• हंगामे के कारण नहीं चली संसद

रिटेल मसले पर संसद 7 दिसंबर तक स्थगित

नई दिल्ली, 2 दिसंबर.नससे. रिटेल कारोबार में विदेशी निवेश के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और प्रणब मुखर्जी में ठन गई है. प्रणब मुखर्जी के उस बयान पर दिनेश त्रिवेदी ने पलटवार किया है जिसमें उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि संकीर्ण राजनीति रिटेल में विदेशी निवेश के मुद्दे पर बाधक साबित हो रही है. केंद्रीय रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने प्रणब मुखर्जी के इस बयान पर कहा शुक्रवार को कहा है कि कि छोटी सोच वाले ही ऐसा बयान देते हैं. जाहिर तौर पर उनका इशारा प्रणब मुखर्जी की ओर था. इससे पहले भी दिनेश त्रिवेदी अपने उस बयान को लेकर चर्चा में आए थे जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं किताब पढ़ रहा था इसलिए कैबिनेट में नहीं गया.

प्रणब मुखर्जी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद दिनेश त्रिवेदी में इससे पहले भी मतभेद की खबरे आ चुकी है. रिटेल सेक्टर में एफडीआई के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस भी सरकार पर फैसला वापस लेने का दवाब बना रही है. फुटकर कारोबार में विदेशी पूंजी के निवेश को लेकर संसद में गतिरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शोरशराबे के कारण नौंवें दिन भी नहीं चली. इस तरह संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दो सप्ताह दोनों सदनों का कामकाज ठप रहा. गत दिनों की तरह एफडीआई को लेकर शोरशराबे के बीच दोनों सदनों में केरल एवं तमिलनाडु के विभिन्न दलों के सदस्य मुल्लापेरियार बांध को लेकर भी नारेबाजी करते और पोस्टर लहराते दिखाई दिए. संसद के 22 नवंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र में एक भी दिन कामकाज नहीं हो सका है. नौ दिनों में पहले तीन दिन महंगाई कालेधन और तेलंगाना के मुद्दों पर और पिछले छह दिन एफडीआई के मुद्दे पर विपक्ष एवं सत्तारूढ गठबंधन के सदस्यों के तीखे विरोध के कारण संसद नहीं चल पाई. शीतकालीन सत्र की प्रस्तावित कुल 21 बैठकों में नौ दिन महंगाई तथा काले धन पर कार्यस्थगन की मांग और फिर एफडीआई का फैसला वापस लेने की मांग को लेकर गतिरोध की भेंट चढ़ चुके हैं.

लोकसभा में सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष मीरा कुमार ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की वैसे ही विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से खडे हो गए और सरकार से एफडीआई पर फैसला वापस लेने की मांग करने लगे. इस मुद्दे पर सत्तारूढ संयुक्त प्रप्रगतिशील गठबंधन के घटक दल तृणमूल कांग्रेस तथा सहयोगी दलों समाजवादी पार्टी एवं बहुजन समाज पार्टी ने भी विपक्ष का साथ दिया. कई सदस्यों ने अध्यक्ष के आसन के सामने आकर नारेबाजी शुरू कर दी. तेलंगाना राष्ट्र समिति और आंध्र प्रदेश के इस क्षेत्र से कांग्रेस सदस्यों ने पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए विधेयक लाने की मांग के समर्थन में तेलंगाना विधेयक जल्दी लाओ के नारे लिखी तख्तियां लहराईं. वहीं केरल के सदस्य मुल्लापेरियार बांध को लेकर अपना विरोध प्रकट कर रहे थे. कुमार ने उत्तेजित सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की. लेकिन इसका कोई असर नहीं होता देखकर उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी. सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया. भाजपा के सदस्यों ने अपने स्थानों पर खड़े हो कर एफडीआई वापस लो के नारे लगाने लगे. वहीं समाजवादी पार्टी, जनता दल (यू) और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष के आसन जमा होकर नारे लगाने लगे. उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने शोर शराबे के बीच सरकारी कागजात सदन पटल पर रखवाने का कार्य पूरा किया तथा उसके बाद कार्यवाही सात दिसंबर तक के लिये स्थगित कर दी.

ममता ने ठुकराई पीएम की अपील, समर्थन नहीं

कोलकाता. रिटेल में एफडीआई के मसले पर ममता बनर्जी को मनाने में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कामयाब होते नहीं दिख रहे. पीएम ने आज इस मुद्दे पर ममता से फोन पर बात की और उनकी पार्टी का समर्थन मांगा लेकिन ममता ने इस बातचीत के बाद साफ कहा कि हम इस मुद्दे पर सरकार को समर्थन करने नहीं जा रहे. ममता ने कहा कि हम सरकार को गिराना नहीं चाहते मगर देश के किराना दुकानदारों और किसानों का नुकसान भी नहीं होने देंगे. ममता ने कहा कि सुबह प्रधानमंत्री का फोन आया था. उन्होंने मेरी मां का हाल-चाल पूछा और रिटेल में एफडीआई पर समर्थन करने को कहा. ममता ने कहा कि सरकार को पहले किसानों के अधिकार सुरक्षित करने चाहिए. और फिर किसी पॉलिसी के बारे में सोचना चाहिए. ममता ने कहा कि हम इस मुद्दे पर सरकार को समर्थन करने नहीं जा रहे. कुछ संवेदनशील मसले हैं जिनपर हमें स्टैंड लेना ही पड़ेगा. एक पार्टी के रूप में भी हम रिटेल में एफडीआई का समर्थन नहीं कर सकते.

पलटा अकाली दल

चंडीगढ़. खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी देने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करने के बाद पंजाब में सत्तरूढ़ अकाली दल इससे पलट गया है. समझा जाता है कि उसने यह कदम पंजाब की गठबंधन सरकार में साझीदार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कहने पर उठाया है, जो इसका विरोध कर रही है.

अकाली दल के अध्यक्ष तथा पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के पुराने रुख के खिलाफ पार्टी ने इस पर संसद में चर्चा कराने की मांग की है. यह फैसला गुरुवार शाम पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में लिया गया. इससे पहले सुखबीर ने खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के सरकार के फैसले का स्वागत किया था. यहां तक केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा को पत्र लिखकर उन्होंने इसके लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के इस कदम की प्रशंसा की थी. लेकिन गुरुवार शाम अकाली दल की कोर कमेटी की बैठक में उनके सुर बदले-बदले से थे. उन्होंने कहा कि छोटे किसानों, सब्जी विक्रेताकओं और लघु व मझोले व्यापारियों के हितों को देखते हुए इस मुद्दे को नए सिरे से देखने की जरूरत है. बैठक के बाद पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले संसद में बहस करानी चाहिए थी. पार्टी ऐसे किसी भी कदम का समर्थन नहीं करेगी जिससे किसानों, छोटे एवं मझोले व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के हित प्रभावित होते हों. पार्टी एफडीआई प्रस्ताव को सार्वजनिक करने तथा इसे संसद में रखने की मांग करती है. सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने पंजाब के मुख्यमंत्री व अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल से बातचीत कर इस मुद्दे पर संप्रग सरकार का समर्थन नहीं करने को कहा. इसके बाद बादल ने पार्टी की कोर कमेटी से इस विचार करने को कहा और फिर पार्टी सुखबीर के पुराने रुख से पलट गई.

Related Posts: