नई दिल्ली .रुपये के मुकाबले डॉलर की कीमत लगातार बढऩे से बादाम और पिस्ते का आयात महंगा हो गया है। इस वजह से देसी बाजार में बादाम करीब 10 फीसदी और पिस्ता 15 फीसदी महंगा हो गया है।

कारोबारियों के अनुसार बादाम, पिस्ता की ज्यादातर मांग आयात से ही पूरी की जाती है। अब डॉलर 57 रुपये का रिकॉर्ड स्तर भी लांघ गया है, इसलिए आयात महंगा हो गया है। अमेरिका से आयातित बादाम गिरी का दाम इस महीने 40 रुपये बढ़कर 460 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है और ईरानी पिस्ता 100 रुपये चढ़कर 760 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। अच्छी गुणवत्ता वाला काजू (गोवा) 620 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है और किशमिश भी महंगी हुई है, लेकिन इन दोनों का देश में काफी उत्पादन हो रहा है, इसलिए कम आयात की वजह से इनके दामों पर ज्यादा असर नहीं दिखा है। डॉलर की वजह से ही इनके दाम बढ़ रहे हैं। दाम बढऩे से मेवों की मांग भी कम हो गई है।   बिक्री 30 फीसदी घट गई है। ऊंचे भाव पर स्टॉकिस्ट भी खरीदारी से परहेज कर रहे हैं। बहुत जरूरी होने पर ही मेवों की खरीद की जा रही है। आयातकों ने भी ठंडा माहौल देखकर सौदे कम कर दिए हैं और रुपया मजबूत होने या गिरावट थमने का इंतजार किया जा रहा है।

घटा चाय का उत्पादन

नई दिल्ली .देश में चाय का उत्पादन अप्रैल माह में 16 फीसदी घटकर 6.1 करोड़ किलोग्राम रह गया है। चाय बोर्ड ने बताया कि उत्तर तथा दक्षिण भारत में उत्पादन घटने की वजह से कुल उत्पादन कम हुआ है।

अप्रैल, 2011 में देश में 7.30 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था। उत्तर भारत में चाय का उत्पादन माह के दौरान 16 फीसदी घटकर 4.16 करोड़ किलोग्राम रह गया, जो पिछले साल इसी महीने 4.94 करोड़ किलोग्राम था।इसी तरह दक्षिण भारत में चाय उत्पादन 18 फीसद की गिरावट के साथ 1.93 करोड़ किलोग्राम रहा, जो पिछले साल इसी महीने में 2.35 करोड़ किलोग्राम था। चालू कैलेंडर साल के पहले चार माह में चाय उत्पादन 14 फीसद घटकर 14.32 करोड़ किलोग्राम रहा है, जो पिछले साल इसी अवधि में 16.74 करोड़ किलोग्राम था।

ग्वार वायदा शुरु होगा दोबारा!

मुंबई . ग्वार का वायदा कारोबार दोबारा शुरू होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ग्वार की बुआई आंकड़े देखने के बाद अगस्त में वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) इसके वायदा पर फैसला कर सकता है।

ग्वार से मालामाल हुए कारोबारियों को भी उम्मीद है कि भाव घटने और रकबा बढऩे से अगस्त तक वायदा कारोबार फिर शुरू हो जाएगा।भाव घटने और रकबा बढऩे से एफएमसी पर ग्वार वायदा दोबार शुरू करने का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन आयोग जल्दबाजी नहीं चाहता। इस मसले पर एफएमसी के चेयरमैन रमेश अभिषेक ने कहा, ‘ग्वार की बुआई और बाजार पर हमारी नजर है। अगस्त तक ग्वार के सही रकबे का पता चल जाएगा और उसके बाद ही वायदा के बारे में फैसला होगा।एफएमसी पहले भी कहता रहा है.

अगस्त तक ग्वार वायदा पर फैसला हो सकता है, इसलिए कारोबारियों को उम्मीद बंध गई है और उन्होंने कारोबार की तैयारी कर ली है। राजस्थान में श्रीगंगानगर के एक बड़े वायदा कारोबारी ने कहा कि सितंबर के पहले हफ्ते में ग्वार वायदा शुरू हो जाएगा, इसलिए किसान भी ग्वार की ज्यादा बुआई में जुट गए हैं। कमोडिटी एक्सचेंज भी एफएमसी के कदम पर नजर रखे हैं। पिछले एक महीने से सभी बड़े कमोडिटी एक्सचेंज वायदा कारोबार पर सम्मेलन कर रहे हैं, जो ग्वार की मंडियों के आसपास ही आयोजित किए गए हैं। इनमें ग्वार की ट्रेडिंग और हेजिंग के गुर सिखाए जा रहे हैं। ग्वार की सबसे ज्यादा ट्रेडिंग कराने वाले नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) के अधिकारियों का कहना है कि एफएमसी की हरी झंडी मिलते ही वे ग्वार सीड और ग्वार गम के नए अनुबंधों पर कारोबार शुरू कर देंगे।

ग्वार गम की कीमत इस साल 1 लाख रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गई थी और ग्वार सीड 33,000 रुपये प्रति क्विंटल को लांघ गया था। इसमें सटोरियों की सक्रियता और गड़बड़ी की खबरों पर एफएमसी ने 22 मार्च से कारोबार रोक दिया था। 21 मार्च को ग्वार गम 88,740 रुपये और ग्वार सीड 26,699 रुपये प्रति क्विंटल था। दिलचस्प है कि 1 मार्च 2011 को ग्वार गम 8,813 रुपये और ग्वार सीड 2,976 रुपये प्रति क्विंटल तक ही पहुंच सका था। अलबत्ता वायदा पर रोक लगने से श्रीगंगानगर मंडी में ग्वार सीड 18,000 और ग्वार गम 60,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे लुढ़क चुका है। कारोबारियों के मुताबिक भाव नहीं बढऩे की आशंका देखकर किसान अब रोका गया माल निकाल रहे हैं। ऐसे में आपूर्ति बढ़ रही है और अगले दो महीने में ग्वार सीड 10,000 रुपये तथा ग्वार गम 35,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे लुढ़क सकता है।

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