मान्यता यही है कि ‘कोयले की दलाली में काले हाथ होते ही हैं.’ एक मुहावरा यह भी है कि ‘काजल की कोठरी में कितनों ही स्यानो जाये, एक लीख लागिये कि लागिये’. वहीं इन दिनों केंद्र सरकार व संसद में कोयला उपखंडों के आवंटन पर हो रहा है. यू.पी.ए. सरकार के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी, यू.पी.ए. सरकार, भाजपा की छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश तथा झारखंड और पश्चिम बंगाल की सरकारों पर कोयला उपखंडों के आवंटन के आरोप लग रहे हैं.

कोयले पर भारत के नियंत्रक लेखा परीक्षक की रिपोर्ट को लेकर आरोप- प्रत्यारोपों का राजनैतिक दलदल बना हुआ है. संसद चल नहीं पा रही है. प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री श्री सिंह को इस घोटाले का जिम्मेवार बता रहा है. सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री ने एक लंबी खामोशी के बाद लोकसभा में और उनकी सरकार की तरफ से जो कहा जा रहा है वह बहुत ही तथ्यपूर्ण है. इसलिये इस पर संसद की कार्यवाही और उस पर बहस होनी ही चाहिये.

प्रधानमंत्री की ओर से यह कहा जा रहा है कि कोयला आवंटन पर यू.पी.ए. सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई है. आवंटन की प्रक्रिया यू.पी.ए. सरकार से पहले से चली आ रही है. इस बार भी कई राज्य सरकारों ने जिनमें भाजपा की छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश, झारखंड व पश्चिम बंगाल की तत्कालीन वामपंथी सरकारों ने भी कोयलाखंडों की खुली नीलामी का विरोध किया था. वे आवंटन प्रक्रिया के पक्ष में थे. यह फैसला सिर्फ केंद्र सरकार का नहीं बल्कि संघीय सरकार की अवधारणा के अनुकूल केंद्र व राज्य सरकारों का  मिला-जुला फैसला है. कोयले की खुली नीलामी के बारे में जो विधेयक लाया गया है, वही अभी भी संसद के समक्ष लंबित है और पारित नहीं हुआ है.

जो भी आवंटन अभी हुए हैं वे स्क्रीनिंग कमेटी के जरियेे हुये हैं. उद्योग जगत व राज्य सरकारों का अभिमत यही था कि नीलामी से कोयले के दामों में भारी वृद्घि होगी. इसलिये आवंटन की प्रक्रिया दिये गये रेटों के आधार पर किया जाना जारी रखा जाये. सी.ए.जी. ने अपनी आडिट रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह की सरकार पर भी घोटाले व राजस्व हानि का सीधा आक्षेप लगाते हुये कहा है कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार के मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन को जो कोल ब्लाक आवंटित किया था उसे राज्य सरकार ने ही बहुत ही कम दामों पर एक निजी कंपनी को आवंटित किया था, जिससे 1052 करोड़ रुपयों का राजस्व घाटा सरकार को हुआ. एक आक्षेप यह भी है भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी की सिफारिश पर भी एक कोल ब्लाक आवंटित हुआ है.

इस समय यह धारणा है कि इस घोटाले में भा.ज.पा. की राज्य सरकारें व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गडकरी इन घपलों में शामिल हैं. इसलिये वह संसद में बहस को चलाने ही नहीं दे रही है. उसका उद्देश्य अपने को बचाना है. इसलिये प्रधानमंत्री को निशाना बना कर रिपोर्ट पर बहस नहीं होने देना चाहती. प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस मामले की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं. सी.ए.जी. रिपोर्ट तथ्यहीन और गलत है. लोक लेखा समिति व सदन में स्थिति स्पष्टï हो जायेगी. इस सबके बाद अब देश हित में यही है कि रिपोर्ट पर संसद में चर्चा हो. प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगना मामले को स्थायी रूप से खत्म करने व बचने का प्रयास है.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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