आसाराम बापू के बोल पर मचा हंगामा

Asharam Bapuनई दिल्ली, 7 जनवरी. दिल्ली गैंग रेप की घटना पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने वालों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। अब जाने-माने संत आसाराम बापू ने विवादित बयान दे दिया है। आसाराम ने दिल्ली गैंग रेप के लिए रेपिस्टों के साथ-साथ रेप विक्टिम को भी बराबर का जिम्मेदार ठहराया है।

उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती, दोनों हाथों से बजती है। उन्होंने कहा कि रेप के लिए लड़की का भी दोषी है। वह चाहती तो आरोपियों को भाई कहकर, उनके हाथ-पैर जोड़ सकती थी, जिससे वह बच जाती। लेकिन, उसने ऐसा नहीं किया।

हालांकि, उन्होंने घटना की निंदा भी की है। उन्होंने रेप विक्टिम के परिवार को अपना संदेश भी भेजा है कि दुख के इस घड़ी में वह उनके साथ हैं। साथ ही आसाराम ने रेपिस्टों के लिए तैयार किए जाने वाले कड़े कानून का भी कड़ा विरोध किया है। उनके मुताबिक, कानूनों का सिर्फ दुरुपयोग होगा, असली दोषी बच जाएंगे। अगर ऐसा (कड़ा कानून बन जाता है) होता है तो यह पुरुषों के साथ पूरे समाज के लिए गलत होगा, क्योंकि रोएगी तो कोई मां-बहन ही।

बंद कमरे में होगी केस की सुनवाई

Delhi rap CAseराजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर की रात चलती बस में पैरा मेडिकल की एक छात्रा के साथ गैंगरेप एवं हत्या मामले में अदालत ने सोमवार को बंद कमरे के भीतर कार्यवाही का आदेश दिया। वहीं, अदालत ने मीडिया को इस मामले की रिपोर्टिंग से भी रोका। गौर हो कि दिल्ली पुलिस ने बंद कमरे में इस केस की सुनवाई का अदालत से आग्रह किया था।
सामूहिक बलात्कार और हत्या के इस मामले में आज आरोपियों की पैरवी के लिए आए वकील और अन्य वकीलों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। उधर, खचाखच भरे अदालत कक्ष में इस केस के पांच आरोपियों को पेश नहीं किया जा सका।

बलात्कार की सजा 30 साल कैद हो : पिता

बलिया. दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड की शिकार हुई लड़की के पिता ने किसी भी अभियुक्त को सरकारी गवाह बनाये जाने का विरोध करते हुए कहा है कि बलात्कार के आरोप में पकडे जाने वाले 14 साल के लडकों को भी वयस्क माना जाना चाहिये और बलात्कार की सजा को सात साल की कैद से बढाकर 30 साल कर दिया जाना चाहिये।

लडकी के पिता ने कहा कि बलात्कार के मामलों में 14 साल के आरोपी को भी वयस्क माना जाना चाहिये, क्योंकि दुराचार के ज्यादातर मामलों में 14 वर्ष के लड़के भी शामिल पाये जा रहे हैं। बलात्कार किसी लड़की की नैतिक रूप से हत्या करने जैसा अपराध है लिहाजा इसकी सजा को सात साल से बढ़ाकर 30 वर्ष किया जाना चाहिये। उन्होंने अपनी बेटी के साथ हुई दरिंदगी के दो आरोपियों को सरकारी गवाह बनाने की बात पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अभियुक्त फांसी की सजा से बचने के लिये यह हथकंडा अपना रहे हैं। उनकी बेटी के गुनहगार खुद को मौत की सजा से बचाने के लिये सरकारी गवाह बनने की पेशकश कर रहे हैं। साथ ही वे जनता की सहानुभूति हासिल करने के वास्ते कह रहे हैं कि वे आत्महत्या कर लेंगे। लड़की के दादा और चाचा का कहना है कि मामले के अभियुक्तों को किसी भी हालत में सरकारी गवाह नहीं बनाया जाना चाहिये, क्योंकि उन्होंने इतना बर्बर कांड अंजाम दिया है कि उन्हें किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती। इस मामले में इतने गवाह हैं कि किसी अभियुक्त को साक्षी बनाने की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि दिल्ली बलात्कार कांड के दो अभियुक्तों ने सरकारी गवाह बनने की पेशकश की है।

