प्रदर्शनकारियों ने बात नहीं करेंगे गृहमंत्री

Sushil Kumar Shindeyनई दिल्ली, 24 दिसंबर. चलती बस में गैंग रेप को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के साथ खुद को जोड़ते हुए गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दो दिन पहले बयान दिया था कि वह तीन बेटियों के बाप हैं और लोगों के गुस्से को समझ सकते हैं। सोमवार को उनका अंदाज और बयान बदला-बदला नजर आया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मिलने की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि यह कहना बहुत आसान है कि गृह मंत्री को वहां जाना चाहिए, कल अगर माओवादी प्रदर्शन करने लगें तो क्या मैं वहां भी जाऊंगा।

शिंदे ने कहा, रविवार को इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कार्रवाई का मुझे दुख है, लेकिन यह अव्यावहारिक है कि सरकार या उसके नेता विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों से सीधी बात करें। उन्होंने आगे कहा, कल माओवादी प्रदर्शन सकते हैं, मैं उनसे तो नहीं मिल सकता ना। हर कोई हर सरकार से कहता रहेगा… हमें कहीं भी नहीं चले जाना चाहिए।

कल 100 आदिवासी छत्तीसगढ़ और गढ़चिरौली मारे जा सकते हैं, क्या सरकार वहां जा सकती है। चूंकि यह दिल्ली में हो रहा है इसलिए आप चाहते हैं कि हम उनसे मिलें। गृहमंत्री ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि उन लोगों को कानून में हाथ में नहीं लेना चाहिए। शिंदे ने पुलिस की बर्बरता के लिए माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा, मैं लोगों के गुस्से को समझ सकता हूं लेकिन कल आंदोलन का नेतृत्व राजनीतिक लोग करने लगे थे। आप क्या चाहते हैं, इसके बाद भी सरकार हाथ पर हाथ धरी रहती? यह संभव नहीं है।

शिंदे ने यह भी कहा कि रेप कानून पर संशोधन पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा सभी राज्यों के डीजीपी की बैठक बुलाई गई है। सरकार संवेदनशील और सभी कदम उठाए जाएंगे।

भाषण के बाद पीएम बोले ‘ठीक है’

ट्विटर पर उड़ी खिल्ली

दिल्ली में गैंगरेप मामले पर जारी प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री को आज एक हफ्ते बाद राष्ट्र के नाम संदेश देने की सुध आई। उसमें भी वह कुछ ऐसा कर बैठे कि ट्विटर पर उनकी जमकर खिल्ली उड़ रही है। भाषण देने के बाद पीएम ने पूछा ठीक है। गलती से पीएम का यह पूछना टीवी पर ब्रॉडकास्ट हो गया और लोगों ने इसे हाथोंहाथ ले लिया। इतना ही नहीं, पीएम राष्ट्र के नाम संदेश दे रहे थे और करीब उसी दौरान वहां 45 सेकंड तक बैकग्राउंड में किसी का मोबाइल बजता रहा। इतने गंभीर मुद्दे पर बोलने में पीएम द्वारा की गई लापरवाही ट्विटर पर मजाक का विषय बन गई।

मनमोहन सिंह ने  एक मिनट के राष्ट्र के नाम संबोधन में जनता से शांति बनाए रखने की अपील कर खानापूर्ति ही की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में एक लड़की के साथ हुई इस बर्बरता से दुखी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह इस संबंध में सभी जरूर और ठोस कार्रवाई करेंगे। अपने एक मिनट से कुछ ज्यादा देर के संबोधन में पीएम ने लोगों से सरकार पर विश्वास बनाए रखने की भी अपील की। पीएम ने कहा कि वह जनता के जज्बातों की कद्र करते हैं और उनका गुस्सा जायज है, लेकिन इस तरह से हिंसा करके कुछ हल भी नहीं निकलने वाला है।

अपने संबोधन में उन्होंने जनता से अपील की है कि वह देश में शांति बनाए रखें। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वह देश की राजधानी को महिलाओं के लिए भयमुक्त बनाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने महिलाओं को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का भी आश्वासन जनता को दिया है। पीएम ने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर हिंसा करने और गाडिय़ों में आग लगा देने से किसी तरह का कोई हल नहीं निकलने वाला है। मनमोहन सिंह ने कहा कि वह खुद तीन बेटियों के पिता हैं। इस अमानवीय कृत्य के लिए किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा और उनको कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन सोनिया गांधी द्वारा प्रदर्शनकारियों से हुई बातचीत का ही नतीजा है। दिल्ली में देश को शर्मसार करने वाली इस घटना के बाद केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी इस संबंध में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया था। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी प्रदर्शनकारियों को गैंगरेप पीडि़ता को इंसाफ दिलाए जाने की बात कही थी। गौरतलब है कि 16 दिसंबर की रात चलती बस में एक मेडिकल छात्रा के रेप और उसके साथ हुई बर्बरता के खिलाफ पूरे देश में प्रदर्शन हुए थे। देश की राजधानी में स्कूल और कालेज के छात्र-छात्राओं ने राजपथ पर प्रदर्शन किया और आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग की। पिछले तीन दिनों से राजपथ पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच रस्साकशी भी जारी है।

