टोक्यो, 8 जुलाई. भारत ने पाकिस्तान का नाम न लेते हुए रविवार को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एक बार फिर याद दिलाया कि अफगानिस्तान में सीमा पार से आतंकवाद का खतरा अब भी बरकरार है. साथ ही भारत ने अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण के कार्यो को लेकर अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं को भी रेखांकित किया.

विदेश मंत्री एम.एम. कृष्णा ने यहां अफगानिस्तान पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा, हम अफगानिस्तान को आत्मनिर्भरता हासिल करने में सहायता कर रहे हैं, लेकिन हमें यह भी समझने की जरूरत है कि क्षेत्र में आतंकवाद को वैचारिक, बुनियादी, तार्किक व वित्तीय सहायता अब भी मिल रही है. कृष्णा ने कहा, अफगानिस्तान आज भी सीमा पार से आतंकवाद का खतरा झेल रहा है. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सहायता के अभाव में इसके पास उसका सामना करने की क्षमता नहीं है. सम्मेलन में 80 देशों तथा विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के साथ ही अंतर्राष्ट्रीयता सहायता समूहों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. वे यहां वर्ष 2014 में अफगानिस्तान से अमेरिका के नेतृत्व वाले उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान को वित्तीय सहायत के मुद्दे पर चर्चा के लिए एकत्र हुए हैं.

विभिन्न देशों तथा समूहों ने अगले चार वर्षो में अफगानिस्तान को विकास कार्यो के लिए 16 अरब डॉलर की सहायता राशि देने का वादा किया है, ताकि वर्ष 2014 में विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद भी क्षेत्र में अस्थिरता एवं अराजकता की स्थिति पर नियंत्रण किया जा सके.

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