• आमजन पर फिर पड़ेगी महंगाई की मार

नई दिल्ली, 2 नवंबर. देश के लोगों को एक बार फिर महंगाई की मार पडऩे वाली है। पेट्रोल की कीमत में इजाफे की खबर के बीच अब बारी डीजल और एलपीजी की है।

पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने इस बात के साफ संकेत दिए हैं कि डीजल और एलपीजी प्राइज की समीक्षा की जा सकती है। उन्होंने इस मसले पर मंत्रियों के विशेषाधिकार प्राप्त समूह की बैठक बुलाने की मांग की है। इस बैठक में डीजल और एलपीजी की कीमत की समीक्षा की जा सके। तेल कंपनियों का कहना है कि उनकी कंपनी घाटे में चल रही है और उनका दबाव सरकार पर बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि पेट्रोलियम मंत्री जयपापल रेड्डी ने पेट्रोल और डीजल के दाम भी और बढऩे का इशारा किया था। जयपाल रेड्डी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी की वजह से सरकारी तेल कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं बढ़ते घाटे पर लगाम लगाने के लिए जल्द की उचित कदम उठाए जाने की जरूरत है। पेट्रोल के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों तेल कंपनियों को डीजल, रसोई गैस और मिटटी तेल की बिक्री पर दैनिक 333 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

डीजल के मौजूदा बिक्री मूल्य पर कंपनियों को 9.27 रुपये लीटर, मिटटी तेल पर 26.94 रुपये लीटर और घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर 260.50 रुपये प्रति सिलेंडर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। स लिहाज से पेट्रोलियम कंपनियों को पूरे साल में 1,21,459 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इस घाटे की भरपाई के लिये सरकार की तरफ से नकद सब्सिडी, तेल एवं गैस का उत्पादन करने वाली कंपनियों का एक तिहाई योगदान तथा कुछ बोक्ष जनता पर डाला जाता है, पेट्रोलियम के नुकसान की भरपाई के लिये कोई प्रणाली नहीं है।

दाम बढ़ाना-घटाना तेल कंपनियों के हाथ में
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे दाम के बोझ तले दबी पेट्रोलियम कंपनियों के पेट्रोल के दाम बढ़ाने का दबाव बनाने के अगले ही दिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में कोई भी निर्णय लेना तेल कंपनियों के हाथ में है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव जी.सी. चतुर्वेदी ने कहा कि इस बारे में फैसला करना तेल कंपनियों का काम है। वह सही समय पर निर्णय लेंगी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड [एचपीसीएल] के निदेशक [वित्त] ने कहा था कि तेल कंपनियों को पेट्रोल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। कंपनियों को पेट्रोल की मौजूदा कीमत पर 1.50 रुपये लीटर का नुकसान हो रहा है।

चतुर्वेदी ने कहा पेट्रोल अब नियंत्रणमुक्त पेट्रोलियम उत्पाद है, सरकार इसका दाम तय नहीं करती है। तेल कंपनियां इसका मूल्य तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। तेल कंपनियों ने इससे पहले 16 सितंबर को पेट्रोल के दाम में 3.14 रुपये लीटर की वृद्धि की थी। तब डालर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर 48 रुपये पर थी। अब विनिमय दर 49 रुपये प्रति डालर से ऊपर चल रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 108 डालर प्रति बैरल के आसपास चल रहे हैं।

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