भोपाल, 4 नवंबर. छोटी दीपावली अर्थात्ï देवउठनी एकादशी को इस बार देवों के उठने के साथ ही शादियां भी होंगी. हालांकि एकादशी को सूर्य तुला राशि में होने के कारण विवाह मुहूर्त नहीं है. चूंकि इस दिन भगवान सालिगराम व तुलसी का विवाह हुआ था इसलिये पंडितों का मानना है कि इस अबूझ मुहूर्त में शादियां होंगी. हालांकि अब भी इसको लेकर पंडितों में कई मत हैं.

पंचांग के मुताबिक एकादशी ही नहीं अपितु एकादशी के 12 दिन बाद तक कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है. देवउठनी एकादशी को स्वयं सिद्घ मुहूर्त माना जाता है. इसका आशय यह है कि शादी व अन्य शुभ कार्यों के लिये इस दिन किसी प्रकार का मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है पं. विष्णु राजौरिया का कहना है कि देवउठनी एकादशी के दिन जब भगवान का विवाह हो सकता है तो हम फिर भी इंसान हैं. इस दिन देव मुहूर्त और अबूझ मुहूर्त होने के कारण विवाह करने में कोई हर्ज नहीं है. इसी के चलते अनेक शादी समारोह आयोजित किये जायेंगे. उन्होंने बताया कि यह बात सच है कि पंचांग के अनुसार विवाह मुहूर्त सूर्य के वृश्चिक राशि में जाने के बाद शुरू होंगे.

नारायण से पहले जागती हैं महालक्ष्मी: पं. शर्मा ने बताया कि देवउठनी ग्यारस को भगवान चार माह की निद्रा से उठते हैं. ऐसा माना जाता है कि आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान नारायण शयन करते हैं और कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं. यह भी मान्यता है कि पति से पूर्व पत्नी जागती है और घर की सफाई सहित अन्य कार्य पूर्ण कर पति के जगने की प्रतीक्षा करती हैं. ठीक उसी प्रकार माता महालक्ष्मी दीपावली के दिन जागती हैं, इसी कारण सभी घरों में साफ-सफाई की जाकर घरों की साज-सज्जा की जाती है.

होगा तुलसी-सालिगराम विवाह
देवउठनी ग्यारस को गन्ने के मंडप के नीचे सालिगराम-तुलसी विवाह किया जायेगा. इसे लोग छोटी दीवाली के नाम से जानते हैं. अत: इस दिन भी  दीपदान व आतिशबाजी की जाती है. स दिन लोग तांत्रिक क्रियाएं भी सम्पन्न करते हैं.

Related Posts: