पुणे, 1 मई. संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने सचिन तेंडुलकर के राज्यसभा में जाने पर संवैधानिक सवाल खड़े किए तो सचिन ने इस बाउंसर पर सिक्स जड़ दिया.

सचिन तेंडुलकर ने कहा कि मैं 400 गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाता हूं. गौरतलब है कि सोमवार को सुभाष कश्यप ने कहा था कि संविधान की धारा 80 (त्र) के तहत सिर्फ कला, साहित्य, विज्ञान या समाजसेवा क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति को ही मनोनीत किया जा सकता है. हालांकि राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने के बाद राजनीति से जुडऩे की तमाम अटकलों पर रोक लगाते हुए महान क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर ने साफ किया कि वह क्रिकेट छोड़कर राजनीति में नहीं आ रहे हैं.

उन्होंने कहा वह हमेशा खिलाड़ी ही रहेंगे. लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि क्रिकेट मैदान पर उनके योगदान के लिए ही उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया. तेंडुलकर ने पुणे में निजी संस्था द्वारा आयोजित सम्मान समारोह के दौरान कहा, मैं नेता नहीं हूं. मैं खिलाड़ी हूं और हमेशा यही रहूंगा. मैं क्रिकेट छोड़कर राजनीति से नहीं जुड़ रहा हूं. क्रिकेट मेरा जीवन है.  मैं क्रिकेट खेलना जारी रखूंगा. कई मशहूर हस्तियों जैसे स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और ऐक्टर पृथ्वीराज कपूर को भी राष्ट्रपति ने उनके क्षेत्रों में विशेष योगदान के लिए मनोनीत किया था.
क्रिकेट में मेरी विशेषज्ञता है. मैं इसी क्षेत्र में योगदान देना चाहूंगा. मैं क्रिकेटर हूं और हमेशा ही खिलाड़ी रहूंगा. तेंडुलकर से 100वीं इंटरनैशनल सेंचुरी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि वर्ल्ड कप जीतना उनके लिए सबसे सुखद सपना था. जिसके लिए उन्होंने करीब 22 साल का इंतजार किया. उन्होंने कहा,  कोच जॉन राइट (तत्कालीन भारतीय कोच) ने 2003 में मुझसे कहा था कि मैं शतकों का शतक जडऩे वाला पहला खिलाड़ी बन सकता हूं.

जब तक आपके सपने पूरे नहीं होते, उन्हें साकार करने के लिए आपको मेहनत जारी रखनी चाहिए. कई बार सफलता आपके करीब होती है और आपको इसे हासिल करने के लिए हमेशा अतिरिक्त कदम उठाने के बारे में सोचना चाहिए. पिछले साल भारत के वर्ल्ड कप जीतने के बाद के जोशीले जश्न के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा स्टेडियम के बाहर मेरे ड्राइवर ने मुझे बताया कि फैन्स मेरी कार के ऊपर नाच रहे हैं. मैंने ड्राइवर को उन्हें रोकने के लिए नहीं कहा. मुझे कार के नुकसान की कोई चिंता नहीं थी. वर्ल्ड कप ने देश को एकजुट कर दिया था और यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन था.

दबाव भरे हालातों से निपटने के बारे में तेंडुलकर ने कहा, बैटिंग करते हुए यह महत्वपूर्ण होता है कि पिछली समस्याओं को भूलकर आपको वर्तमान क्षण पर ही ध्यान केंद्रित करना होता है. आपके पास अगली गेंद का सामना करने के लिए केवल आधे सेकंड का समय होता है. आपको सही फैसले लेने के लिए दिलो-दिमाग शांत रखना होता है. सफलता और असफलता को संभालने की क्षमता के बारे में उन्होंने कहा,  इस तरह की सोच मेरे परिवार से ही मुझे मिली है. जब मैं स्कूल और क्लब क्रिकेट में खेला करता था तो एक अनकहा नियम होता था कि प्रदर्शन के बारे में चर्चा नहीं होगी और अगले मैच के लिए तैयार रहो. यह सरल फार्मूला था. जो कुछ भी हो चुका है, उसे बदला नहीं जा सकता था, भले ही सफलता हो या असफलता. जब मैं अच्छा प्रदर्शन करता था तो घर पर एकमात्र जश्न मेरी मां द्वारा भगवान को एक मिठाई चढ़ाना होता था.  यह पूछने पर कि वह अपनी चैरिटी को सार्वजनिक नहीं करते तो उन्होंने कहा, मैं कई सालों से  अपनालय सेंटर के जरिए गरीब बच्चों को शिक्षा दिलावाता हूं. लेकिन यह खुद की संतुष्टि के लिए है, इसके लिए मुझे किसी प्रचार की जरूरत नहीं है. तेंडुलकर से लोगों से अपील की कि वे देने की खुशी का अनुभव करें क्योंकि छोटी से छोटी चीज भी किसी जरूरतमंद के लिए काफी अनमोल हो सकती है.

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