यह मानना ही बड़ा भ्रामक है कि केंद्र सरकार ने डीजल पर 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि और रसोई गैस पर साल में 6 सिलेंडर की सीलिंग लगाई है. वास्तविकता यह है कि सिर्फ डीजल भाव वृद्धि से सरकार ने हर बिकने वाली वस्तु के भाव बढ़ा दिये हैं. यह डीजल की फुटकर मूल्य वृद्धि नहीं बल्कि सभी वस्तुओं की रिटेल बाजार में थोक मूल्य वृद्धि कर दी.

हर 4-5 के औसत परिवार में हर महीने रसोई गैस का एक सिलेंडर लगता ही है. हर साल 6 सिलेंडर की जो सीलिंग की है वह सीलिंग है ही नहीं बल्कि सिलेंडरों की कीमत में 300 रुपये प्रति सिलेंडर वृद्धि कर दी गई है. मूल्य वृद्धि को सीलिंग के नाम से छलावे के रूप में पेश किया है.  दलील वही घिसी-पिटी दी गई है कि अंतरराष्टï्रीय बाजार में पेट्रो क्रूड के भाव बढ़ गए हैं. लेकिन भाव इसलिए भी बढ़ते हैं कि उन पर केंद्र व राज्य सरकारों के भारी भरकम टैक्स लगे हुए हैं. भाव बढ़ाने से सरकार के टैक्स में भी इजाफा हो गया है.

भारत में नमक पर कोई टैक्स नहीं है. इसका भावनात्मक पहलू है. गांधी जी ने डांडी मार्च करके नमक सत्याग्रह किया था. जो आजादी के संघर्ष का बहुत बड़ा अध्याय है इसलिए उसे डांडी भावना के कारण टैक्स से मुक्त रखा गया है. समुद्र के पानी से बना सीधा नमक जिसे खड़ा नमक कहा जाता है, उसे ‘आयोडीनÓ की आड़ में महंगा किया है. यह भी सच है कि रिफाइंड नमक समुद्री पानी में आ जाने वाली सभी अशुद्धियों को दूर कर देता है. लेकिन उसके भाव जो लगभग 16 से 20 रुपये किलो तक रहते हैं वह वास्तव में छलावे का टैक्स है जो डांडी भावना को आहत करता है.

रसोई गैस हर घर की रसोई है- इसे भी डांडी की तरह रसोई की भावना से देखना चाहिए. इसमें लाग-लपेट कर भाव बढ़ाना छपकपट से हर परिवार पर कुठाराघात किया गया है. रसोई गैस भी नमक की तरह जरूरी है. यूपीए में शामिल सहयोगी पार्टियों ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, कृषि मंत्री श्री शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और करुणानिधि की द्रमुक तथा समर्थन दे रही मुलायम सिंह का समाजवादी पार्टी व लालू यादव की राष्टï्रीय जनता दल ने इस मूल्य वृद्धि का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है. विपक्ष की भारतीय जनता पार्टी व वामपंथी दलों ने भी इसे वापस लेने की मांग की है.

लेकिन वास्तविक मांग और राहत यह होनी चाहिए कि डीजल, रसोई गैस, पेट्रोल, केरोसीन को ‘नमकÓ की तरह सभी टैक्सों से मुक्त रखा जाए. जो वस्तु पूरी अर्थ-व्यवस्था और हर वस्तु को भारी मूल्य वृद्धि से प्रभावित करती है उस पर मूल्य वृद्धि कौन सी राहत पहुंचा सकती है. बात हर रोज हर समय मूल्यों पर नियंत्रण करने की की जाती है और डीजल व रसोई गैस तक के भाव बढ़ाकर हर वस्तु के भाव बढ़ाये जा रहे हैं. मूल्य नियंत्रण का सबसे कारगर कदम यही होगा कि इन वस्तुओं पर सभी टैक्स फौरन खत्म कर दिये जाएं. जो पार्टियां इस मूल्य वृद्धि का विरोध कर रही हैं यदि वह मात्र खानापूरी नहीं है तो उन्हें इस बात पर अड़ जाना चाहिए कि पेट्रो पदार्थों को पूरी तरह टैक्स फ्री रखा जाए. सीलिंग की चालबाजी से रसोई गैस के हर सिलेन्डर पर अपने आप में 300 रुपये की मूल्यवृद्धि हो गई- जो अब तक की सबसे ज्यादा है. डीजल व रसोई गैस सिलेन्डरों पर की गई भाववृद्धि फौरन वापस ली जानी चाहिए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: