मुस्लिमों को आरक्षण की कवायद के बाद

नई दिल्ली, 10 जनवरी. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मायावती के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी तैयारी में है. कांग्रेस महादलितों को आरक्षण का नया कार्ड खेल सकती है. चुनाव में एससी के मौजूदा कोटे के अंदर महादलितों को अलग से कोटा देने का वादा किया जा सकता है.

गौरतलब है कि इससे पहले समाजवादी पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ओबीसी कोटे के अंदर 4.5 प्रश मुस्लिम आरक्षण का ऐलान कर चुकी है. इसके अलावा केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक दिन पहले कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता आने पर मुसलमानों को पिछड़े वर्ग के कोटे में 9त्न आरक्षण दिया जाएगा. कांग्रेस आलाकमान में महादलितों के इस कोटे पर जमकर माथापची हो रही है. इससे होने वाले नफा-नुकसान के आकलन के बाद कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनावों में इस मुद्दे को उछालने का पूरा मन बना लिया है. चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस महादलितों को अलग से आरक्षण का यह कार्ड खेल सकती है. कांग्रेस की सोच एससी कोटे को दो हिस्सों में बांटकर उसे दलित और महादलित (अति पिछड़े दलित) कर देने की है. कांग्रेस आलाकमान को उम्मीद है कि उसकी यह चाल मायावती के दलित बैंक को बांटने में कारगर साबित होगी, जिसका सीधा फायदा उसे विधानसभा चुनाव में मिल सकता है.

अति पिछडा वर्ग का वोट पाने की जुगत में पार्टियां

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विधानसभा का पिछला चुनाव बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अनुसूचित जाति और ब्राहम्ण वोट बैंक के सहारे जीता था तो इस बार आगामी आठ फरवरी से तीन मार्च तक होने वाले चुनाव में राजनीतिक दल अति पिछडे वर्ग को अपने पक्ष में करने में जुटे हैं.

उत्तर प्रदेश में कोयरी, कहार, केवट, कुम्हार, गडरिये, तेली, नट और लोहार आदि अति पिछडा वर्ग में आते हैं जबकि यादव, जाट और लोधी पिछडे वर्ग में. सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, जनक्राति पार्टी के संस्थापक कल्याण सिंह और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह का यादव, लोध और जाट बिरादरी में अच्छा खासा प्रभाव है और यह जातियां उनका वोट बैंक मानी जाती हैं. उत्तर प्रदेश में अति पिछडों का ऐसा कोई नेता नहीं है जो अपने वोट बैंक को खास तरह से प्रभावित कर सके लिहाजा कांग्रेस, सपा और भारतीय जनता पार्टी इस वर्ग को लुभाने में लगी हैं. कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने पांच दिवसीय जनसंपर्क अभियान के अपने तीसरे दौर में रमाबाईनगर में जनसभा को अति पिछडा रैली का नाम दिया था.

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