नई दिल्ली,24 अगस्त, नससे.   केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कोयला ब्लॉक के आवंटन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें इस आवंटन से सरकारी खजाने को 1.85 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान की बात कही गई है।

केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने केंद्रीय कोयला मंत्री प्रकाश जायसवाल के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, यदि कोयला का खनन नहीं किया गया है, तो लाभ या नुकसान का सवाल ही नहीं है। संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुक्रवार को भी हंगामे की भेंट चढ़ गई। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग पर लगातार चौथे दिन हंगामा किया जिससे कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वो अपनी मांग पर कायम है। वो प्रधानमंत्री के इस्तीफे से कम पर राजी होने को तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार की नजर सोमवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक पर टिकी है। सरकार को लग रहा है कि इस बैठक में बात बन सकती है। अगर ऐसा नहीं होता तो प्रधानमंत्री दोनों सदनों के नेता विपक्ष से मिलकर गतिरोध को खत्म करने की कोशिश कर सकते हैं।

अगर बात फिर भी नहीं बनी, तो सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर सत्तापक्ष जनता के बीच जाकर अपनी बात रखेगा। ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्र को सीधे संबोधित करते हुए इस मामले में सरकार का पक्ष रखेंगे। गुरुवार को लोकसभा में सदन के नेता सुशील कुमार शिंदे जब सुषमा स्वराज और अरुण जेटली से मिले तो उन्होंने उनके सामने बहस की पेशकश की थी। ये भी पूछा था कि अगर वो इसके लिए तैयार नहीं हैं तो फिर क्या सदन को स्थगित कर दिया जाए। लेकिन बीजेपी नेताओं ने दो टूक कह दिया कि वो इस मुद्दे पर टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। इसके बाद से ही कांग्रेस और सरकार का एक धड़ा इस राय का है कि सत्र स्थगित करने का ठीकरा बीजेपी पर फोड़कर जनता के बीच उसकी पोल खोली जाए।

वित्त मंत्री चिदंबरम ने भी शुक्रवार को कहा कि वो जनता की अदालत में अपनी बात कहेंगे। इस बीच बीजेपी के भीतर भी ये मंथन चल रहा है कि अगर संसद सत्र उसकी वजह से स्थगित हुआ तो क्या जनता के बीच इसका सही संदेश जाएगा। ऐसे में बीजेपी भी कई विकल्पों पर विचार कर रही है। विपक्षी एकता को और मजबूत करते हुए सरकार पर दबाव बनाया जाए। एआईएडीएमके और बीजेडी जैसी पार्टियों की राय है कि सरकार को ऐसे नियम के तहत बहस कराने को मजबूर किया जाए जिसमें वोटिंग का प्रावधान हो। ऐसे में एक बार फिर ये साफ होगा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को बचाने वाली पार्टियां कौन-कौन सी हैं।

बीजेपी का एक धड़ा इस राय का भी है कि प्रधानमंत्री पर हमला जारी रखते हुए सड़कों पर उतरा जाए। 1 लाख 76 हजार करोड़ के टेलीकॉम घोटाले और कोयला आवंटन मामले में सरकारी खजाने को हुए 1 लाख 86 हजार करोड़ के नुकसान जैसे मामलों को सीधे जनता के बीच रखते हुए सरकार को निशाना बनाया जाए। ऐसे में सबको इंतजार सोमवार का है जब पक्ष और विपक्ष दोनों इस गतिरोध पर अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे।

कोयला घोटाले की आग में संसद का सप्ताह स्वाहा

संसद की इस पूरे सप्ताह की कार्यवाही कोयला ब्लाक आवंटन मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग को लेकर भारी हंगामे और नारेबाजी की भेंट चढ गयी. कोयला ब्लाकों के आबंटन में राजकोष को एक लाख 86 हजार करोड रूपये के कथित नुकसान के संबंध में गत शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में पेश नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक..सीएजी…की रिपोर्ट पेश होने के बाद इस सप्ताह की शुरूआत से आज तक हंगामा लगातार जारी रहा जिसके कारण पूरे सप्ताह लोकसभा और राज्यसभा में कोई कामकाज नहीं हो सका. लोकसभा में आज सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरु होते ही पिछले तीन दिनों की तरह भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सदस्य प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए अध्यक्ष के आसन के पास आकर नारेबाजी करने लगे 1 अन्नाद्रमुक. वामदलों तथा तेलुगूदेशम के सदस्य भी अपनी सीटों पर खडे हो गए1 इसके विरोध में सत्ता पक्ष के सदस्य भी अपनी सीटों पर खडे होकर शोरशराबा करने लगे.

अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदस्यों से शांत रहने की अपील करते हुये प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया लेकिन हंगामा जारी रहने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. पहले स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे कार्यवाही शुरू होते ही मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ..भाजपा.. उसके सहयोगी दल और अन्ना द्रमुक के सदस्य पहले की तरह फिर पीठासीन उपाध्यक्ष प्रांसिस्को सरदिन्हा के आसन के समक्ष आ खडे हुये और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे1 वामपंथी पार्टियां और अन्य विपक्षी दलों के भी सदस्य अपनी ..अपनी सीटों पर खडे होकर कुछ कहते देखे गये..लेकिन उनकी आवाज शोरगुल में सुनी नहीं जा सकी.

दूसरी तरफ कांग्रेस एवं सत्तारूढ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन..संप्रग…के उसके सहयोगी दलों के कई सदस्य अपनी सीट से उठकर जवाबी नारेबाजी करने लगे1 संप्रग के घटक ..नेशनल कांफ्रेंस के महबूब बेग अपने हाथ मे ंएक पोस्टर लिये हुये थे जिस पर लिखा था..डोंट स्टॉल…1 विपक्षी दलों के हंगामे एवं नारेबाजी के बीच श्री सरदिन्हा ने निर्धारित कार्यसूची के अनुसार दस्तावेज एवं कागजात सदन पटल पर रखवाये और संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने अगले सप्ताह की कार्यसूची भी पेश की1 इस पूरे दौर में श्री सरदिन्हा बार..बार सदस्यों से अपनी सीट पर जाने का आग्रह करते रहे लेकिन इसका कोई असर नहीं होते देख उन्होंने कुछ मिनटों के भीतर ही सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिये स्थगित कर दी.

राज्यसभा में कार्यवाही जैसे शुरु हुई सभापति हामिद अंसारी ने प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरु की तो भारतीय जनता पार्टी .भाजपा. शिवसेना और अन्नाद्रमुक के सांसद अपनी सीट से उठकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करने लगे और नारेबाजी करनी शुरु कर दी. इस पर कांग्रेस के भी कुद सदस्य खडे होकर विरोध जताने लगे1भाजपा के समर्थन में जद .यू. के सांसद शिवानंद तिवारी सीट से उठे पर वे चुप ही रहे. सपा और बसपा तथा वामदल के सांसद अपनी सीट पर बैठकर नजारा देखते रहे. संसद का मूड भांपते हुए श्री अंसारी ने दोपहर बारह बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी. बारह बजे जब दोबारा सदन की कार्यवाही शुरु हुई तो भाजपा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने फिर हंगामा मचाना शुरु कर दिया. भाजपा के विनय कटियार और जे पी नंदा .प्रधानमंत्री इस्तीफा दो. के नारे लगाते हुए उप.सभापति के आसन के पास पहुंच गए. जद .यू. शिवसेना तथा शिरोमणि अकाली दल के भी सांसद खडे होकर भाजपा सांसदो का समर्थन करने लगे. उपसभापति पी.जे.कुरियन ने स्थिति को बेकाबू होता देख आवश्यक कागजात सदन के पटल पर रखवाने के बाद सदन की कार्यवाही 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

दो बार के स्थगन के बाद अपराह्न ढाई बजे कार्यवाही शुरु हुई तो उपसभापति पी.जे.कुरियन ने निजी विधेयक और विशेष उल्लेख के लिए सदस्यों का नाम पुकारा लेकिन भारतीय जनता पार्टी के सदस्य नारेबाजी करते हुये आसन के सामने आ गये. उपसभापति ने राष्ट्रीय जनता दल के राम कृपाल यादव और कांग्रेस की प्रभा ठाकुर से अपना वक्तव्य सदन पटल पर रखने के लिए कहा तथा हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही सोमवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. सदन में सत्तापक्ष में अधिकतर मंत्री मौजूद नहीं थे. केवल संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरीश रावत की मौजूदगी उल्लेखनीय है.

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