सांची में बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बहुत बड़ी पहल की है. बौद्ध एवं मगधकालीन जमाने के प्रसिद्ध नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालयों को सांची में पुनस्र्थापित कर दिया. अब वह दौर भी मध्यप्रदेश में प्रारंभ हो गया जब सांची-भोपाल-विदिशा-रायसेन क्षेत्र सारे संसार के समस्त बौद्धों के शिक्षा व पर्यटन का बड़ा केंद्र बन जायेगा.

हमारे पड़ोसी बौद्ध राष्ट भूटान, म्यानमार, थाईलैंड, कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम, ताइवान, चीन, जापान के बौद्ध विद्यार्थी व पर्यटक यहां भारी संख्या में देखे जायेंगे. हमारे दो अंचल सिक्किम राज्य व लद्दाख बौद्ध प्रधान हैं. भूटान के प्रधानमंत्री श्री जिग्मे वाय थिनले ने भी इस अवसर पर अपने प्रथम आगमन में ही यह घोषणा कर दी कि सांची में भूटान सांस्कृतिक केंद्र बनेगा.

बौद्ध विश्वविद्यालय के निर्माण व विकास में भूटान का पूरा सहयोग रहेगा और यहां भूटान के युवा शिक्षण के लिए आएंगे. मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भूटान के केंद्र के लिए राज्य सरकार भूमि व अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध करायेगी. मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यह इरादा भी जाहिर किया कि अन्य बौद्ध राष्टï्र भी यहाँ केंद्र बनायेंगे तो उन्हें भी जमीन व सहयोग दिया जायेगा.

बौद्ध गया में सभी बौद्ध राष्टï्रों ने अपने-अपने विशाल व भव्य बौद्ध मंदिर स्थापित किए हैं. पूरी संभावना है कि सांची में भी सभी राष्ट्रों के बौद्ध सांस्कृतिक केन्द्र व विहार बन जायेंगे. श्रीलंका ने सन् 50 के दशक में ही सांची में अपना बौद्ध विहार स्थापित कर दिया है. यहां श्रीलंका की प्रधानमंत्री श्रीमती सिरीमावो भंडारनायके भी आ चुकी हैं. इसी तरह के विहार अन्य बौद्ध राष्ट्र भी यहां स्थापित करेंगे. सांची अभी तक पुरातत्वीय महत्व का बौद्ध तीर्थ स्थल है. अब श्री चौहान की इस पहल से वह शीघ्र ही बौद्ध शिक्षा का अन्तरराष्टरीय केन्द्र बन जायेगा.

सांची के पास ही सतधारा में सांची के समान ही अन्य कई स्तूप पुरातत्वीय उत्खनन में प्राप्त हुए हैं. इन्हें भी फिर से संवारा जा रहा है. यह भी सहयोगी स्तूप हैं और सांची के आधुनिक विकास में वे भी पर्यटन व बौद्ध धर्म क्षेत्र का अंग बन जायेंगे. पास ही विदिशा नगर भी सम्राट अशोक की रानी विदिशा के नाम से ही पुराने नाम ‘भेलसा’ से परिवर्तित कर विदिशा किया गया है. सम्राट अशोक के पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा विदिशा से ही बौद्ध धर्म प्रचारक के रूप में श्रीलंका बौधि वृक्ष लेकर गये थे. यह भी बहुत ही सुखद संयोग है कि आज श्रीलंका के राष्ट्रपति महेन्द्रा भी बौधि वृक्ष को लेकर यहां आये हैं और उसे सांची में रौंपा है. श्री चौहान ने सांस्कृतिक क्षेत्र में विशेषकर बौद्धों की भावना में बौद्ध विश्वविद्यालय में ऐसा योगदान दिया है जिसके लिये वे हमेशा याद रहेंगे, मध्यप्रदेश को तक्षशिला व नालन्दा दे दिया.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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