सरकार का दावा खोखला

नई दिल्ली, 15 मई. अमेरिका के दबाव के आगे झुकते हुए भारत ने ईरान से 11 फीसदी तक कच्चे तेल के आयात में कमी लाने की घोषणा की है. ये कमी इस पूरे वित्त वित्त वर्ष के लिए है. ऐसे में सरकार का अमेरिकी दबाव को न मानने का बयान खोखला साबित हो रहा है.

दिलचस्प है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान के खिलाफ पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है. हाल ही में अमेरिका ने भी भारत पर ऐसा करने का दबाव बनाया था. जानकार भारत के इस फैसले को अमेरिकी दबाव से ही जोड़ कर देख रहे हैं. सरकार ने राज्यसभा में बताया कि चालू वित्त वर्ष में ईरान से कच्चे तेल का आयात करीब 11 प्रतिशत कम किया जायेगा. सरकार ने तर्क दिया है कि वह तेल आयात के स्रोतों का विस्तार कर रही है तथा किसी क्षेत्र विशेष पर अपनी निर्भरता कम कर रही है. पेट्रोलियम राज्यमंत्री आर पी एन सिंह ने बताया कि भारत ने ईरान से वर्ष 2010-11 में एक करोड़ 85 लाख टन और वर्ष 2011-12 में एक करोड़ 74 लाख टन कच्चे तेल का आयात किया. चालू वित्त वर्ष 2012-13 में आयात लक्ष्य एक करोड़ 55 लाख टन रखा गया है.

यूएस के पास 200 साल का संसाधन: ओबामा

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अगले 200 साल तक सफल बने रहने के लिये अमेरिका के पास तमाम तरह के संसाधन हैं. ओबामा ने उम्मीद जतायी कि अमेरिका को पटरी पर लाने के लिये उन्हें एक और मौका मिलेगा.

दोबारा राष्ट्रपति चुनाव जीतने की कोशिश में लगे ओबामा ने  कहा, ‘हमारे पास अभी भी दुनिया के अच्छे कर्मचारी हैं, दुनिया के उम्दा विश्वविद्यालय हैं, बेहतरीन वैज्ञानिक हैं, हमारे पास अच्छे उद्यमी हैं, बेहतर बाजार व्यवस्था है. अत: हमारे पास अगले 100 से 200 साल के लिये सफल होने को लेकर सारे संसाधन उपलब्ध हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि हमारी राजनीति ऐसी हो गयी है जहां हमारा जोर अगली पीढ़ी के लिये चीजें ठीक करने की बजाए चुनाव जीतने पर ज्यादा होता है और अगर हम इन चीजों को खत्म कर दें तो चीजें बेहतर होंगी. ओबामा ने कहा कि वह अगले पांच साल में देश में ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जहां अगर आप कठिन मेहनत करें तो आप अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं, भले ही आप कहीं से आते हों, आप जैसे भी दिखते हों.  कभी-कभी आप सुनते हैं कि अमेरिका का कद घट रहा है या कमजोर हो रहा है या चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है. मैं दुनिया भर की यात्रा करता हूं और जहां भी आप जाइये और लोगों से सवाल कीजिये कि आप कहां रहना चाहते हैं, किस देश की आप प्रशंसा करतें हैं. उनका जवाब वही होगा जो हमारे पास है.

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