पीएम ने आम आदमियों को चेताया

नई दिल्ली, 6 जुलाई.  भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पीएम मनमोहन सिंह ने आम आदमी से सोना न खरीदने की अपील की है। साथ ही इन पैसों को बचत के रूप में स्थायी निवेश में लगाने पर जोर दिया है। पीएम के मुताबिक, सोने के भाव में हो रहे उतार-चढ़ाव के चलते ये धातु निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है, लेकिन इस दीवानगी को कम करने की जरूरत है।

मनमोहन सिंह का कहना है, हमें निवेश के बंद हो चुके दरवाजों को फिर से खोलना चाहिए। इसके जरिए ही बचत को उत्पादक निवेश में लगाया जा सकेगा। साथ ही सोने से भी लोगों का मोह घटेगा। ये सारे प्रयास निवेश में इजाफा करते हुए देश में नौकरियों की संख्या बढ़ाने में मदद करेंगे। वित्त मंत्री की कुर्सी संभालने के बाद पहले इंटरव्यू में डॉ. सिंह ने बताया है कि फिलहाल उनकी नजरें पांच प्रमुख चुनौतियों पर हैं।  फिलहाल वित्तीय घाटे पर नियंत्रण, कर प्रणाली में स्पष्टता, म्यूचुअल फंड और बीमा उद्योग में जान फूंकना, विदेशी निवेश के लंबित प्रस्तावों को हरी झंडी देना और इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से सुधार करना उनके एजेंडे में हैं।
विदेशी निवेशकों को एक तरह से आश्वस्त करते हुए सिंह ने कहा कि वह लगातार निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाते रहेंगे।

वित्त मंत्रालय की जि़म्मेदारी संभालते ही प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने देश की आर्थिक व्यवस्था को दुरूस्त करने और ज़्यादा से ज़्यादा रोजग़ार पैदा करने के लिए कुछ बेहद ज़रूरी कदम उठाने की बात कही है, एक अंग्रेज़ी अख़बार को दिए एक साक्षात्कार में डॉ. सिंह ने कहा कि देश का राजकोषीय घाटा कम करने, बीमा और म्यूचल फंड कारोबार को मदद देने और विदेशी संस्थागत मामलों को जल्द निपटाने के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अगले कुछ दिनों मे कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगें जिनसे देश मे रोजग़ार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। डॉ.सिंह ने व्यापार की नई संभावनाओं पर ज़ोर दिया जिससे दुनिया के निवेशकों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सके ।

भाजपा ने प्रधानमंत्री को घेरा

नयी दिल्ली, 6 जुलाई, नससे. प्रधानमंत्री द्वारा भविष्य के रोड़मैप की आलोचना करते हुए भाजपा ने कहा कि पूर्व वितमंत्री प्रणव मुखर्जी के कार्यो की समीक्षा की जा रही है. देश की खराब अर्थव्यवस्था के लिए यही के अर्थशास्त्री जिम्मेवार है न कि विदेशों की पैमाईश. भाजपा ने साफ किया कि केवल यह कहकर अर्थशास्त्र की खराब दशा को नहीं सुधारा जा सकता है कि यूरो क्राईसस के कारण ही यह दिक्कत हुई है.

भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि बजट पूर्व एक वित्त मंत्री प्रधानमंत्री से लगभग सभी विषयों पर पांच बार मुलाकात करता है और उसके बाद ही बजट भाषण तैयार किया जाता है लेकिन पूर्व वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के जाते ही उनके द्वारा लिए गए नीतिगत फैसलों की समीक्षा की जाने लगी है. प्रधानमंत्री ने अपने साक्षात्कार में ही साफ कर दिया है कि कुछ खास बिंदुओं को प्राथमिकता  पर फिर से समीक्षा की जा रही है. उन्होंने कहा कि यूपीए 2 ने अपने घोषणा में कहा था कि रोजाना 2० किलोमीटर रोड़ तैयार की जाएगी लेकिन यह हो नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपने साक्षात्कार में विपक्ष से किसी प्रकार का सहयोग नहीं मांगा है. इसलिए विपक्ष की कोई जिम्मेवारी नहीं बनता है. एक प्रश्र के उत्तर में उन्होंने कहा कि लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था सुधरने की दुहाई केवल बातें भर रह जाती है.

भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज किया

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार खास कर यूपीए-दो के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने के आरोपों को शुक्रवार को सिरे से खारिज कर दिया। मनमोहन ने कहा कि उन्होंने पूरी इमानदारी और निष्ठा के साथ सरकार का नेतृत्व किया है। गौरतलब है कि मनमोहन सरकार पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हैं और इस सरकार को अबतक का भ्रष्टतम सरकार माना जाने लगा है। टीम अन्ना भी आंदोलन के माध्यम से इस बात को उठा रही है।  जिसमें उसे पूरे देश में भरपूर समर्थन मिल रहा है। मनमोहन सिंह ने कहा कि मै नहीं मानता कि मेरी सरकार में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। मनमोहन सिंह पर कॉमनवेल्थ और टूजी जैसे बड़े घोटालों की अनदेखी करने का आरोप है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाने और इनकी आलोचना के लिए मीडिया की प्रसंशा की लेकिन सुझाव देते हुए कहा कि ऐसा करते समय उन्हें दोनों तरफ से संतुलन बनाए रखना चाहिए। उन्हें सरकार की उपलब्धियों को भी उसी गंभीरता के साथ बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कानून पास करवाए जिसका सार्वजनिक जीवन में खासा महत्व है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार से निबटने के लिए हर वह कदम उठा रही है जिससे इस पर लगाम लगाया जा सके।

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