विधानसभा सत्र प्रारंभ होने से पूर्व ही राज्य के वित्तमंत्री श्री राघवजी ने प्रगति विवरण के रूप में बताया कि राज्य का बजट अब बढ़कर 97 हजार करोड़ रुपये हो गया है. उन्होंने यह दावा तो किया कि राज्य के पाला पीडि़तों को राज्य शासन ने मुआवजे के रूप में 1400 करोड़ रुपये वितरित किये हैं. लेकिन यह भी जाहिर है कि अभी भी कई किसान पाला मुआवजा की प्रतीक्षा में हैं. यह भी एक परेशानी है कि राज्य शासन को इस मद में केन्द्र से जो प्राप्त होना है वह भी अभी तक मिला नहीं है. गत वर्ष राज्य में बहुत ही तेज और व्यापक पाला पड़ा था उस नुकसान के अनुपात में मुआवजा नहीं मिला है. केन्द्र सरकार को भी इस मद का रुपया राज्य सरकार को दे देना चाहिए.

राज्य के किसानों को समर्थन मूल्य की खरीदी पर बोनस के रुप में 500 करोड़ रुपये बांटे गये. मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जो किसानों को गेहूं, धान व अन्य फसलों की खरीद पर बोनस देता है. इससे यह अनुचित कार्यवाही भी हो जाती है कि पड़ोसी राज्य के किसान बोनस के लालच में राज्य में आकर अपनी उपज बेच जाते हैं. इस समय राज्य में 1000 मेगावाट बिजली की कमी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. राज्य में 4000 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है जबकि जरूरत 5000 मेगावाट है. शासन ने विद्युत के घरेलू व कृषि उपयोग के लिए अलग फीडरों की व्यवस्था की है. एक फीडर घरेलू उपयोग का होगा वहीं दूसरा फीडर खेतों की सिंचाई के लिए 10 घंटे तक विद्युत प्रदान करेगा. राज्य ने 7.6 के विकासदर लक्ष्य से कहीं ज्यादा 10.6 प्रतिशत हो गई है. मध्यप्रदेश में कृषि की विकास दर देश में 9 प्रतिशत बढ़ी है, वहीं पर राष्ट्र का औसत 3 प्रतिशत के आसपास है. राज्य सभी फसलों में बम्पर होता जा रहा है. राज्य को कृषि विकास पर गर्व होना स्वाभाविक है. वहीं राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बहुत ही निम्र स्तर की हो गई हैं. वहीं सर्व शिक्षा अभियान में यह खामी बनी हुई है कि कई प्राथमिक व मिडिल शालाओं के भवन नहीं हैं.

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