प्रदेश सरकार केफैसले : अब दो बच्चों से ज्यादा पर भी मिलेगी अनुकम्पा नियुक्ति

भोपाल,15 मई, नभासं. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में आज सम्पन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा माध्यमिक शालाओं के लिये अध्यापक संवर्ग में अध्यापक के 26 हजार 26 स्वीकृत पद को संशोधित करते हुए 13 हजार 13 पद सहायक शिक्षक से उच्च श्रेणी शिक्षक की पदोन्नति के लिये तथा शेष 13 हजार 13 पद अध्यापक के संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-2 की नियुक्ति से पूर्ति के लिये स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया.

अनुकम्पा नियुक्ति: मंत्रि-परिषद ने शासकीय सेवा में मृत व्यक्तियों के परिवार जन को दी जाने वाली संविदा नियुक्ति के संबंध में दो बच्चों तक के प्रतिबंध को समाप्त करने का निर्णय लिया. अब कितने भी बच्चे होने पर ऐसी नियुक्ति में बाधा नहीं आयेगी. बहरहाल, यह निर्णय आदेश जारी होने की तिथि से लागू होगा और पुराने प्रकरण इसमें शामिल नहीं होंगे.

मछुआ कल्याण बोर्ड: मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के परम्परागत और वंशानुगत मछुआरों के कल्याण और विकास के लिये मध्यप्रदेश राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड के गठन का निर्णय लिया. उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री  शिवराजसिंह चौहान द्वारा मछुआ पंचायत में इस बोर्ड के गठन की घोषणा की गयी थी. यह बोर्ड मछुआरों के कल्याण और विकास के लिये नई योजनाएँ बनाने, पुराने कार्यक्रमों में परिवर्तन तथा अन्य विषयों में प्रासंगिक सुझाव देने का कार्य करेगा. बोर्ड के कार्यालय के लिये 23 प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की पूर्ति विभागीय अमले से प्रतिनियुक्ति के जरिये की जायेगी. बोर्ड का कार्यकाल 3 वर्ष होगा.

ई-गवर्नेंस मैनेजर: सुशासन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मंत्रि-परिषद ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 420 पद के सृजन को स्वीकृति दी. इनमें 50 पद जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी के अंतर्गत ई-गवर्नेंस मैनेजर के, 320 पद विकासखण्ड स्तर पर असिस्टेंट ई-गवर्नेंस मैनेजर तथा 50 पद जिला-स्तर पर डाटा एन्ट्री ऑपरेटर के शामिल हैं. इन पदों के सृजन से ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के कुशल और अधिक दक्ष संचालन में मदद मिलेगी. मजरे-टोले: मंत्रि-परिषद ने बैतूल, मुरैना और हरदा जिलों में 2,332 विद्युतीकृत ग्राम के 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों और बसाहटों के विद्युतीकरण का निर्णय लिया. इससे गरीबी रेखा से नीचे के 96 हजार 320 परिवार को विद्युत कनेक्शन उपलब्ध हो जायेगा.

फसल हानि राहत: मंत्रि-परिषद ने वन्य-प्राणियों द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचाए जाने की स्थिति में दी जाने वाली राहत की व्यवस्था में बदलाव के लिए आर.बी.सी.-6-4 के प्रावधानों में संशोधन करने का निर्णय लिया. वर्तमान में वन्य-प्राणियों से फसल हानि के मामलों में प्रभावित किसान को वन-मण्डलाधिकारी द्वारा राशि स्वीकृत कर वितरित की जाती है. इस व्यवस्था से प्रभावितों को घटना के बाद शीघ्र राहत नहीं मिल पाती. अब इस तरह के प्रकरणों में प्राकृतिक आपदाओं की तरह निर्धारित मानदण्ड के अनुसार सहायता राशि राजस्व विभाग द्वारा स्वीकृत की जायेगी. यह राशि वन विभाग के बजट से उपलब्ध करवाई जायेगी. वन विभाग द्वारा सहायता राशि स्वीकृत, आहरण और वितरण करने के लिये राजस्व अधिकारियों को प्राधिकृत भी किया जायेगा.

सायलो बेग: मंत्रि-परिषद ने प्रायोगिक तौर पर सायलो बेग में गेहूँ के भण्डारण का निर्णय लिया. यह कार्य मध्यप्रदेश वेयर-हाउसिंग कार्पोरेशन द्वारा पायलट आधार पर किया जायेगा. इस कार्य के लिये आवश्यक भूमि अस्थाई तौर पर कार्पोरेशन को नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जायेगी, जो साइलो बेग खाली होने पर पुन: शासन में विहित हो जायेगी.

अन्य निर्णय: राज्य में उद्योग संवर्द्धन के साथ-साथ विद्युत उत्पादन में वृद्धि की नीति के अनुसार निजी क्षेत्र के औद्योगिक समूहों द्वारा केप्टिव पॉवर प्लांट एवं विद्युत उत्पादन केन्द्रों की स्थापना का कार्य शुरू किया गया है. विद्युत अधिनियम-2003 के प्रावधानों के अनुसार राज्य में विद्युत के पारेषण एवं वितरण में अनुज्ञप्ति प्राप्त करने के लिये राज्य विद्युत नियामक आयोग को शुल्क सहित आवेदन करने का प्रावधान है. राज्य के स्वामित्व वाली विद्युत कम्पनियों को छोड़कर पारेषण एवं वितरण के क्षेत्र में कार्य करने के लिये अन्य मामलों में मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में आवेदन प्रस्तुत करना होगा. इसके लिये आवेदन शुल्क की राशि शासन द्वारा 5 लाख रुपये निर्धारित करने का निर्णय लिया. मंत्रि-परिषद ने  ए.एल. परमेश्वरी (सेवानिवृत्त) वन क्षेत्रपाल, मुरैना की 10 प्रतिशत पेंशन स्थाई रूप से वापस लिये जाने का निर्णय लिया. उनके द्वारा अपनी पदस्थापना के दौरान नील गाय के अवैध शिकार संबंधी एक प्रकरण में कार्यवाही नहीं करने तथा कर्ततव्य में लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया.

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