संजीव शर्मा
भोपाल,13 जुलाई,राज्य की सत्तारुढ़ भाजपा सरकार किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ जबर्दस्त हल्ला बोलने की तैयारी कर रही है.इरादा राज्य की सत्ता को बनाए रखने और दिल्ली में दस साल के बाद सरकार में वापसी करने का है.

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा ने आज कहा कि मध्यप्रदेश की तरह दिल्ली में कृषि केबिनेट का गठन हो इससे न केवल खेती को लाभ का धंधा बनाने में मदद मिल सकेगी बल्कि किसानों की नई पीढ़ी भी तैयार हो सकेगी.झा ने कहा कि वह पार्टी कार्यकत्र्ता को सड़क पर उतारने और उसे हर रोज काम करने के लिए प्रेरित करने में भरोसा रखते हैं. यहां अटल किसान पंचायत के दो रोज पहले उन्होंने नवभारत से कहा कि भाजपा और कांग्रेस के राजनीति करने के तौर तरीक  में फर्क  हैं.भाजपा चने के बूते पर सरकार में आई हैं इस लिए उनकी पाटी्र्र के लोग आज भी कुछ भी गलत करने से डऱते हैं.शायद यही वजह है कि उनकी पार्टी अन्य दलों से हटकर दिखाई देती है.

सवाल: किसान पंचायत की आवश्यकता क्यों हुई ?

जबाव: पिछले 65 सालों में दिल्ली में किसान समस्या पर दो मिनट भी चर्चा नहीं हुई है अगर केंद्र की कांग्रेसनीत सरकार वास्तव में किसान हितैषी है तो उसे कृषि केबिनेट के गठन के साथ ही संसद का एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए. ताकि सिर्फ किसानों की समस्याओं और उनके निराकरण पर बातचीत की जा सके.हमारे दल का ये प्रयास है कि राजधानी में किसानों के साथ बैठ कर चर्चा के बाद एैसा दस्तावेज तैयार किया जाए  जिससे कि उनकी समस्याओं के समाधान में मदद मिले.इसकेे जरिए हम केंद्र को किसानों की जायज मांगों को मानने के लिए विवश कर सकेंगे.

सवाल: केंद्र से आपकी क्या अपेक्षाएं है ?

जबाव:मध्यप्रदेश की तरह केंद्र को भी किसानों को शून्य नहीं तो कम से कम एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण मुहैया कराने की पहल करना चाहिए.मध्यप्रदेश में कृषि के लिए अलग से बजट का प्रावधान है. यही नहीं राज्य में किसानों को जहां 18 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दिया जाता था.उसे क्रमश: घटाकर शून्य कर दिया गया है. ऐसा निर्णय लेने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है. इससे कुछ सबक लेकर केंद्र सरकार को भी किसानों के ऋण के लिए ब्याज की दर जो अभी सात फीसदी के आसपास है उसे कम से कम एक प्रतिशत करना चाहिए.

देश भर में किसानों के खातिर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने जो काम किए हैं. कमोबेश वैसा काम किसी सरकार ने नहीं किया अब यहां मध्यप्रदेश में उसी तर्ज पर शिवराज सरकार कार्य कर रही है. इसीलिए वाजपेयी के नाम पर 15 जुलाई को अटल किसान महापंचायत के आयोजन का निर्णय किया गया है.

सवाल: महापंचायत में और क्या होगा?

जबाव:महापंचायत के माध्यम से खाद की किल्लत और उसकी

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