वाशिंगटन, 14 जून. भारत ने अमेरिका के साथ विस्तारित होते रक्षा संबंधों में उसके साथ रक्षा प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण, सह विकास और सह उत्पादन पर जोर दिया है.

विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, हिलेरी और मैं रक्षा प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और सह -विकास तथा सह-उत्पादन के बढ़ रहे महत्व का समर्थन करते हैं. कृष्णा और हिलेरी ने तीसरी भारत अमेरिका सामरिक वार्ता के नतीजे की जानकारी दी. यह वार्ता विदेश मंत्रालय के फॉगी बॉटम मुख्यालय में हुई.

विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने कहा है कि भारत निवेशकों का भरोसा जीतने के साथ ही आर्थिक तरक्की की राह पर लौटेगा. इस वक्त भारत सुस्त अर्थव्यवस्था और अनिश्चित कारोबारी माहौल के चलते आलोचनाओं का सामना कर रहा है. यहां यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) की सालाना एकदिवसीय बैठक में कृष्णा ने कहा कि सुधारों को लेकर हमारी प्रतिबद्धताओं और आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं.अतुल्य भारत की कहानी विश्वसनीय रहेगी या नहीं इस पर आशंकाएं जाहिर की गई हैं. लेकिन मजबूत बुनियाद, ठोस नीतियों और समझदारी भरे आर्थिक प्रबंधन के चलते समय-समय पर हमारी अर्थव्यवस्था ने नए जोश के साथ वापसी की है.

यूएसआईबीसी की बैठक के दौरान अमेरिकी कॉर्पोरेट नेताओं और थिंकटैंकों ने भारत में मौजूदा कारोबारी माहौल को लेकर आशंकाएं जाहिर कीं और आर्थिक सुधार न होने की बात कही. अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मामलों के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्रोमैन ने कहा कि भारत में निवेश के लिहाज से माहौल में गिरावट आई है और इस बात को लेकर अमेरिका की चिंता बढ़ती जा रही है. फ्रोमैन ने कहा कि भारत की सियासी परिस्थितियां आर्थिक सुधारों की रफ्तार को धीमा कर रही हैं. ऐसे में दोनों के आर्थिक रिश्ते वो नहीं हासिल कर पा रहे जो उन्हें हासिल करना चाहिए. कारोबारी समुदाय की निराशा चिंताजनक है, क्योंकि वह भारत-अमेरिकी रिश्तों के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक है.

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