नई दिल्ली, 2 जनवरी. नए साल की शुरूआत करते हुए सरकार ने पात्र विदेशी निवेशकों (क्यूएफआई) को भारतीय शेयर बाजार में सीधे निवेश करने की मंजूरी दे दी. यह पहल उस वक्त हुई है जबकि घरेलू शेयर बाजार से विदेशी पूंजी निकाली जा रही है.

इसका असर शेयर बाजारों में गिरावट के साथ साथ रुपए की विनिमय दर में भारी उतार-चढ़ाव के रूप में भी दिख रहा है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ”केंद्र सरकार ने क्यूएफआई को भारतीय इक्विटी बाजार में सीधे निवेश करने की मंजूर करने का फैसला किया है ताकि निवेशक वर्ग का विस्तार किया जा सके, बाजार का उतार-चढ़ाव कम किया जा सके और भारतीय पूंजी बाजार को और व्यापक बनाया जा सके. “क्यूएफआई विदेश में रह रहा ऐसा  कोई भी व्यक्ति, समूह या संघ हो सकता है जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गठित वित्तीय कार्रवाई बल :एफएटीएफ: के मानकों का अनुरूप काम करता हैं. इस कार्यबल का गठन एक देश से दूसरे देश में कालेधन या आतकंवादियों के लिए धन के हस्तांतरण पर निगरानी के लिए है. क्यूएफआई में विदेशी संस्थागत निवेशक एफआईआई या उनके सब अकाउंट शामिल नहीं हैं. विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को भारतीय बाजार नियामक सेबी के यहां पंजीकरण कराना होता है. पिछले साल अगस्त में विदेशी निवेशकों को इक्विटी और म्युचुअल फंड की रिण योजनाओं में कुल 13 अरब डालर तक का सीधा निवेश करने की मंजूरी दी थी.

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के मामले में फिलहाल सिर्फ एफआईआई और उनके सब अकाउंट और प्रवासी भारतीयों को ही भारतीय शेयर बाजार में सीधे निवेश की मंजूरी है. शेयर बाजार में उतार चढाव के बीच पिछले साल विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार से 2,700 करोड़ रुपए से अधिक की शुद्ध पूंजी निकासी की. क्यूएफआई के मामले में सरकार के निर्णय  के बाद अब उम्मीद है कि सेबी और रिजर्व बैंक इस मामले में 15 जनवरी तक अपने दिशानिर्देश जारी कर देंगे. कोई एक क्यूएफआई या क्यूएफआई निवेशकों का समूह किसी भारतीय कंपनी में उसकी चुकता पूंजी के क्र मश 5 प्रतिशत और 10 प्रतिशत तक निवेश कर सकेगा.

– अब तक विदेशी निवेशक म्यूच्युअल फंड के जरिए भारत में निवेदश करते थे. अब सीधे निवेश कर सकेंगे. इससे भारत में विदेशी करन्सी की आवक बढ़ेगी. सरकार का ये फैसला स्वागत योग्य है.
– अरविंद जैन
शैयर मार्केट निवेशक,  इन्दौर

Related Posts: