प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने लगाया आरोप

भोपाल 26 अप्रैल. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने कहा है कि शिवराज-सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की नई सरकारी व्यवस्था का खूब ढि़ढ़ोरा पीटा था, लेकिन   15 मार्च से शुरू हुई इस व्यवस्था की सारी कलई एक महीने में ही खुल गई है.  उनके अनुसार गेहूं खरीदी की यह बहुप्रचारित व्यवस्था औंधे मुंह गिर पड़ी है.

प्रदेश के हजारों खरीदी केंद्रों में गेहूं की खरीदी बंद हो चुकी है, वारदानों का गंभीर संकट पैदा हो जाने से लाखों मैट्रिक टन गेहूं खुले में पड़ा हुआ है तथा गेहूं की परिवहन व्यवस्था भी दम तोड़ चुकी है. आपने कहा है कि होशंगाबाद जिले सहित कुछ अन्य जिलों में अचानक हुई बारिश के कारण हजारों मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में भीग जाने के कारण उसके सडऩे की नौबत आ गई है. इस सरकारी खरीदी के भरोसे लाखों किसानों का गेहूं अधबीच में अटका पड़ा है. जो किसान अपना गेहूं मंडियों में ले आये हैं वे समझ नहीं पा रहे हैं कि आगे क्या करें. प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता प्रमोद गुगालिया ने कहा है कि ग्रीष्मकालीन कपास बोवनी का मौसम शुरू हो गया है.

और इसी के साथ कपास उत्पादक किसानों को नकली और गुणवत्ता विहीन कपास बीजों की आड़ में ठगने वाली फर्जी बीज कंपनियां भी सक्रिय हो गई हैं. आपने कहा है कि खरगौन जिले में करीब ढ़ाई लाख हैक्टेयर रकबे में कपास बोया जाता है. इन कंपनियों ने बीज के नाम पर पिछले वर्ष भी जिले के किसानों की मनमानी लूट की थी. यद्यपि सरकार ने इस वर्ष मानसेंटो, अजीत, राशि और प्रवर्धन नाम की चार बीज कंपनियों को ही मानक कपास बीज बेचने की अनुमति दी है, किंतु सही स्थिति यह है कि जिले में एक बार फिर बिना अनुमति घटिया बीज बेचने का गोरख धंधा अधिकारियों की नाक के नीचे चोरी छिपे फिर चल पड़ा है. श्री गुगालिया ने कहा है कि इन दिनों खरगौन जिले में 100 से अधिक प्रजाति के कपास बीज विक्रय के लिए उपलब्ध हैं. इससे किसानों के सामने भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है कि आखिर वे कौन सी प्रजाति का बीज अपने खेतों में बोये. कृषि विभाग के अधिकारी किसानों का सही मार्गदर्शन करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं.

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