लखनऊ, 8 जनवरी. विपक्षी दलों की मांग के बीच चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के प्रमुख सचिव तथा पुलिस महानिदेशक को पद से हटा दिया गया. आधिकारिक सूत्रों ने यहां बताया कि गृह विभाग के प्रमुख सचिव कुंवर फतेह बहादुर और पुलिस महानिदेशक बृजलाल को पद से हटा दिया गया है.

 

गौरतलब है कि विभिन्न विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से इन अधिकारियों के सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के एजेंट की तरह काम करने का आरोप लगाया था. विपक्षी पार्टियों का कहना था कि राय के आगामी विधानसभा चुनाव को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए इन अफसरों को हटाना जरूरी है. इसके पूर्व, बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने भी देर शाम आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयोग द्वारा फतेह बहादुर और बृजलाल को हटाए जाने का दावा करते हुए इसे अनुचित बताया था. मिश्र ने चुनाव आचार संहिता के मद्देनजर राय में जगह-जगह लगी मुख्यमंत्री मायावती और बसपा के चुनाव निशान हाथी की मूर्तियों को ढकने के निर्वाचन आयोग के आदेश को एकतरफा करार देते हुए उस पर सवाल भी उठाए.

उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों की पुरजोर मांग के बीच निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत लागू चुनाव आचार संहिता के मद्देनजर राय में विभिन्न स्थानों पर सरकारी धन से लगाई गई बहुजन समाज पार्टी के चुनाव निशान हाथी तथा पार्टी प्रमुख मुख्यमंत्री मायावती की मूर्तियों को ढकने के आदेश दिए. मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमने फैसला किया है कि राय में जगह-जगह लगी हाथियों और मुख्यमंत्री मायावती की मूर्तियों को ढका जाएगा. उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला आचार संहिता से जुड़ा है लिहाजा इस फैसले पर जल्द से जल्द अमल किया जाएगा. कुरैशी ने कहा कि हमारा मकसद है कि चुनाव के दौरान किसी को भी सियासी लाभ न मिलने देना है. यहां तक कि कार्यालयों में लगी नेताओं की तस्वीरों को भी हटाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने दलित विरोधी मानसिकता वाली विपक्षी पार्टियों के कथनों को स्वीकार करके बसपा का पक्ष जाने बगैर मूर्तियां ढकने का एकतरफा आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि दलित विरोधी मानसिकता वाली पार्टियां के एकतरफा कथनों को स्वीकार करते हुए आयोग ने यह निर्देश दिए हैं. बसपा का पक्ष सुने बगैर दिए गए इस आदेश से संविधान कच् अनुछेद 14 का खुला उल्लंघन हुआ है.

मिश्र ने कहा कि बसपा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उनके साथियों से यह उम्मीद तो करती ही थी कि वे चुनाव प्रक्रिया पूर्णतया निष्पक्ष प्रक्रिया से कराएंगे लेकिन उनके आज के आदेश से बसपा को धक्का लगा है. साथ ही उसके फैसले से बहुत बड़ा प्रश्न भी खड़ा हो गया है. बसपा नेता ने आयोग के फैसले के औचित्य और व्यावहारिकता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि दिल्ली में राष्ट्रपति भवन, नार्थ ब्लाक, साउथ ब्लाक के सभी खम्भों तथा लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर हाथी बना हुआ है, ऐसे में क्या लोकसभा चुनाव में आयोग इन स्थानों को ढकवाएगा.

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