मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान खाद की समस्या पर सतर्क और संवेदनशील दोनों हो रहे हैं. राज्य में खाद का काफी स्टाक कर लिया गया और किसानों को उठाने का कह दिया. पिछले साल उन्हें और किसानों को खाद के लिये काफी परेशान होना पड़ा था. खाद में मिलावट व काला बाजारी का दौर चल पड़ा. रेलवे के रैक नहीं मिल रहे थे. इस साल खरीफ फसलों के लिये केंद्र द्वारा रासायनिक खादों में असाधारण वृद्घि से वे बहुत खफा हो रहे हैं. समर्थन मूल्य खरीदी में राज्य सरकार ने केंद्र के भावों के ऊपर उस पर बोनस दे दिया.

लेकिन अब केंद्र सरकार ने खादों पर सब्सिडी घटाने से उनमें जो मूल्य वृद्घि हुई है उससे स्थिति विषम हो गई है. जो समर्थन मूल्य व बोनस के नाम पर किसानों को मिला, उससे कहीं ज्यादा खादों की मूल्य वृद्घि से किसानों से लिया जा रहा है. पेट्रोल की तरह खाद पर भी निजी कंपनियों को यह छूट दे दी गई कि वे अपनी लागत लाभ के आधार पर मूल्य तय कर लें. इसका नतीजा यह सामने आया है कि इन कंपनियों ने खाद की एक बोरी की कीमत 555 रुपये से बढ़ाकर 1272 रुपये कर दी. यह 300 प्रतिशत वृद्घि तो खेती को ही चौपट कर देगी.

इसी तरह की छूट से सीमेंट कंपनियों ने अपनी कारटेल बनाकर सीमेंट की एक बोरी की कीमत 160 रुपये बढ़ाकर 300 रुपये कर दी थी. इसके लिये भारत सरकार के कंपीटीशिन आयोग ने इन कंपनियों पर 60 अरब रुपयों का जुर्माना लगाया था. कंपनियों को छूट का मतलब अब यह सामने आ रहा है कि चाहे जितना बढ़ा लो और बाद में उन पर भारी जुर्माना लगाकर सरकार का खजाना भर लेगी. मूल्य निर्धारण में सरकार को किसी न किसी प्रकार का नियंत्रण रखना ही चाहिये.

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