साकेत कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अदालत की अनुमति के बिना कार्यवाही व सुनवाई से संबंधित कोई भी सामग्री प्रकाशित नहीं की जा सकती है। कोर्ट का यह आदेश कथित तौर पर उस परिप्रेक्ष्य में है कि दिल्ली पुलिस ने अपनी अर्जी में कोर्ट में पेशी के दौरान पांच आरोपियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का हवाला दिया था। गैंगरेप के 6 आरोपियों में से पांच आरोपियों को आज पेशी के लिए सुबह में कोर्ट में लाया गया लेकिन अदालत कक्ष में भारी भीड़ के चलते आरोपियों को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया जा सका। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक भीड़ नहीं हटेगी, तब तक केस की सुनवाई नहीं की जाएगी। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नमरिता अग्रवाल ने कहा कि अदालत कक्ष में आरोपियों की पेशी के लिए कोई खाली जगह नहीं है और इसके बाद वह अपने चैंबर के लिए निकल गईं। इस दौरान अदालत कक्ष में 40 सुरक्षा बलों को भी तैनात किया गया था। आज दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड की सुनवाई के दौरान अदालत में नाटक भी देखने को मिला।

आरोपियों का बचाव नहीं करने के वकीलों के विभिन्न संगठनों के संकल्प के बीच यह पहली बार है जब कोई वकील पांच आरोपियों की पैरवी के लिए आया। अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा ने अदालत में पेश होकर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल से कहा कि उन्हें कुछ आरोपियों के रिश्तेदारों की ओर से उनकी पैरवी के लिए फोन आया था। उन्होंने कहा कि वह तिहाड़ जेल नहीं जा पाने के कारण वकालतनामे पर आरोपियों के हस्ताक्षर नहीं ले पाए। शर्मा ने मजिस्ट्रेट से अदालत में आरोपियों के हस्ताक्षर लेने की अनुमति देने का आग्रह किया। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने हालांकि, उन्हें इस बात की अनुमति नहीं दी और कहा कि वह इस काम के लिए तिहाड़ जेल जाएं। अदालत द्वारा शर्मा का आग्रह खारिज किए जाने के साथ ही दो अन्य वकीलों ने मुकदमे में मदद के लिए अदालत मित्र के रूप में अपनी सेवाएं देने का आग्रह किया। इस दौरान मीडिया कर्मियों, वकीलों और पुलिसकर्मियों से खचाखच भरे अदालत कक्ष में जगह की कमी की वजह से पांच आरोपियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को पेश नहीं किया जा सका। दुष्कर्म के छह आरोपियों में से पांच को सोमवार को साकेत जिला अदालत में पेशी के लिए लाया गया। छठा आरोपी स्वयं को नाबालिग बता रहा है। उसने अपनी उम्र 17 साल छह माह बताई है, जैसा कि उसके स्कूल प्रमाण-पत्र में दर्ज है। उसे किशोर न्यायालय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। छह में से दो आरोपियों- विनय शर्मा और पवन गुप्ता ने रविवार को सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। जिम प्रशिक्षक विनय और फल विक्रेता पवन ने 19 दिसम्बर को अदालत में पेशी के दौरान अपना अपराध कबूल किया था। विनय और पवन ने कहा कि वे इस मामले में सरकारी गवाह बनना चाहते हैं। उन्होंने कानूनी सहायता लेने से इनकार कर दिया।

जल्द से जल्द बनाएं फास्ट ट्रैक कोर्ट
भारत के मुख्य न्यायाधीश अल्तमश कबीर ने कहा है कि अब समय आ गया है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए। न्याय में देरी की वजह से अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं जिसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का जल्द से जल्द गठन होना जरूरी है। प्रधान न्यायाधीश ने महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की सुनवाई के लिये सभी उच्च न्यायालयों से तुरंत त्वरित अदालतें गठित करने का निर्देश दिया।

अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ी
हाड़ कंपाने वाली सर्दी में जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे राजेश गंगवार की तबीयत रविवार को बिगड़ गई। उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत स्थिर बनी हुई है। वहीं एक अन्य अनशनकारी बाबू सिंह की हालत भी ठीक नहीं है, इसके बावजूद वह अनशन छोडऩे को तैयार नहीं हैं। वसंत विहार गैंगरेप मामले के बाद दुष्कर्मियों के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाने की मांग को लेकर दोनों अनशन पर बैठे थे। पिछले 14 दिनों से कुछ भी न खाने की वजह से राजेश की तबीयत खराब  हो गई।

