गुना 30 सितंबर.  कापरेटिव बैंक गुना अपनी कार्यप्रणाली को लेकर पहले से ही चर्चाओं का केन्द्र बना हुआ था. इस बैंक के संचालक मंडल पर पहले से ही धारा 53(1) के तहत कार्रवाई करने के नोटिस जारी होने से इसके भंग होने का खतरा आशंकित था.

इधर शुक्रवार को दो संचालकों द्वारा दिए गए इस्तीफे के बाद संचालक मंडल का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. कॉपरेटिव बैंक गुना के संचालक मंडल में वर्ष 2007 में चुनाव के बाद कुल 12 सदस्य थे, जिनमें से एक शंकरिया हरिजन का स्वर्गवास हो गया, दूसरे संचालक हरिसिंह यादव ने गत माह में त्यागपत्र दे दिया था. इसके अलावा तीन अन्य संचालक वीरेन्द्र नारायण मिश्रा, मुन्नीदेवी मीना व बृजनारायण चौकसे को उनकी संस्थाएं कालातीत हो जाने के कारण संयुक्त पंजीयक ने सहकारी अधिनियम के नियम 45(3) के तहत संचालक मंडल के आयोग्य घोषित कर दिया था.

इस तरह संचालक मंडल में कुल सात सदस्य रह गए थे, जिनमें से दो श्रीमती मनोरमा सिंघल व राजीव जैन जाट ने भी आज अपने इस्तीफे प्रभारी महाप्रबंधक एवं मुख्य लेखापाल शैलेन्द्र सिंह तोमर को सौंप दी है. इस्तीफे में नाबार्ड व वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों का पालन न करने, बैंक संचालन में अनुचित कार्रवाई, गबन आदि आपराधिक प्रकरण के बावजूद भी निजी लाभ के लि दोषियों पर कार्रवाई न करने जैसे आरोप चस्पा करते हुए दोनों संचालकों ने अप्रत्यक्ष रूप से बैंक के अध्यक्ष  राधावल्लभ किरार पर निशाने साधे हैं. इन दो इस्तीफों के साथ ही संचालक मंडल अल्पमत में आ गया है.

हालांकि संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं ग्वालियर केएल गुप्ता ने विगत 26 सितंबर को ही धारा 53(1) के तहत नोटिस जारी कर संचालक मंडल को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने को लेकर प्रबंधन से जबाव मांगा है जो कि आगामी 12 अक्टूबर तक देना है. उल्लेखनीय है कि सहकारी बैंक अधिनियम के अनुसार तीन सहकारी बैंक अधिनियम के अनुसार तीन सहकारी वर्षों में वसूली 60 प्रतिशत से कम रहने व ओवर ड्यूज 40 प्रतिशत से अधिक रहने की स्थिति में संचालक मंडल को भंग कर प्रशासक बैठक जाने का प्रावधान है.

इसी के तहत गुना कापरेटिब बैंक को इस कार्रवाई के जद में लिया गया है. क्योंकि बैंक की वसूली 2007-08 में 19.94 वर्ष, 2008-09 में 33.70, 2009-10 में 33.72 व 2010-11 में 34.92 प्रतिशत रही है. इसी तरह 40  प्रतिशत ओवरड्यूज की शर्त के विपरी गुना बैंक का प्रतिशत इन वर्षों में क्रमश: 65.93, 77.88 व 75.04 रहा है. कुल मिलाकर संचालक मंडल का प्रदर्शन भारी निराशाजनक रहा है. इस तरह कापरेटिव बैंक गुना के संचालक मंडल के अल्पमत में आने के साथ ही उस पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं.

इनका कहना है- राजीव जैन जाट, संचालक सदस्य ने कहा कि बैंक मे अनियमितताएं एवं त्रुटिपूर्ण कार्यप्रणाली की जाने से बैंक के हालात बेहद खराब हो चुके थे. इसलिए पद पर बने रहना उचित नहीं था. वहीं संचालक सदस्य होने के नाते हमारी कभी नहीं सुनी गई.

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