प्रति हस्तांतरण विलेख पर देय पंजीयन शुल्क की दर अधिकतम रु. 1000/-.

वृत्ति कर की सीमा 1,80,000 तक बढ़ी

भोपाल इंदौर में हज हाउस खुलेगा

पेट्रोल पर वैट की दर 28.75 से घटाकर 27 फीसदी किया गया

राजधानी में पेट्रोल 69.68 रुपए लीटर मिलेगा

कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में सात प्रतिशत की वृद्धि

विकास दर 9 फीसदी से ज्यादा

मुख्यमंत्री निकाह योजना शुरु होगी

मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना प्रारंभ

सहकारी समितियों के लिए निशुल्क जमीन

प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर पांच नए मेडिकल कॉलेज खुलेंगे

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 58 करोड़ का प्रावधान

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना पर 900 करोड़ का प्रावधान

बेटी बचाओ अभियान के तहत पेंशन योजना की शुरुआत की जा रही

सात प्रतिशत की वृद्धि का लाभ पंचायत सचिवों और अध्यापक संवर्गो को भी

  • 10 हजार करोड़ के घाटे का बजट

भोपाल, 28 फरवरी. प्रदेश के वित्त मंत्री राघवजी ने 10 हजार करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का बजट पेश कर हर वर्ग को लुभाने की कोशिश की है। पेट्रोल पर वैट में पौने दो प्रतिशत की कमी और शक्कर व कपड़ा पर पांच प्रतिशत वैट लगाने का प्रस्ताव किया गया है। राज्य कर्मचारियों का डीए 7 से बढ़ाकर 9 फीसदी कर दिया है। सरकार ने दो बेटियों के पिता को पेंशन देने का ऐलान किया।

वित्त मंत्री राघवजी लगातार 9वीं बार बजट पेश कर एक रिकार्ड बनाया. शिवराज सिंह के कार्यकाल में पेश होने वाला चौथा बजट है.  इस बार 10 हजार 17 करोड़ रुपये के घाटे के बजट के साथ प्रदेश में पहली बार कृषि बजट भी पेश किया गया।  वित्त मंत्री ने बजट में शक्कर व कपड़ा पर पांच प्रतिषत वैट लगाने का प्रस्ताव किया है, जिससे इनके दामों में इजाफा होना तय है। वहीं पेट्रोल पर आरोपित वैट को पौने दो प्रतिशत घटाते हुए 27 प्रतिशत किए जाने से दाम लगभग डेढ़ रुपए प्रति लीटर तक कम होगा। बिजली उत्पादन के संयंत्रों के उपकरण को वैट से मुक्त किया गया है, वहीं विद्युत उत्पादन तथा वितरण प्रणाली को वैट के दायरे में लाने का प्रस्ताव है।  किसानों के लिए अलग से लाए गए बजट में एक प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज देने, गेंहू पर सौ रुपये और धान पर 50 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने का प्रावधान है। इसी तरह किसानों को आठ घंटे बिजली देने का वादा किया गया है। इतना ही नहीं किसानों को सरकार पुरस्कृत भी करेगी। प्रदेश भर की सड़कों के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना के लिए विशेष प्रावधान किया गया है. इसके लिए 4694 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है. जो कि पिछले बजट की तुलना में तीन गुना है. आर्थिक विकास दर को 9 फीसदी से अधिक तक ले जाने का प्रावधान किया गया है. पुलिसकर्मियों के लिए 10 हजार नए आवास बनाने का प्रावधान किया गया है.पुलिस में 6255 नई भर्तियां होंगी. मुसलमानों को भी बजट में विशेष राहत देने का प्रयास किया गया है. इसके साथ ही प्रदेश की जीडीपी 5.57 फीसदी हो गई है. सूखे के लिए 588 करोड़, सिंचाई के लिए 2485 करोड़, शिक्षा के लिए 28 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान है. बिजली उत्पादन के लिए 14 नए संयंत्र लगेंगे. ग्वालियर में कृषि विवि और जबलपुर में वेटरनरी विश्वविद्यालय बनेगा. 9691 नई आंगनबाडियों की स्थापना की जाएगी.

