भोपाल. 11 जून. म.प्र के राज्यपाल श्री राम नरेश यादव ने आज यहां रविन्द्र भवन में आकार वीडियोटेक द्वारा आयोजित तीन दिवसीय पांचवें फिल्मोत्सव के अंतिम दिन पुरस्कार वितरण समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि फिल्म एजुकेशन अब समाज की सामयिक और प्रासंगिक जरूरत है.

उन्होंने कहा कि मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रिय साधन फिल्म जनमानस को गहराई से प्रभावित करती हैं. फिल्मों और समाज के बीच एक बहुत गहरा, आत्मीय और प्रभावशाली अन्तर्सम्बन्ध है. श्री यादव ने कहा फिल्म वह शक्तिशाली माध्यम है जो समाज को उद्वेलित करने और दिशा प्रदान करने की क्षमता रखता है. फिल्मों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों के संदेश को पूरी सशक्तता के साथ जन-मन को संप्रेषित किया जा सकता है.

राज्यपाल श्री यादव ने कहा कि सिनेमा का केनवास बहुत बड़ा है और फिल्म निर्माण के उपक्रम के दौरान रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध होते हैं. राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक बदलाव को सामने लाने वाले इस माध्यम को मात्र मनोरंजन का साधन मानकर उपेक्षित नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह आयोजन इस अर्थ में और भी महत्वपूर्ण है कि यह वर्ष भारतीय सिनेमा का शताब्दी वर्ष है. राज्यपाल श्री यादव ने कहा कि सदी के इस सफर में भारतीय सिनेमा और भारतीय समाज एकाकार हो गया है. उन्होंने आश्वस्त किया कि वे प्रदेश सरकार से आग्रह करेंगे कि मध्यप्रदेश के फिल्मकारों को प्रोत्साहित करने और उनके समग्र मूल्यांकन के लिये कोई संस्थागत पहल करे.

इस अवसर पर राज्यपाल श्री यादव ने फिल्म यह दूरियां के लिए केशव अरोरा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, दीपशिखा नागपाल को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार प्रदान किया. राकेश परमार की फिल्म आस्था का सफर को बेस्ट डाक्युमेंटरी, मनोज सक्सेना की इतिहास और किंवदंतियों के बीच झूलता अलीराजपुर को वेस्ट डेव्यू डाक्युमेंटरी, डा. कुसुम मेघवाल को समाज सेवा के लिए नारी शक्ति सम्मान 2012 तथा श्री विजय दिंडोरकर को अभिनय के क्षेत्र में उनकी जीवनपर्यन्त सेवाओं और उपलब्धियों के लिए लाइफटाईम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया. जूरी अवार्ड से क्रिस्प द्वारा निर्मित डाक्यूमेंट्री फिल्म ”फोरसिथ की पगडंडियाँÓÓ को पुरस्कृत किया गया.

ज्ञातव्य है कि तीन दिवसीय यह फिल्मोत्सव हिन्दी फिल्मों के तीन महानायकों, स्व. देवानन्द, स्व. शम्मीकपूर और स्व. जाय मुखर्जी को समर्पित है और उन पर एक-एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया. फिल्मोत्सव के पहले दिन निर्देशक राकेश परमार की डाक्यूमेन्ट्री फिल्म आस्था का सफर, निर्देशक चन्द्र बहल की फीचर फिल्म भुनसारा, निर्देशक जयदीप सिंह चौहान की डाक्युमेन्ट्री फिल्म फोरसिथ की पगडंडियां प्रदर्शित की गई. दूसरे दिन निर्देशक दीपशिखा नागपाल की फीचर फिल्म यह दूरियां, निर्देशक चन्दर बहल की डाक्युफिकशन फिल्म मैं भी एक इंसान हूं और निर्देशक मनोज सक्सेना की डाक्युमेंट्री फिल्म इतिहास और किवदंतियों के बीच झूलता अलीराजपुरप्रदर्शित की गई.

संस्था के संयोजक श्री शशिकांत सक्सेना ने आभार प्रदर्शन करते हुए बताया कि आकार वीडियोटेक द्वारा आयोजित पांच फिल्मोत्सवों में प्रदेश के फिल्मकारों की 40 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया गया है और उन फिल्मों से जुड़ी 75 अधिक प्रतिभाओं को सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने जानकारी दी कि प्रतिवर्ष 10 अच्छी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाता है और उनके मूल्यांकन के आधार पर पुरस्कार दिये जाते हैं. संस्था द्वारा राज्यपाल को स्मृति-चिन्ह भेंट किया गया.

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