• पेट्रोल में हुई मूल्य वृद्धि

भोपाल 27 मई. संप्रग सरकार द्वारा पेट्रोल की कीमत में एक ही झटके में साढ़े सात रुपये की वृद्घि की घोषणा जनता पर जबरदस्त हमला है, जो पहले से ही सभी जीवनोपयोगी वस्तुओं एवं सेवाओं की लगातार आसमान छूती अद्वितीय महंगाई की मार से कराह रही है.

सरकार ने पेट्रोल के मूल्य निर्धारण प्रणाली को नियंत्रण मुक्त कर दिया है. उसने इसे संसद में पारित करवाना भी मुनासिब नहीं समझा. ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री मनमोहन ङ्क्षसह द्वारा यह कहना कि पेट्रोल के दाम तेल कम्पनियों द्वारा बढ़ायो गये है, जनता के साथ एक भद्दïा मजाक है. सरकार द्वारा इस कदम को उचित ठहराने के लिये कहा जा रहा है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में आ रही गिरावट के चलते पेट्रोल की कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया था. लेकिन रुपये की कीमत में गिरावट की वजह वे नव-उदारवादी नीतियां हैं जिसे साम्राज्यवाद के हुक्म पर जनता पर लाद दिया गया है.

क्या सरकार इन जन-विरोध नीतियों को रद्द करने के लिये तैयार है. हमें यह नहीं भुलना चाहिये कि पिछले करीब तीन वर्षों से अंतर्राष्टरीय वित्तीय पूंजी का संकट लगतार तीव्र होता जा रहा है. किन्तु भारत सरकार बार-बार यही कहती रही कि सब कुछ ठीक है और भारत की फलती-फूलती अर्थव्यवस्था पर इसका असर नहीं पड़ेगा. अब वे अर्थव्यवस्था में संकट का रोना हो रहे हैं और पेट्रोल की कीमतों में वृद्घि के लिये यूरोप के देशों के संकट को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

ये सभी परस्पर विरोधी बातें जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिये की जा रही हैं.  यह बात दिन-ब-दिन स्पष्टï होती जा रही है कि भारत की अर्थव्यवस्था को भूमंडलीकरण के तहत साम्राज्यवादी वित्तीय पूंजी के साथ पूरी तरह जोड़ दिया गया, इसलिये साम्राज्यवादी व्यवस्था के किसी भी संकट का असर तुरंत भारत की नव-उपनिवेशिक अर्थव्यवस्था पर पडऩे लगा है. सरकार द्वारा थोप दी गई इन्हीं नीतियों के चलते जनता की आर्थिक दशा लगातार खराब होती जा रही है. सरकार की यही नीतियां महंगाई, बेरोजगारी और जनता की दरिद्रता के लिये एकमात्र जिम्मेवार हैं.

मप्र भवन कर्मचारियों ने किया विरोध प्रदर्शन
भोपाल. मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के संविदा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष तथा महासंघ के भवन निर्माण एवं कर्मकार कल्याण कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया. इस अवसर पर कर्मकार कल्याण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि मप्र में यह एक मात्र ऐसा मण्डल है जिसमें कोई भी कर्मचारी नियमित नहीं है.

एवं मण्डल का कार्य संपादन वर्ष 2003 से इन्ही कर्मचारियों के बल पर किया जा रहा है. कर्मचारियों की समस्त मांगो को दरकिनार कर श्रम विभाग द्वारा श्रम विभाग के कर्मचारियों को मण्डल के पदों पर पदोन्नति कर प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है.

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