प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिया यूएनएससी विस्तार पर जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द सुधार किए जाने, खासकर सुरक्षा परिषद में विस्तार किए जाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि इसे एक निष्पक्ष, विश्वसनीय और प्रभावी विश्व निकाय के रूप में देखा जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 66वें अधिवेशन में भाग लेने के लिए न्यूयार्क रवाना होने से पहले मनमोहन ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय शाति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों से नीति निर्धारक इकाई की प्रभाव क्षमता बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र को निष्पक्ष, विश्वसनीय एवं प्रभावी निकाय के रूप में देखा जाना चाहिए। मैं इस अद्वितीय संगठन में जल्द सुधार विशेष तौर पर इसकी सुरक्षा परिषद के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दूंगा।
भारत सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट की मांग कर रहा है। वह इस साल जनवरी में 19 साल के अंतराल के बाद इस निकाय का अस्थाई सदस्य बना था।

मनमोहन ने कहा कि मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय शाति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने और विकासशील देशों की क्षमताओं को बढ़ाने के हमारे प्रयासों से परिषद की प्रभाव क्षमता बढ़ी है। यह उल्लेख करते हुए कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का अधिवेशन ऐसे समय हो रहा है जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सभी देशों के मिलकर काम करने की पहले से कहीं अब अधिक जरूरत पड़ गई है। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र के लिए अपनी वैश्विक नेतृत्व भूमिका शुरू करने का समय है।

चुनौतियों का उल्लेख करते हुए मनमोहन ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था मुद्रास्फीतिक दबावों सहित आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रही है। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आतंकवाद और समुद्री डकैती जैसे गैर परंपरागत संकटों से राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक एवं सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो रहा है।

पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका और खाड़ी क्षेत्र में बड़ी उथल पुथल है और आने वाले समय में विश्व के इस महत्वपूर्ण हिस्से में चीजों के सही होने को लेकर अनिश्चितता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फलस्तीन का सवाल अनसुलझा बना हुआ है। उन्हें ईरान, दक्षिण सूडान और श्रीलंका के राष्ट्रपतियों तथा जापान और नेपाल के प्रधानमंत्रियों के साथ अपनी मुलाकात की उम्मीद है। मनमोहन के साथ विदेश मंत्री एसएम कृष्णा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशकर मेनन और विदेश सचिव रंजन मथाई भी हैं।

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