नई दिल्ली, 4 अप्रैल. उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी भत्ते के वादे ने समाजवादी पार्टी को सत्ता तक तो पहुंचा दिया, लेकिन ये वादा अब सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है. रोजगार दफ्तरों में उमड़ी भारी भीड़ ने अखिलेश सरकार के होश उड़ा दिए हैं.

सरकार को पता है कि उसका खजाना इतना बोझ बर्दाश्त नहीं कर पाएगा. ऐसे में कोई ऐसी राह तलाशी जा रही है जिससे कम से कम लोगों को बेरोजगारी भत्ता देना पड़े. इसलिए सरकार कोई ऐसा रास्ता निकालना चाह रही है जिससे उसको कम लोगों को ही बेरोजगारी भत्ता देना पड़े.  दरअसल बेरोजगारों की भारी भीड़ और सरकारी खजाने की हालत को देखते हुए यूपी सरकार परेशान है. उसकी चिंता है कि ये वादा कैसे पूरा किया जाए कि सूबे की अर्थव्यवस्था पटरी से ना उतरे. आला अफसरों के बीच माथापच्ची जारी है. एक राय ये है कि बेरोजागारी भत्ता उन्ही को दिया जाए जिनकी उम्र 35 से 45 साल के बीच हो. गरीबी रेखा के नीचे बसर करने का सुबूत यानी बीपीएल कार्ड भी लाखों बेरोजगारों और भत्ते की राह में रोड़ा बन सकता है. दरअसल, सरकार बेरोजगारी भत्ते के लिए बीपीएल कार्ड को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है.

बेरोजागारी भत्ता पाने के लिए जिलों के रोजगार कार्यालयों पर अभी भी भीड़ जुट रही है. यहां पंजीकरण कराने वाले हर बेरोजगार को उम्मीद है कि उसे बेरोजगारी भत्ता मिलेगा. फिर वो चाहे 25 साल का हो या 45 से ज्यादा. जाहिर है, वादे से मुकरने पर सरकार को भारी नाराजगी झेलनी पड़ सकती है. हालांकि समाजवादी पार्टी का दावा है कि वादा किया है तो निभाएंगे भी. बहरहाल, सरकार ने बेरोजगारी भत्ते को लेकर अभी किसी नीति पर मुहर नहीं लगाई है. लेकिन, इस मुद्दे पर उसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि लोगों का संदेह बढ़ रहा है. इस कसौटी पर खरी ना उतरी तो सरकार की फजीहत होना तय है.

Related Posts: