मध्यप्रदेश के किसानों को इस समय दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है. सबसे बड़ी परेशानी तो यह आ ही गई कि बरसात लगभग एक महीने देर के आने की आशंका हो गई है. किसान खरीफ की बुवाई के लिए तैयार बैठे है और वर्षा का इंतजार हो रहा है.

हाल ही किसान में रबी फसल का गेहूं समर्थन मूल्य पर बेच कर बैठे हैं. लेकिन इधर जो कमाया है वह अब खाद व बीज के बढ़े मूल्यों से उनके हाथ से जाता दिखाई दे रहा है. सरकार ने डीजल, रसोई गैस की तरह अभी केवल यूरिया खाद को मूल्य नियंत्रण प्रणाली में रखा है और बाकी खादों को पेट्रोल की तरह खाद कंपनियों को उनकी लागत व मुनाफे के अनुसार मूल्य तय करने का प्रावधान कर चुकी है. इसकी वजह से खाद निर्माता कंपनियों ने यूरिया के अलावा शेष खादों के मूल्यों में 15 से 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि कर दी. अभी कुछ दिनों पहले खबर आ चुकी है सीमेंट की मांग व खपत को देखते हुए सीमेंट कंपनियों ने आपस में गोल बंदी (कारटेल) बनाकर सीमेंट की कीमतों को 160 रुपये बोरी से बढ़ाकर 300 रुपये बोरी कर लागत से कहीं ज्यादा मुनाफा कमा लिया है. इसीलिए उन पर कम्पीटीशन कंट्रोल कमीशन ने 60 अरब रुपयों का भारी जुर्माना लगाया. सरकार को यह देखना चाहिए किसानों के पास समर्थन मूल्य का रुपया देखकर कही ये खाद कंपनियां भी सीमेंट कंपनियों की तरह गोल बंदी (कारटेल) करके भारी मुनाफा खोरी तो नहीं कमा रही है. सभी खाद डी.ए.पी. एम.ओ.पी. और एन.पी.के. काला बाजार में ऊंचे मूल्य पर बिक रहे है.

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