नई दिल्ली, 2 दिसंबर. नेवी चीफ एडमिरल निर्मल वर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि चीन की पनडुब्बियां भारत के लिए चिंता की बात हैं. उन्होंने कहा कि ये पनडुब्बियां लंबी दूरी की सामरिक मिसाइलों से युक्त हैं. जो चिंता की बात है.

उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन में जो भी विवादित मसले हैं वो वार्ता से ही हल होने चाहिए. युद्ध की स्थिति पूरी दुनिया के लिए घातक होगी. वर्मा ने बताया कि नेवी में फिलहाल 18 फीसदी अधिकारियों की कमी है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रेगुलेटरी अथॉरिटी को चाहिए को वो न्यूक्लियर पनडुब्बियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें. उन्होंने कहा कि सुरक्षा की ज्यादा जिम्मेदारी बीएआरसी पर है. उन्होंने कहा कि नेवी को साल 2025 तक 150 जहाजी बेड़े, एक हजार एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर की जरूरत पड़ेगी. आंध्र प्रदेश के काकिनाड़ा को जलस्थली ट्रेनिंग के लिए चुना गया है. जहां नेवी कैडेर को जल और स्थल में युद्ध करने की ट्रेनिंग दी जाएगी.

चीन-पाक के हर इरादे से सतर्क रहें भारतीय जांबाज

जम्मू. भारतीय सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने शुक्रवार को लद्दाख क्षेत्र में सुरक्षा हालात का जायजा लिया. सेना प्रमुख ने अधिकारियों से यहां तैनात जवानों को आने वाली दिक्कतों के बारे में भी बातचीत की. सिंह ने इस दौरान उन स्थानों का दौरा भी किया जहां चीनी सैनिकों ने चीन के समर्थन में नारे लिखे थे. उन्होंने जवानों को हिदायत दी कि वे चीन और पाकिस्तन से सतर्क रहें. लद्दाख पाकिस्तान और चीन की सीमा से लगा हुआ है. चीन लद्दाख पर अपना हक जताता है और चीनी सैनिक अक्सर यहां घुसपैठ करते रहते हैं. सीमांत इलाकों में चीनी सेना की गतिविधियां निरंतर बढ़ती ही जा रही हैं. पीओके में चीन को दी गई खुली छूट भी भारत के लिए चिंता का सबब है. मालूम हो कि लेह के एक सीमांत गांव के सरपंच से चीनी सैनिकों के चित्र जारी किए थे. इन चित्रों में चीनी सैनिक हाथों में बैनर लिए दिख रहे थे. इन बैनरों के जरिए वे भारतीय जमीन को अपना बता रहे थे. हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और लेह के जिला प्रशासन ऐसी खबरों को खारिज करते हुए घुसपैठ से साफ इंकार करता रहा है.

कई बार कर चुका है घुसपैठ
2009 में दो बार, जुलाई और नवंबर में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ कर देमचौक इलाके में सड़क निर्माण के काम को रुकवा दिया था. चीनी सैनिकों ने न केवल हमारे मजदूरों को पीटा, बल्कि टेंट वगैरह भी उठा ले गए थे. उस इलाके में चीनी सैनिकों ने जगह-जगह चीन समर्थक नारे भी लिखे थे. हालांकि तब भी इसे गंभीरता से नहीं लिया. तब सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के बारे में मतभिन्नता के चलते यह स्थिति पैदा हुई.

Related Posts: