• एफडीआई पर हंगामा, संसद स्थगित
  • संसद गरमाई, सहयोगी भी विरोध में

नयी दिल्ली,25 नवंबर. मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में 51 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी देने के कैबिनेट के फैसले के विरोध में विभिन्न राजनीतिक दलों के हंगामे के कारण शुक्रवार को राज्यसभा और लोकसभा की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद सोमवार तक स्थगित कर दी गई.

उच्च सदन में लगातार तीसरे दिन भी प्रश्नकाल नहीं हो सका. सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने फैसला वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे बेरोजगारी बढ़ेगी. सपा सांसद मोहन सिंह ने कहा है कि जिस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी देश को लूटकर चली गई, वही हाल रिटेल में विदेशी निवेश से होगा. खुद तृणमूल कांग्रेस जैसे सरकार के सहयोगी दल इस फैसले में सरकार के साथ नहीं हैं.इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य रिटेल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दिए जाने को लेकर हंगामा करने लगे. विपक्ष के नेता अरुण जेटली हंगामे के चलते कुछ नहीं बोल पाए. अंसारी ने सदस्यों से शांत होने की अपील की, लेकिन सदस्यों पर इसका कोई असर नहीं हुआ. हंगामा थमते न देख उन्होंने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. इसके बाद राज्यसभा की कार्रवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.

मल्टी ब्रांड रिटेल सेक्टर में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एफडीआई की अनुमति देने के फैसले को वापस लेने और अलग तेलंगाना राज्य के गठन की मांग समेत विभिन्न मुद्दों पर लोकसभा में लगातार चौथे दिन जमकर हंगामा हुआ. इसके कारण प्रश्नकाल नहीं हो सका और कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. इस बीच लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कृषि मंत्री शरद पवार को युवक द्वारा थप्पड़  मारने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने ऐसे घटनाओं के लिए कठोर दंड देने के प्रावधान पर जोर दिया. इसके बाद मीरा कुमार ने जैसे ही कार्यवाही आगे चलाने का प्रयास किया भाजपा, वाममोर्चा, जदयू, शिवसेना, बीजद, अकाली दल, तृणमूल कांग्रेस और सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे सपा और बसपा सदस्य खड़े होकर मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दिए जाने के फैसले को वापस लेने की मांग करने लगे. हंगामे के बीच सदन को सोमवार तक स्थगित कर दिया गया.

व्यापारी आए गुस्से में

इंदौर/भोपाल. केंद्र सरकार के इस फैसले का चौतरफा विरोध हो रहा हैं. जहां खुदरा व्यापारी गुस्से में इसका विरोध कर रहे है, वहंी राजनैतिक स्तर पर भी नाराजगी जाहिर की जा रही.

अहिल्या चैबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि भारत में खुदरा व्यापार से करोड़ों लोग जुड़े हैं. बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से स्वरोजगार देने वाले क्षेत्र का विनाश होगा.इनका एकाधिकार होने के बाद वे यहां महंगे दामों पर सामान बेचेंगे. इससे बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार होने का भी अंदेशा हैं. सरकार को इस फैसले पर एक बार फिर विचार करना चाहिए. म.प्र. दाल मिल एसो. के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि इसका देशभर में कड़ा विरोध होना चाहिए. क्योंकि बाहर की कंपनियों आएगी तो अपनी मोनोपाली चलाएगी. इससे छोटे व्यापारी और निवेशक बाजार से ही बाहर जाएगें. उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा. राष्ट्रीय स्तर पर अगर कोई संगठन इसका विरोध या इस फैसले को वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बनाना हैं, तो क्षेत्रीय संगठनों को भी बैठके लेकर उनका साथ देने का फैसला लेना चाहिए.

अहिल्या चेंम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंड. के सचिव सुशील सुरेका ने कहा कि संसदीय स्थायी समिति की 13.5.2009 को सर्वसम्मत रिपोर्ट जो कि 8 जून 2009 को संसद में पेश की गई थी उसमें भी रिटेल में एफडीआई को मंजूरी नहीं देने की सिफारिश की गई थी. इस रिपोर्ट पर सदन में चर्चा किए बिना मंजूरी देना देश के आर्थिक गुलामी में पकड़ता हैं. इसका सीधा असर किसानों, उपभोक्ताओं, ट्रांसपोर्टर और कई छोटे मध्यमवर्गीय व्यवसाय पर पड़ेगा. इंदौर रेडिमेड गारमेंट एसो. के सचिव आशीष निगम ने कहा कि यह समझ में नहीं आ रहा हैं, कि सरकार हम लोगों (छोटे उद्यमियों) से क्या चाहती हैं. इस तरह की पालिसी लाकर विदेशियों को क्यों सुविधा दे रही हैं. यह घरेलू बाजार को खत्म करने की तैयारी जैसा फैसला हैं. इसे तुरंत वापस लेना चाहिए. हम एसो. की बैठक कर इस फैसले के खिलाफ रणनीति बनाएंगे. एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश के मानद सचिव विजय अग्रवाल का कहना हैं, संसद में पास हो चुका यह फैसला स्माल इंडस्ट्रीज के हित में नहीं हैं. उधर, राजधानी भोपाल में सरकार के इस फैसले के विरोध में व्यापारिक संगठनों ने धरना दिया. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (केट) के राधेश्याम माहेश्वरी, यदुनंदन जाजू, संतोष अग्रवाल, अरविंद बियाणी, कृष्णकुमार गट्टनी के साथ केट पदाधिकारियों ने भारी असंतोष जताया है.

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