जहाज का नवीनीकरण कर बनाए गए अपने पहले विमान वाहक पोत का परीक्षण कर चुका है।

पश्चिम एशिया में सुलह जरूरी

दोहा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बॉन की मून ने कहा है कि राजनीतिक संकट से घिरे देशों में सुलह की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। कतर की राजधानी दोहा में संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन में मून ने कल कहा कि कुछ देशों के राजनीतिक बदलाव शांतिपूर्ण हुए हैं। कई अन्य देशों में हिंसक कार्रवाई देखी गई है। परंतु हर जगह सुलह जरूरी है ताकि बदलाव की प्रक्रिया सफल हो सके। इस साल अरब के कई देशों मिस्र, ट्यूनिशिया, लीबिया और यमन में विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता का परिवर्तन हुआ है, हालांकि सीरिया में अब भी हिंसा का दौरा जारी है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीरिया में सरकार की दमनकारी कार्रवाई में कम से कम चार हजार लोग मारे गए हैं।

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