नई दिल्ली, 14 नवंबर. पिछले एक साल से महंगाई दर नौ फीसदी के ऊपर बनी हुई है. खाद्य वस्तुओं, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का असर साफ दिखाई देने लगा है. अक्टूबर महीने में सकल मुद्रास्फीति मामूली रूप से बढ़कर लगभग दहाई अंक 9.73 प्रतिशत पर पहुंच गई.

उल्लेखनीय है कि सितंबर महीने में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित सकल मुद्रास्फीति 9.72 प्रतिशत थी. पिछले साल अक्टूबर में यह 9.08 प्रतिशत थी. अक्टूबर महीने में खाद्य वस्तुएं सालाना आधार पर 11.06 प्रतिशत महंगी हुईं. सितंबर में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 9.23 प्रतिशत थी. इस दौरान, सालाना आधार पर सब्जियां 21.76 प्रतिशत महंगी हुईं, जबकि फल 11.96 प्रतिशत महंगे हुए. वहीं दूध के दाम में 11.12 प्रतिशत, अंडा, मीट व मछली के दाम में 12.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. अक्टूबर में संपूर्ण प्राथमिक वस्तुओं की मुद्रास्फीति 11.40 प्रतिशत रही. जो सितंबर में 11.84 प्रतिशत थी. वहीं दूसरी ओर, अक्टूबर में गैर खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 7.71 प्रतिशत रही जो इससे पिछले महीने 14.82 प्रतिशत थी. गैर-खाद्य वस्तुओं में फाइबर, तिलहन और खनिज शामिल हैं. समीक्षाधीन माह में विनिर्मित वस्तुओं के दाम 7.66 प्रतिशत बढ़े, जबकि सितंबर में विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति 7.69 प्रतिशत थी. थोक मूल्य सूचकांक में विनिर्मित वस्तुओं का योगदान करीब 65 प्रतिशत है.

घटेगी महंगाई : प्रणब

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भरोसा जताया है कि बेहतर मानसून से कृषि जिंसों के दाम घटेंगे। लगभग 10 फीसदी पर पहुंच चुकी मुद्रास्फीति की मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं के ऊंचे दाम हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि बेहतर मानसून का पूरा असर दिखाई देगा। साथ ही आपूर्ति में सुधार के लिए उठाए गए कदमों के भी नतीजे दिखाई देंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि अप्रैल से अक्टूबर के सात माह के दौरान ऊंची मुद्रास्फीति की मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं की महंगाई है। इनकी कीमतों में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट का फायदा खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों की वजह से नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को खाद्य महंगाई से निपटने के लिए आपूर्ति संबंधी समस्या को दूर करना होगा। खाद्य मुद्रास्फीति 29 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 11.81 प्रतिशत के स्तर पर थी।

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