म.प्र. के विभिन्न क्षेत्रों से, 15 नवंबर. प्रदेश में एस्मा लगाए जाने के बावजूद करीब 1,100 जूनियर डॉक्टर टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। वे अपना मानदेय बढ़ाने समेत अलग-अलग मागों के साथ मंगलवार को लगातार दूसरे दिन बेमियादी हड़ताल पर कायम हैं। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।

जूनियर डॉक्टरों ने प्रदेश सरकार के उस कदम को अवैधानिक बताया है, जिसके तहत हड़तालियों के खिलाफ एस्मा का इस्तेमाल किया गया है। सेंट्रल जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन [सीजेडीए] के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रदेश के इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के सरकारी मेडिकल महाविद्यालयों से संबद्ध अस्पतालों के जूनियर डाक्टरों ने कल से बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी थी। आज से इस हड़ताल में भोपाल और रीवा के सरकारी अस्पतालों के जूनियर डॉक्टर भी शामिल हो गए हैं।

मरीज हो रहे परेशान
ग्वालियर.गजराराजा मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रों ने मंगलवार को डीन को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। कई लोग अपने मरीजों को जेएएच से लेकर प्राईवेट अस्पतालों की शरण में चले गए।

218 इस्तीफे
जबलपुर. क्षुब्ध 218 जूनियर डॉक्टरों ने सरकार की वादा खिलाफी को लेकर  एस्मा की भी परवाह किए बिना अपना इस्तीफा मेडीकल कॉलेज की डीन को सौंप दिया हैं. इस्तीफे सौंपे जाने से मेडीकल चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाऐ चरमरा गई है. वहीं वैकल्पिक व्यवस्था कोई भी मेडीकल चिकित्सा प्रशासन के पास उपलब्ध हैं ही नहीं.

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