भोपाल में नहीं दिखा सूर्य शुक्र परागमन का नजारा

भोपाल, 6 जून. मध्यप्रदेश विज्ञान सभा द्वारा विज्ञान प्रचार प्रसार के उद्देश्य से आयोजित बाल विज्ञान उत्सव के अंतिम दिन छात्र/छात्राओं सुबह 6 बजे से ही अपनी पूरी तैयारी से थे. छात्र/छात्राओं ने ट्रांजिट आफ वीनस के अवलोकन के लिए अपना नैनो टेलिस्कोप बानया था.
बाल माउन्ट बनाया था तथा सोलर फिल्टर भी साथ रखे थे परंतु वो इन सब संसाधनों को ही देख रहे थे. क्योंकि जिस महत्वपूर्ण घटक सूर्य पर ट्रांजिट आफ वीनस देखना था वह सूर्य नदारद रहा, बादल छाए रहे. छात्र/छात्राओं से हमारे आकाश एवं ट्राजिट आफ वीनस पर संवाद होता रहा, सूर्य का इन्तजार करते रहे और सदी का अंतिम शुक्र पारगमन हम भोपाल के साथी नहीं देख पाए.

विज्ञान सभा से कार्यक्रम समन्वयक आशीष पारे ने बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों में जिला समन्वय को से लगातार फोन पर लगातार चर्चा होती रही जिसमें ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मन्दसौर शहडोल, उमरिया एवं रतलाम में आम जन ने इस अदभुत नजारे को देखा. वो इस नजारे को देख बहुत खुश, आश्चर्य एवं कोतुहल के साथ सोलर फिल्टर बाल माउन्ट एवं टेलिस्कोप द्वारा इस नजारे को देख रहे थे, प्रदेश के जिलों में इस खगोलीय घटना के प्रति अधिक उत्साह था क्योंकि प्रचार/प्रसार के दौरान इस अदभुत घटना की बहुत सारी वैज्ञानिक जानकारी उन तक पहुँच चुकी थी. आज उन्होंने इस घटना को देखा जिन जिलों में देख पाए वो बहुत खुश थे परंतु भोपाल एवं भोपाल के आसपास के जिलो के साथी अपनी तैयारी करके ही रहे गए क्योंकि सूर्य आज हमसे रुठा रहा. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शुक्र पारगमन की घटना का दिखना या न दिखना एक अलग पहलू हो सकता है परंतु पारे ने बताया कि विज्ञान सभा द्वारा इस खगोलिय घटना की वैज्ञानिक जानकारी का जो प्रचार/प्रसार किया गया उसें लगभग 10 हजार लोगों तक हम इस घटना की सीधे वैज्ञानिक समझ बनाने में सफल हो पाए और इन 10 हजार लोगों को 10-10 लोगों तक इस जानकारी को ले जाने की बात रखी गई थी इस प्रकार इस खगोलयी घटना की मध्यप्रदेश के एक लाख लोगों में वैज्ञानिक समज बन पायी जो विज्ञान सभा के जन विज्ञान कार्यक्रम के उद्ïदेश्य में सफलता का प्रतीक है.

पारे ने बताया कि मध्यप्रदेश विज्ञान सभा द्वारा भोपाल शहर में भी चार केन्द्रों पर ट्रांजिट आफ वीनस का अवलोकन कराने की व्यवस्था की गई थी जिसमें शासकीय उ.मा.शाला आनंद नगर भोपाल, अटलका पुरी भोपाल, शासकीय हाईस्कूल चूना भट्ïटी भोपाल एवं अरेरा कालोनी इण्डस गार्डन भोपाल में आम जन तक इस अदभुत खगोलीय घटना को दिखाने की व्यवस्था सुबह 7.30 बजे से 10.30 बजे तक थी जहाँ सैकड़ों लोग सूर्य की नाराजगी के कारण सदी का अंतिम शुक्र पारगमन नहीं देख पाए. इस अवसर पर खगोल विज्ञान एवं शुक्र पारगमन घटना पर संवाद एवं चर्चा होती रही.