समृद्घि, विकास का बजट

मुख्यमंत्री  ने कहा है कि प्रदेश का बजट समृद्धि और विकास का बजट है. उन्होंने कहा है कि बजट में समाज के सभी वर्गों के कल्याण पर ध्यान दिया गया है. कुल मिलाकर यह बजट रोजगार बढ़ाने वाला, निवेश लाने वाला और गरीब आम जनता के कल्याण वाला होगा. बजट विकासोन्मुखी, ग्रामोन्मुखी और रोजगारोन्मुखी है. मुख्यमंत्री चौहान ने मध्यप्रदेश सरकार के वर्ष 2012-13 के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कृषि और उससे सम्बद्ध विकास कार्यों पर बजट का करीब 40 प्रतिशत व्यय किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों, गरीबों, माताओं बहनों और उन सभी वर्गों के कल्याण का है जिनके लिए विभिन्न पंचायतों का आयोजन किया गया है. इसमें कर्मचारी कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है. कर्मचारियों का मॅहंगाई भत्ता बढ़ाकर केन्द्र के समान कर दिया गया है. राज्य में कृषि के विकास के साथ ही निवेश को आकर्षित करने के प्रावधान किए गए हैं. उच्च शिक्षा ऋण गारंटी योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास इस बजट में शामिल है. अधोसंरचना के विकास के लिए बिजली, सड़क और पानी के लिए बजट की उपलब्धता में काफी बढ़ोत्तरी करते हुए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया गया हैं.

वैट बढऩे से महंगाई बढ़ेगी

अजयसिंह ने सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को दिशाहीन और विकास के पैमानों पर रटा-रटाया बजट बताया उन्होंने कहा कि सरकार, कपड़ा और बिजली संयत्रों पर वेट बढ़ाए जाने से आम आदमी त्रस्त होगा. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विकास को लेकर सरकार की चिंता कितनी है यह उसके योजना और गैर योजना में बजट प्रावधान से स्पष्ट हो जाता है. गैर योजना में जहां 50 हजार करोड़ रूपये सरकार व्यय कर रही है वही योजना में उसका बजट प्रावधान मात्र 31 हजार करोड़ ही है.नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसान की चिंता में दुबली सरकार की असलियत यह है कि वर्ष 2003-04 में राज्य के विकास में कृषि क्षेत्र का जो योगदान 26 प्रतिशत हुआ करता था वह सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में घटकर 20 प्रतिशत हो गया. इसके विपरीत उद्योग सेवाकर कर दायरा बड़ गया है.इससे पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकता क्या है और प्रदेश में किसान क्यों आत्महत्या कर रहे है.कृषि बजट या कृषि कैबिनेट से किसानों का भला नहीं होगा.

कृषि क्षेत्र का अलग बजट पेश

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य विधानसभा में आज कृषि एवं संबंधित विभागों का अलग बजट पेश किया कृषि क्षेत्र का अलग बजट पेश किये जाने को लेकर विपक्ष की आपत्तियों को अध्यक्ष ने खारिज कर दिया वित्त मंत्री राघवजी ने 2012-13 का बजट पेश करने के बाद कृषि एवं संबंधित विभागों का अलग से बजट पेश किया विपक्ष के उपनेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने इस पर संवैधानिक एवं व्यवस्थागत आपत्ति उठाई लेकिन अध्यक्ष रोहाणी ने इसे खारिज कर दिया. अध्यक्ष रोहाणी ने चतुर्वेदी की आपत्तियों पर संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र की दलीलें सुनने के बाद अपनी व्यवस्था में कहा कि पहले भी जल संसाधन विभाग का अलग से बजट पेश किया गया है और कृषि एवं संबंधित विभागों का इस बार अलग से बजट रखने में कोई संवैधानिक अड़चन नहीं है सरकार ने इसके लिए राज्यपाल से भी अनुमति ली है इसलिए वह विपक्ष के उपनेता की आपत्ति को खारिज करते हैं वित्त मंत्री राघवजी ने इससे पहले जैसे ही कृषि बजट पढऩा शुरू किया, चतुर्वेदी ने इस पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि संविधान में एक ही बजट पेश करने की व्यवस्था है, इसके लिए उन्होने संविधान के संबंधित अनुच्छेद का हवाला दिया उन्होंने कहा कि संसद में अवश्य रेल एवं मुख्य बजट अलग पेश किये जाते हैं, लेकिन राज्यों में एक ही बजट रखने की संवैधानिक व्यवस्था है संसदीय कार्य मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा राज्य सरकार यदि कृषि को लाभ का धंधा बनाना चाहती है और किसानों के हितों पर उसका अधिक जोर है, तो वह कृषि एवं उससे संबंधित विभागों के बजट प्रावधानों का अलग से जिक्र कर सकती है इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं है इससे पहले भी कांग्रेस सरकार के समय जल संसाधन विभाग के बजट प्रावधानों का अलग से जिक्र किया जा चुका है

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