अनशनकारियों की देखरेख कर रहे डॉक्टर प्रशांत ने बताया कि रविवार को 3.30 बजे उनकी हालत काफी बिगड़ गई। स्वास्थ्य जांच में पाया गया कि उनमें खून की लेयर कम हो गई है। ब्रेन डैमेज होने का भी खतरा बढ़ गया था। जांच में यूरिक एसिड का भी प्रतिशत बढ़ा हुआ था और डिहाइड्रेशन का खतरा था। लिहाजा उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। ग्लूकोज की डोज देने के बाद उनकी हालत स्थिर है। बाबू सिंह भी काफी कमजोर हो गए हैं। उन्हें बैठने में भी परेशानी हो रही है। डाक्टर प्रशांत ने बताया कि जंतर-मंतर पर सरकार की ओर से कोई डॉक्टर मौजूद नहीं है और न ही कोई एंबुलेंस है। एक डॉक्टर होने के नाते वह उनका जांच कर रहे हैं। अगर अनशनकारी  भूख हड़ताल जारी रखेंगे तो उनकी जिंदगी को खतरा है। अनशनकारियों के शरीर में ऊर्जा नहीं बची है। मालूम हो कि दुष्कर्मियों के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाने की मांग को लेकर गंगवार भूख हड़ताल पर थे। वे उत्तर प्रदेश राज्य स्थित बरेली के निवासी है और बाबू सिंह फर्रूखाबाद के। वह पिछले 9 दिनों से अनशन पर हैं। पिछले दिनों बातचीत में पेशे से किसान राजेश गंगवार ने बताया था कि वे अपनी पत्नी और बच्चों से बहाना बनाकर दिल्ली पहुंचे हैं। वहीं बाबू सिंह का कहना है कि वे पत्नी और बेटे के साथ आंदोलन देखने फर्रूखाबाद से दिल्ली पहुंचे। देश की बेटियों को न्याय दिलाने की मांग के लिए पत्नी और बेटे को रिश्तेदार के यहां छोड़कर जंतर-मंतर पर डेरा जमा दिया है।

कांकेर मामले में यौन शोषण की पुष्टि
रायपुर. छत्तीसगढ़ के कांकेर के हॉस्टल में नाबालिग बच्चियों के  यौन शोषण मामले में मेडिकल रिपोर्ट में 11 लड़कियों के साथ यौन शोषण की पुष्टि हो चुकी है.  मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि गल्र्स हॉस्टल में महिलाएं ही वार्डन होंगी. इस आरोप में एक चौकीदार को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, अब शिक्षाकर्मी भी गिरफ्तार किया गया है. कांकेड़ के झलियामारी में एक आदिवासी गल्र्स हॉस्टल में पिछले दो साल से यहां का चौकीदार और एक कर्मचारी 11 लड़कियों के साथ कुकर्म करता रहा और बच्चियां सबकुछ भुगतने को मजबूर रहीं.

पिछले हफ्ते इस करतूत की जानकारी जब कांकेड़ के जिला कलेक्टर को हुई तो फौरन कार्रवाई शुरू हुई. महिला अफसरों की निगरानी में जांच हुई. जांच में रेप की पुष्टि हुई, तब जाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. दोनों आरोपियों पर आईपीसी की धारा 376 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है. हॉस्टल के अधीक्षक को भी सस्पेंड कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच एक आईपीएस अफसर को सौंप दी गई है.

बचाव में आए वकीलों का विरोध

सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में आज आरोपियों की पैरवी के लिए आए वकील और अन्य वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।  आरोपियों का बचाव नहीं करने के वकीलों के विभिन्न संगठनों के संकल्प के बीच यह पहली बार है जब कोई वकील पांच आरोपियों की पैरवी के लिए आया। अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा ने अदालत में पेश होकर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल से कहा कि उन्हें कुछ आरोपियों के रिश्तेदारों की ओर से उनकी पैरवी के लिए फोन आया था।  शर्मा ने मजिस्ट्रेट से अदालत में आरोपियों के हस्ताक्षर लेने की अनुमति देने का आग्रह किया । मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने हालांकि, उन्हें इस बात की अनुमति नहीं दी और कहा कि वह इस काम के लिए तिहाड़ जेल जाएं । अदालत द्वारा शर्मा का आग्रह खारिज किए जाने के साथ ही दो अन्य वकीलों ने मुकदमे में मदद के लिए अदालत मित्र के रूप में अपनी सेवाएं देने का आग्रह किया । इस दौरान मीडिया कर्मियों, वकीलों और पुलिसकर्मियों से खचाखच भरे अदालत कक्ष में जगह की कमी की वजह से पांच आरोपियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को पेश नहीं किया जा सका।

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