इन्दौर, 16 फरवरी. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री तथा राजनीतिक गलियारों में ‘लोकपाल मंत्री’ के नाम से ख्यात नारायण सामी का कहना है कि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार पर और शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है.

पुंडुचेरी में सामाजिक सरोकारों के मुद्दों पर आयोजित संपादकों के सम्मेलन में बातचीत के दौरान आपने कहा कि इस बजट सत्र में सरकार एक ऐसा बिल पेश करने जा रही है जिसमें किसी के भी खिलाफ आई शिकायत को आगे अधिकृत जांच एजेंसी को अग्रेषित किया जाएगा तथा हर स्तर पर शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा. इसी तरह टेंडर में होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी एक बिल लाया जा रहा है. इसमें खुली टेंडर नीति के बिंदु बनाए गए हैं. वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इसे तैयार किया है. मंत्रियों के विशेष कोटे भी खत्म किए गए हैं. उनके पास से सीधे तौर पर भूमि, खदान आदि आबंटन की शक्तियां छीन ली गई हैं. खदान आबंटन की भी खुली नीति लाई जा रही है ताकि पारदर्शिता बनी रहे. आईएएस अफसरों के खिलाफ शिकायतों में  एक साल के भीतर जांच शुरू करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है. जांच अधिकारियों का भी एक पैनल बनाया जाएगा. ताकि भ्रष्टाचार की आशंकाएं खत्म हो सकें. इसके साथ ही उपयुक्त जांच के आधार पर पंद्रह साल की सेवा के बाद आईएएस अफसरों को सीधे हटाया जा सकेगा. कार्पोरेेट क्षेत्र में भ्रष्टाचार रोकने के लिए कानून में बड़े संशोधन किए जा रहे हैं. आपने कहा यूपीए सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैंै. किसी नेता और अफसर को सरंक्षण नहीं दिया. सन 2005 में ही हम सूचना का अधिकार ले आए थे. दुनिया के लगभग पांच देशों में ही इस तरह का कानून है. सीटिजन चार्टर बिल भ्रष्टाचार रोकने का महत्वपूर्ण हथियार है. सीबीआई ने भी अनेक केस प्रस्तुत किए हैं.

ये भी बोले मंत्री…

  • नरेगा योजना के पहले महात्मा गांधी का नाम इसलिए जोडऩा पड़ा क्योंकि एक राज्य में केंद्र सरकार की इस योजना को मुख्यमंत्री के नाम से शुरू किया जा रहा था.
  •  एक राज्य में मनरेगा में जमीन पर कोई काम नहीं हुआ सरपंच और अधिकारियों ने राशि खा ली.
  • एक राज्य में तो विकास योजना की राशि से एक जिले में पंद्रह करोड़ के कीटनाशक खरीद लिए गए.
  •  एक अन्य राज्य में प्रधानमंत्री सड़क योजना में भारी भ्रष्टाचार किया गया.

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