पीडि़त की फिर हुई सर्जरी, अभी वेंटीलेटर पर

सामूहिक बलात्कार का शिकार बनी 23 वर्षीय पीडि़ता की हालत आज एक ‘छोटे’ ऑपरेशन के बाद गंभीर हो गई पर अभी स्थिर बनी हुयी है। चिकित्सक फिलहाल उसके स्वास्थ्य पर नजऱ रखे हुए हैं। सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकों ने बताया कि पीडि़ता की हालत स्थिर लेकिन चिंताजनक है। वह वेंटिलेटर पर बनी हुई है। रविवार को उसका परीक्षण हुआ जिसमें सामने आया कि उसके शरीर में तरल पदार्थ जमा हा रहा हैं इसके बाद उसका एक छोटा सा ऑपरेशन किया गया। पीडि़ता के रक्त में प्लेटलेट की संख्या शनिवार से घट-बढ़ रही है। आखिरी परीक्षण तक संख्या 19 हजार तक थी। स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में यह एक लाख 50 हजार से साढ़े चार लाख तक होती है। चिकित्सकों ने बताया कि युवती की हालत चिंताजनक है हालांकि वह होश में है और लोगों से बात कर रही है।

चिकित्सकों ने कहा कि सेप्सिस जैसे रक्त संक्रमण के कारण अंग काम करना बंद कर सकते है जोकि चिंता का विषय है। चिकित्सकों ने यह जानकारी भी दी कि पीडि़ता के शरीर में ‘बिलीरुबिनÓ तत्व की मात्रा 6.3 तक पहुंच गई है। उसे चर बोतल प्लेटलेट युक्त प्लाज्मा भी चढ़ाया गया था। चिकित्सकों ने बताया कि पीडि़ता को तेज़ बुखार भी है। युवती के रक्त में प्लेटलेट की संख्या रविवार शाम को 41000 से घटकर 19000 हो गई। यह रक्त में संक्रमण के संकेत हैं। एक चिकित्सक ने कहा कि युवती के प्लेटलेट फिर घटकर 41000 से शाम को 19000 पर आ गए हैं। यह रक्त में संक्रमण के संकेत हैं। वह तनाव में है इसलिए उसे वापस वेंटीलेटर पर वापस लाया गया है। युवती में सांस लेने में बेचैनी के संकेत मिले थे जिसके बाद उसका अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन किया गया। इसमें पीडि़ता के पेट में द्रव के जमा होने के संकेत मिले हैं। एक अन्य चिकित्सक ने कहा कि वह पूरी तरह होश में है और बातचीत कर रही है।

गैंगरेप के दो आरोपियों ने मांगी फांसी की सजा

हम शिनाख्त परेड नहीं करना चाहते, क्योंकि हमने गंदा काम किया है। लिहाजा हमें फांसी पर लटका दो। यह कहते हुए दिल्ली गैंगरेप मामले के दो आरोपियों पवन कुमार गुप्ता व विनय ने फिर साकेत कोर्ट में जुर्म कबूल किया और खुद के लिए फांसी की सजा देने की मांग की। छह आरोपियों में से बस चालक राम सिंह सहित तीन आरोपियों ने शिनाख्त परेड कराने से इंकार कर दिया। इस पर महानगर दंडाधिकारी ने तीनों को शिनाख्त परेड न कराने का बयान दर्ज करने के लिए चैंबर में बुलाया।

तीनों को 14 दिन के लिए न्यायायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है, जबकि बिहार से गिरफ्तार आरोपी अक्षय ठाकुर शिनाख्त परेड के लिए तैयार हो गया। 23 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट से गैंगरेप की घटना के खिलाफ साकेत कोर्ट के वकीलों ने भी एक प्रस्ताव पास किया है। इसमें कहा गया है कि कोई भी वकील आरोपियों के केस की पैरवी न करे, क्योंकि गैंगरेप की घटना अमानवीय व बर्बर है। करीब 300 प्रदर्शनकारी साकेत कोर्ट पहुंच गए, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें कोर्ट में प्रवेश नहीं करने दिया। पुलिस ने मामले के तीन आरोपियों पवन गुप्ता, विनय व राम सिंह को कोर्ट में पेश कर कहा कि इनको पुलिस रिमांड पर लेने की जरूरत नहीं है। इसलिए कोर्ट ने इन तीनों को छह जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

समिति देगी कानून संशोधन के सुझाव

राष्ट्रीय राजधानी में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद इस तरह के मामलों में दोषियों की सजा कड़ी किए जाने और त्वरित सुनवाई के लिए कानून में संशोधन पर सुझावों के लिए सरकार ने सोमवार को प्रख्यात न्यायाधीशों की एक समिति गठित करने की घोषणा की। सरकार से दोषियों को सख्त सजा दिए जाने की मांग की जा रही थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय से जारी एक वक्तव्य के मुताबिक देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जे.एस. वर्मा समिति की अध्यक्षता करेंगे। इसमें कहा गया है कि हाल की घटना के मद्देनजर सरकार ने इस बात को गम्भीरता से लिया है कि यौन उत्पीडऩ के बढ़ते मामलों में त्वरित न्याय दिलाने व इस तरह के अपराधों में दंड बढ़ाने के लिए वर्तमान कानूनों की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की है। समिति के अन्य सदस्यों में हिमाचल प्रदेश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) लीला सेठ और भारत के पूर्व महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम शामिल होंगे। समिति 30 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। दिल्ली में 16 दिसम्बर को चलती बस में एक 23 वर्षीया युवती के साथ छह पुरुषों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म की घटना के विरोध में देशभर में हो रहे प्रदर्शनों के बाद समिति गठित करने का फैसला लिया गया। पीडि़ता महिला यहां एक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है।

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