राज्यपाल यादव की संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की कंट्री हेड से चर्चा

भोपाल, 28 अगस्त नभासे. यादव ने कहा है कि घटते लिंगानुपात, बाल-विवाह, घर में प्रसव, कम उम्र में बच्चों का जन्म,दो बच्चों के बीच में कम समय का अंतर, बालिकाओं के प्रति उपेक्षा, महिला अशिक्षा और उनके प्रति हिंसा जैसी विसंगतियों को दूर करने के लिए सामाजिक और वैचारिक बदलाव की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि यह बदलाव सामाजिक चेतना और जन-जागृति से ही सम्भव है.  यादव राजभवन में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की भारत प्रमुख फरेडरिका मैयर से इस संस्था द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों और उसकी भावी योजनाओं पर चर्चा कर रहे थे. यादव ने कहा कि गरीब और पिछड़े लोगों विशेष रूप से आदिवासी बहुल इलाकों के युवाओं को जीवन की बुनियादी सुविधाएँ और साधन मुहैया करवाना होगा. उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पीने का साफ पानी, व्यवसायिक प्रशिक्षण, उनके पारम्परिक कौशल के विकास के लिए तकनीकी सहायता और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाकर ही एक स्वस्थ और सकारात्मक समाज की कल्पना को मूर्तरूप दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इन इलाकों में आवास, अस्पताल, स्कूल,प्रशिक्षण केन्द्र, जैसी संस्थाओं की मजबूत अधोसंरचना का निर्माण भी जरूरी है. यादव ने कहा कि इस दिशा में प्रदेश में काफी काम हुआ है लेकिन बहुत कुछ किया जाना बाकी है. संतुष्ट होकर नहीं बैठा जा सकता है.

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य शिक्षा और जीवन कौशल तथा सामाजिक कुशलता की चेतना के प्रसार से ही सदियों पुरानी धारणाओं और मान्यताओं से मुक्ति पाना सम्भव होगा. फरेडरिका मैयर ने प्रदेश में चलाये जा रहे  बेटी बचाओ आन्दोलन और महिला सशक्तिकरण की सशक्त और परिणाममूलक योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी संस्था द्वारा वर्ष 2013 से पाँच वर्ष का कंट्री प्रोग्राम-8 मध्यप्रदेश सहित छह राज्य में शुरू किया जायेगा. मैयर ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर प्रजनन और स्वास्थ्य इस कार्यक्रम का प्रमुख फोकस केन्द्र है. मैयर ने बताया कि उनकी संस्था मातृ स्वास्थ्य सुधार, बालिका के समाजिक सम्मान, घटते लिंगानुपात और स्वैच्छिक पारिवारिक नियोजन के क्षेत्र में प्रदेश सरकार को आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध करवा रही है.

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