शुक्र पारगमन की घटना पर बढ़ी वैज्ञानिक चेतना-शुक्र पारगन की घटना को देखने और उसके होने के कारणों को जानने के लिए छह जून को सुबह-सुबह विट्ïटन मार्केट हाट बाजार में सैकड़ों लोग उपस्थित हुए, लेकिन सुबह से ही बादलो के छा जाने के कारण इस अनूठी खगोलीय घटना ना देख पाने की वजह से निराश हुए. और यह मलाल रहा कि संभवता हममे से किसी के भी जीवन काल में दुबारा नहीं होगी.भारत ज्ञान विज्ञान समिति व एकलव्य द्वारा इस घटना के सुरक्षित तरीको से दिखाने के इंतजाम किए. दो बड़े टेलिस्कोप, बाल मिरर प्रोजेक्षन व दो सौ से अधिक विशेष सोलार चश्मो की व्यवस्था की गई. इस दौरान विज्ञान प्रसार के राष्टï्रीय स्रोत व्यक्ति अनिल धीमान एवं मुकेश सातनकर विशेष रूप से उपस्थित रहे और इस खगोलीय घटना पर लोगों से बातचीत की और विभिन्न जानकारियां दी गई. शुक्र के पारगमन पर एक पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसे उपस्थित लोगों ने उत्साह से देखा. इस जगह पर आठ सौ से अधिक लोग आए जिनमें बच्चों की संख्या ज्यादा रही और बच्चों और महिलाओं में इस घटना को देखने का उत्साह भी बहुत अधिक रहा. सभी लोग लगभग 10.30 बजे तक इीस उम्मीद में रुके रहे कि थोड़ी देर के लिए ही सही बादल सूरज से हटेंगे और  इस पारगमन की घटना को देख सकेंगे.

भोपाल में लोग हताश हुए लेकिन अन्य जिलों में लोगों ने शुक्र पारगमन का लुत्फ उठाया-शुक्र पारगमन देखने के लिए सुबह 5.00 बजे सें ही सब लोग उत्सुक थे तथा इसे सही प्रकार से देखने के लिए विज्ञान प्रसार भारत सरकार नई दिल्ली के सहयोग से साइन्स सेटर म.प्र. ने मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के लगभग 100 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया था तथा सभी शिक्षकों को स्रोत सामग्री भी प्रदान की गई थी. इन सभी शिक्षकों के सानिध्य में विभिन्न जिलो में हजारों बच्चों ने शुक्र पारगमन का लुत्फ उठाया. भोपाल में जरूर बच्चों व आमजन को निराशा का सामना करना पड़ा. यहाँ नित्य सेवा सोसायटी गांधीनगर तथा साइन्स सेंंटर (ग्वा.) म.प्र. के राज्य कार्यालय में शुक्र पारगमन को देखने की व्यवस्था की गई थी. लेकिन बादलो के  कारण सभी को काफी निराशा हुई. विभिन्न जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार इन्दौर में जागृति शर्मा के सानिध्य में सोलर फिल्टर तथा प्रक्षेपित प्रतिबिम्ब के माध्यम से लगभग 500 बच्चों व आमजन ने शुक्र पारगमन को देखा. इसी प्रकार उज्जैन में रेखा शर्मा एवं भाटिया के मार्गदर्शन में शा. कन्या उ.मा. विद्यालय क्षीरसागर में शुक्र पारगमन देखा गया. दतिया के जिला समन्वयक सी.पी. शर्मा तथा शिक्षक शैलेन्द्र खरे ने बताया कि दतिया के भाण्डेर में सैकड़ों लोगों को इस घटना को दिखाया गया. इसी प्रकार होशंगाबाद के सोहागपुर में बी.एल. मलैया के मार्गदर्शन में ग्वालियर में सी.एस. उप्रेति के मार्गदर्शन में छिन्दवाड़ा में जे.पी. यादव के मार्गदर्शन में तथा सिवनी में श्री विजय शुक्ला के मागदर्शन में सैकड़ों की संख्या में इस घटना को देखा. इस पारगमन के समय जहाँ एक और इसे देखने का उत्साह था तो दूसरी ओर अनेक लोग ऐसे भी थे जिन्होंने कहा कि यह पारगमन कर्क राशि पर भारी है इसलिए वे इस नहीं देखेंगे. ऐसे लोगों को भी समझा बुझाकर पारगमन दिखाया गया जिससे इससे जुड़े हुए अंधविश्वास को दूर किया जा सके.

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