खनिज विभाग की समीक्षा

हाथ-ठेला और साईकिल रिक्शा चालक मालिक बनेंगे

नगरीय निकायों के लिए प्रोग्रेस रेटिंग सिस्टम लागू होगा

भोपाल,3 मई,नभासं.मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज एक दिन के अंतराल के बाद फिर से विभागीय समीक्षा का दौर शुरु किया उन्होंने खनिज विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि इस दफे समग्रता से विचार कर वैज्ञानिक तरीके से खनन नीति बनाई जाएगी.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नदी की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार, अवैध उत्खनन एवं विकास सहित अन्य सभी पहलुओं पर व्यापक विचार किया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 26 हजार करोड़ की सड़कें बन रही हैं. अधोसंरचना विकास के अन्य कार्य भी प्रगति पर हैं. इन कार्यों के लिये समय पर रेत, मुरम, गिट्टी आदि आवश्यक सामग्री मिल जाय. ईमानदारी से कार्य करने वाले हतोत्साहित नहीं हों. विकास कार्यों के लिये माइनिंग की आवश्यक लीज में विलम्ब नहीं हो. नदी पर जीवन यापन करने वाले मछुआरों के रोजगार, राजस्व प्राप्ति, पर्यावरण की सुरक्षा, नदी संरक्षण, जीव-जन्तुओं की सुरक्षा आदि समस्त पहलुओं पर विचार कर वैज्ञानिक खनन नीति बनायी जाय. चौहान ने निर्देश दिये कि अवैध खनन को सख्ती से रोका जाय.

खनिज सचिव एवं खनिज विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा गौण खनिज की जरूरत का प्रस्ताव मिलने के एक ही दिन के भीतर लीज देने की व्यवस्था की जा रही है. लीज देने के अधिकार कलेक्टरों को दिये जा रहे हैं. अवैध उत्खनन पर प्रभावी कार्रवाई के लिये तहसीलदार तथा नायब तहसीलदारों को भी जाँच के अधिकार दिये जाने का प्रस्ताव है. प्रदेश के सभी हाथ-ठेला चालक और साईकिल रिक्शा चालक अगले एक साल में अपने हाथ-ठेला और साईकिल रिक्शा के मालिक होंगे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में इस सम्बन्ध में निर्देश दिये. बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर 40 हजार हाथ-ठेला-रिक्शा चालकों को मालिक बनाया गया है. शेष 50 हजार हाथ-ठेला-रिक्शा चालकों को एक साल के भीतर अपने हाथ-ठेला या साईकिल रिक्शा का मालिक बनाया जायेगा.

बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर, नगरीय प्रशासन एवं विकास राज्य मंत्री मनोहर ऊँटवाल और मुख्य सचिव आर.परशुराम भी उपस्थित थे. चौहान ने बैठक में कहा कि प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल चित्रकूट और ओरछा के विकास के लिये विशेष योजना बनायें. नगरीय निकायों के लिये प्रोग्रेस रेटिंग सिस्टम लागू करें. उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र की 20 पेयजल योजनाओं के लिये दूसरी किश्त नहीं मिलने के सम्बन्ध में वे केन्द्रीय वित्त मंत्री से मिलेंगे. उन्होंने निर्देश दिये कि सिंहस्थ की तैयारियां अभी से शुरू करें. भोपाल, ग्वालियर, सागर, बुरहानपुर की सड़कों के लिये स्वीकृत कार्यों को समय-सीमा में पूरा करवाया जाये. इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर नगर निगम सीमा के विस्तार की कार्रवाई और अवैध कालोनियों को वैध करने की प्रक्रिया में तेजी लाये. प्रत्येक बड़े शहर में एक उत्कृष्ट सड़क बनायें.

गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग

मुख्यमंत्री चौहान ने गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देश दिये कि स्वावलम्बन अभियान के तहत गैस प्रभावितों के लिये रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण का कार्य समय-सीमा में किया जाये. इस अभियान में दस हजार गैस प्रभावितों को प्रशिक्षण दिया जायेगा. उन्होंने विभाग के अस्पतालों में चिकित्सा के समुचित इंतजाम रखने के निर्देश दिये. बताया गया कि कायाकल्प योजना के जरिये चिकित्सालयों का विकास किया जा रहा है. बैठक में गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री बाबूलाल गौर, मुख्य सचिव आर.परशुराम और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

चौहान ने निर्देश दिये हैं कि स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की समग्र योजना बनायी जाय. शिक्षकों को स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाय और उनके स्थानांतरण की तर्कसंगत नीति बनायी जाय. स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति के लिये सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाय. मुख्यमंत्री ने बैठक में निर्देश दिये कि स्थानांतरण की वैज्ञानिक और तर्कसंगत नीति बनायें, जिसमें शिक्षकों की पसंद का ध्यान रखा जाये. उन्होंने कहा कि प्रत्येक 5 किलोमीटर की परिधि में हाई स्कूल की उपलब्धता जरूरी है. केन्द्र सरकार द्वारा इस वर्ष प्रदेश के नवीन हाई स्कूल की कोई स्वीकृति न देने पर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि इस संबंध में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को उनकी ओर से पत्र भेजा जाये.

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल भवनों के निर्माण की सतत मानीटरिंग की व्यवस्था करें ताकि समय-सीमा में कार्य पूरे किये जा सके. स्कूल भवनों के निर्माण में समाज-सेवियों के योगदान को प्रेरित किया जाये. ब्रिज कोर्स में और अधिक बच्चों को आने के लिये प्रेरित करें. शिक्षकों के प्रशिक्षण का स्वतंत्र मूल्यांकन करवायें. निजी विद्यालयों की फीस नियंत्रण अधिनियम के संबंध में गुजरात और दिल्ली राज्य में हुए कार्य का अध्ययन करवाया जाये. उन्होंने कहा कि प्रदेश के बच्चे प्रतिस्पर्धा में आगे आयें, इसलिये अंग्रेजी शिक्षा पर भी ध्यान दिया जाय. मध्यप्रदेश में शत-प्रतिशत बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने और अभिभावकों को प्रेरित करने के लिये मुख्यमंत्री खुद प्रदेशव्यापी दौरा करेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी जून माह में शुरू हो रहे स्कूल चले हम अभियान को जन अभियान बनाये.

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