नई दिल्ली, 10 फरवरी.  उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव का प्रथम चरण समाप्त हो गया है और दूसरे चरण का चुनाव होने जा रहा है लेकिन अभी तक कोई भी दल यह कहने की स्थिति में नहीं है कि असली लड़ाई किसके किसके बीच है. परंतु जिस प्रकार से कांग्रेस को लेकर बसपा, सपा व भाजपा के लोग आक्रामक हुए हैं वह भी किसी न किसी रूप में बदलते राजनीतिक फिजा का आगाज है.

प्रेक्षक मान रहे हैं कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के नेतृत्व में जिस प्रकार से पार्टी ने आक्रामक प्रचार अभियान आरंभ किया है वह किसी भी विपक्षी दल के लिए कठोर चुनौती के समान है. श्री गांधी के लगातार प्रयास का ही परिणाम है कि पिछले चुनाव में चौथे स्थान पर रही पार्टी आज उठ खड़े होने व भविष्य में प्रदेश का नेतृत्व करने का दावा करने लगी है. प्रेक्षक मान रहे हैं कि बदलते समय के साथ ही बसपा, सपा व भाजपा के लगभग सभी नेताओं ने सबसे पहले कांगे्रस पर हमला बोलना आरंभ कर दिया है जो कांगे्रस के लिए सुखद राजनीतिक खबर के समान है. क्योंकि राजनीतिक लड़ाई में जब तक किसी व्यक्ति या दल से चुनौती नहीं हो तब तक दूसरे दल के लोग उसपर सीधा हमला नहीं करते हैं. हालांकि प्रेक्षक यह भी मान रहे हैं कि कांग्रेसी सभाओं में जिस प्रकार से लोगों की उपस्थिति दिख रही है यदि वह वोट में तब्दिल हुई तो परिणाम चौकाने वाले होंगे.

कांग्रेस पार्टी के सामने खोने के लिए कुछ भी नहीं है लिहाजा जो भी होगा पार्टी को हर हाल में फायदा ही है. कांगे्रसी रणनीतिकार प्रथम चरण के चुनाव के बाद अपनी हमलावर रणनीति में बदलाव करते हुए अब बसपा से ज्यादा सपा पर हमला बोलना शुरू कर दिया है. जो किसी न किसी रूप में कांग्रेस के बढ़ते कदम का परिचायक है. हलांकि प्रेक्षक यह भी मान रहे हैं कि जैसे-जैसे चुनाव का दूसरा और तीसरा चरण समाप्त होगा वैसे-वैसे कांग्रेस के खिलाफ अन्य दलों का हमला केन्द्रित होता जाएगा और यहीं हमला कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम करेगा. यानी अन्य दलों के बढ़ते हमलों के साथ ही कांग्रेस की राजनीति हैसियत बढ़ती जाएगी.

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