बालाघाट जिले में विभिन्न कार्यों के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा

  • सिर्फ  बेटियों वाले माता-पिता को छह हजार दम्पत्तियों को सम्बल कार्ड मिले
  • चालीस हजार को बांटने का लक्ष्य

भोपाल, 9 अक्टूबर. बालाघाट जिला देश का ऐसा पहला जिला है जहाँ सिर्फ  बेटियों वाले माता पिता को घरेलू कामकाज में लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं होगी. किसी तरह के झगड़े होने पर वे सिर्फ  कंट्रोल रूम फोन कर देंगे तो पुलिस तत्काल उनकी मदद करने के लिए आगे आएगी.

उन्हें यह सुविधा मिलेगी एक कार्ड से जिसका नाम है सम्बल कार्ड. बेटी बचाओ अभियान की पाँच अक्टूबर से शुरूआत हुई. प्रथम चरण में छह हजार बेटी-बेटियों के माता-पिता को सुप्रसिद्ध टीवी अभिनेत्री सांसद  स्मृति ईरानी ने सम्बल कार्ड सौंपे. चालीस हजार दम्पत्तियों को यह कार्ड दिए जाएंगे. बालाघाट जिला घने वनों, बांस, मैंगनीज, तांबा और उत्तम किस्म के चावल के लिए देश में एक अलग पहचान रखता है.

इस जिले की एक विशेषता और है कि यह मप्र का सबसे अधिक लिंगानुपात वाला जिला है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बालाघाट जिले में एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1021 है. प्रदेश के लिए एक अनूठी पहल करते हुए केवल बेटियों वाले माता पिता को संबल कार्ड प्रदान करने का निर्णय कर न केवल प्रदेश के अन्य जिलों को बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक नई राह दिखाई है.

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल बेटी बचाओ अभियान के अन्तर्गत कलेक्टर विवेक कुमार पोरवाल की पहल पर आंगनवाड़ी कार्यकत्र्ता के माध्यम से केवल बेटियों वाले माता पिता का सर्वे कराया गया. सर्वे के दौरान ऐसे माता पिता से इस बात की भी जानकारी ली गई कि उन्हें बेटा न होने पर कौन सी दिक्कतें पेश आती है और वे किन परेशानियों से गुजरते है. सर्वे से पता चला कि ऐसे माता पिता जिनकी केवल बेटियां हैं, वे अपनी जमीन पर किसी अन्य के कब्जा कर लेने की स्थिति में या लड़ाई झगड़ा होने की स्थिति में स्वयं को असहाय पाते है.

इसी प्रकार बेटा न होने के कारण उन्हें बिजली बिल जमा करने गैस सिलेंडर लेने या अन्य जरूरी कार्यों के लिए अपनी बेटी को भेजने में असहजता महसूस होती है. ऐसे माता पिता की इन्हीं दिक्कतों एवं परेशानियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने निर्णय लिया कि उन्हें 5 अक्टूबर 2011 को बेटी बचाओ अभियान के अवसर पर एक विशेष कार्ड प्रदाय किया जाये. इस कार्ड को सम्बल कार्ड का नाम दिया गया है.

केवल बेटियों वाले माता-पिता को सम्बल कार्ड देने के पीछे मुख्य मक़सद यह है कि वे बेटे की कमी महसूस न करें. जिला प्रशासन ऐसी व्यवस्था बनाने जा रहा है कि सम्बल कार्ड वाले दम्पत्ति को बैंक, बिजली बिल जमा करने गैस सिलेंडर लेने, टेलीफोन बिल जमा करने या अन्य सरकारी कार्यों में अन्य लोगों की तुलना में प्राथमिकता मिले ओर उन्हें विशेष दर्जा मिले.

जिला प्रशासन ने सम्बल कार्ड वाले दम्पत्तियों के लिए जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम भी प्रारंभ किया है. इस कंट्रोल रूम के दूरभाष नम्बर 07632-240035 पर सम्बल कार्ड वाले माता पिता प्रताडऩा या विवाद की स्थिति में मदद के लिए सूचना देकर मदद की गुहार लगा सकते है. कंट्रोल रूम को सूचना मिलने पर प्रशासन की जिम्मेदार अधिकारी स्थल पर जाकर जाँच करेंगा और आवश्यक होने पर पुलिस में प्रकरण दर्ज कराकर आगे की कार्यवाही की जायेगी.

बालाघाट जिले में केवल बेटियों वाले परिवारों की संख्या 40 हजार है. इनमें 4 हजार से अधिक परिवार ऐसे है, जिन्होंने एक या दो बेटी के बाद नसबन्दी आपरेशन करा लिया है. पाँच हजार से अधिक परिवार ऐसे है जिन्होंने तीन बेटियों के बाद नसबन्दी आपरेशन कराया है. जिला प्रशासन इन सभी 40 हजार परिवारों को सम्बल कार्ड प्रदान कर रहा है. इसके लिए आंगनवाड़ी केन्द्र में केवल बेटियों वाले माता-पिता का पंजीयन कराया गया है.

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