कोलकाता, 7 मई. अमेरिका चाहता है कि भारत ईरान से दूर रहे. इसके लिए भारत की यात्रा पर आईं विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है. उन्होंने सोमवार को कहा भी कि भारत जैसे देशों पर ईरान से तेल का आयात घटाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, ताकि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छोडऩे के लिए मजबूर हो जाए.

क्लिंटन ने कहा, ‘ईरान परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने वाला देश है और उसने इस संधि की शर्तों को नहीं माना है. इसलिए हमने अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन बनाया और सुरक्षा परिषद में कड़े प्रतिबंध पारित करवाए. इस दबाव ने ईरान को अंतर्राष्ट्रीय वार्ता के मंच पर लाया है और इसी दिशा में पहली बैठक इस्तांबुल में होने जा रही है.’ कोलकाता के एक स्कूल में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान के कुल तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 12 फीसदी है. सऊदी अरब के बाद ईरान भारत को तेल का निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है. उन्होंने कहा, ‘हम मानते हैं कि अगर दबाव और प्रतिबंध नहीं लगाया गया होता तो ईरान वार्ता की मेज पर नहीं आता.

हम यह नहीं मानते कि ईरान बिना दबाव बनाए इस मुद्दे को शांतिपूर्वक समाधान निकालेगा. इसी कारण भारत, चीन, यूरोपीय देशों, जापान से ईरान से तेल आयात में कटौती करने को कहा जा रहा है ताकि उस पर दबाव बन सके.’ क्लिंटन ने कहा कि इराक और सऊदी अरब जैसे पेट्रोलियम उत्पादक देश भारत जैसे देशों की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं.उन्होंने कहा, ‘यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत की भूमिका का हिस्सा है. यह केवल इसलिए नहीं है कि ऐसा करने के लिए अमेरिका कह रहा है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ऐसा करने के लिए कह रहा है.’ जब क्लिंटन से पूछा गया कि क्या भारत-अमेरिका के रिश्तों में ईरान का मुद्दा ताजा बाधा है तो उन्होंने कहा, ‘इस मुद्दे पर अच्छी प्रगति हुई है और वह यह देखकर उत्साहित हैं कि भारत सरकार क्या करने में सक्षम है. जो प्रगति हुई है हम उसकी सराहना करते हैं और हम मानते हैं कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की पर्याप्त सप्लाई है.’

क्लिंटन ने प्रतिबंधों में ढील के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा, जैसा कि भारत चाहता है. उन्होंने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी. मार्च में अमेरिका ने ईरान से तेल का आयात करने वाले भारत और 11 अन्य देशों को नोटिस थमाकर आयात में कटौती नहीं करने पर उनपर वित्तीय प्रतिबंधों को कड़ा किए जाने की बात कही थी. हिलेरी ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से राज्य सचिवालय में मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच रीटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), तीस्ता जल संधि और राज्य में अमेरिकी निवेश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने का अनुमान है. क्लिंटन सुबह करीब 11.10 बजे राइटर्स बिल्डिंग पहुंचीं, जहां ममता ने दोनों हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ कहकर उनका अभिवादन किया.

हिलेरी ने अमेरिकी निवेश की इच्छा जताई

कोलकाता। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से सोमवार को हुई मुलाकात को सकारात्मक एवं ठोस करार देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि मेहमान विदेश मंत्री ने राज्य में अमेरिकी निवेश की इच्छा जताई है। राज्य सचिवालय राइटर्स बिल्डिंग में अमेरिका की विदेशी मंत्री हिलेरी क्लिंटन के साथ 52 मिनट तक हुई मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, हिलेरी क्लिंटन के साथ बातचीत सकारात्मक, रचनात्मक व ठोस रही।

साथ ही उन्होंने 34 साल बाद राज्य में आए राजनैतिक बदलाव का स्वागत किया एवं सरकार के कामकाज की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा, उन्होंने एक साझेदार राज्य के तौर पर बंगाल में निवेश की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी निवेश के लिए जिन क्षेत्रों की पहचान की गई है उनमें सूचना प्रौद्योगिकी, साफ्टवेयर क्षेत्र, विनिर्माण, गहरे समुद्र वाले बंदरगाह, पर्यटन, स्वास्थ्य व शिक्षा शामिल हैं। ममता ने कहा कि वे आर्थिक व कारोबार विकास के लिए पूरा समर्थन देंगे। मुख्य सचिव समर घोष एवं अमेरिकी राजदूत नैन्सी पावेल इस प्रगति की निगरानी करेंगे। बनर्जी ने यह भी कहा कि बांग्लादेश के साथ तीस्ता जल संधि के मसले पर कोई चर्चा नहीं हुई। न ही किसी परमाणु व रणनीतिक मामलों पर चर्चा नहीं हुई।

’26/11 पर पाक की कार्रवाई पर्याप्त नहीं’

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने सोमवार को पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने मुम्बई आतंकवादी हमले के मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि साल 2008 के मुम्बई हमले से जुड़े सभी आतंकवादियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

भारत व अमेरिका दोनों ही पाकिस्तान से इस दिशा में कार्रवाई करने के लिए बार-बार अनुरोध करते रहे हैं। क्लिंटन ने कहा, आपको आपकी हत्या की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ती है। हमने मुम्बई हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया था। हम चाहते हैं कि इस हमले से जुड़े सभी लोगों को न्याय प्रक्रिया से गुजारा जाए। पाकिस्तान के 10 आतंकवादियों ने नवंबर 2008 में मुम्बई में आतंकवादी हमला किया था। इसमें विदेशी नागरिकों सहित 166 लोग मारे गए थे। एक हमलावर अजमल आमिर कसाब को गिरफ्तार कर लिया गया था।

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