राज्य विधानसभाओं के अलग-अलग कार्यकाल हो जाने की वजह से अब भारत में चुनाव लगभग हर वर्ष किसी न किसी राज्य में हुआ ही करते हैं. इससे पूर्व असम व पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए हैं. अब आगामी वर्ष 2012 में 5 राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर व गोवा में चुनाव होने जा रहे हैं. इसमें उत्तर प्रदेश को ”बैटिल रॉयल” कहा जा सकता है.

यहां बहुजन समाज पार्टी की खुद के बहुमत की एक दलीय सरकार है. यह करिश्मा मुख्यमंत्री मायावती ने गत विधानसभा चुनावों में कर दिखाया. उससे पूर्व एक अरसे तक उत्तर प्रदेश साझा सरकारों की उलटफेर में चलता रहा. वहां की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी व भारतीय जनता पार्टी का त्रिभुज बन गया था. जिससे बहुजन समाज पार्टी जुड़ जाती उसकी सरकार बन जाती थी. इसी राजनैतिक जोड़ घटाने में बहुजन की मायावती, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह और भारतीय जनता पार्टी के राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री बनते व उतरते रहे. मायावती को इस बात का श्रेय दिया ही जाना चाहिए कि उन्होंने भारत के सबसे बड़े और राजनीति प्रमुख उत्तर प्रदेश को साझा सरकारों के झंझट से मुक्त कर एकदलीय शासन पुन: स्थापित किया. साझा सरकारों की आपसी खींचतान से एकदलीय शासन हमेशा स्थिर व सुखद रहता है. अभी 403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में सत्तारुढ़ बसपा के 206, समाजवादी पार्टी के 97, भारतीय जनता-51, राष्टï्रीय लोक दल (अजीत सिंह) 10 व निर्दलीय 16 हैं. कांग्रेस के सबसे कम और दयनीय दशा में मात्र दो सदस्य हैं. ये चुनाव 2007 में हुए थे. इसके दो साल बाद 2009 में लोकसभा चुनाव हुए थे. इसमें कांग्रेस का समाजवादी पार्टी से हुआ चुनाव समझौता टूट गया था लेकिन पार्टी ने विधानसभा के मुकाबले श्री राहुल गांधी की कमान में 80 लोकसभा सीटों में से अकेले 21 सीटें जीती थीं. सत्तारुढ़ बसपा को 20 और सपा को 23 स्थान मिले. भारतीय जनता पार्टी को 10 और राष्ट्रीय लोकदल को 5 स्थान मिले जो हाल ही कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए में शामिल हो गए हैं.

इस चुनाव में ऐसा लग रहा है कि मुख्य मुकाबला मायावती की बसपा और श्री राहुल गांधी की कमान में कांग्रेस में होने जा रहा है. इसके बाद ही समाजवादी पार्टी व भारतीय जनता पार्टी की स्थिति दिख रही है. मध्यप्रदेश के भूतपूर्व मुख्य मंत्री श्री दिग्विजय सिंह भी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का चुनाव कार्य संचालित कर रहे हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी मध्यप्रदेश की भूतपूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को उत्तर प्रदेश में चुनाव कमान दे रखी है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश जाट प्रमुख इलाके इस समय अजीत सिंह का राष्ट्रीय लोकदल और कांग्रेस साथ हैं यहां 50 सीटें हैं. यहां पर एक नया व विचित्र अद्र्ध राजनीतिक पहलू अन्ना हजारे का संभावित लग रहा है. वे किसी पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार नहीं करेंगे. केवल लोकपाल पर बिचक व बहक जाने से चुनाव में केवल कांग्रेस को वोट न देने का नकारात्मक प्रचार करेंगे. इसका सकारात्मक लाभ किसे होगा यह अभी अनुमानों में ही चल रहा है. साथ यह भी परीक्षा व परीक्षण में है कि वहां पुन: स्थापित हो चुकी एकदलीय शासन व्यवस्था बनी रहेगी या फिर साझा राजनीति का दौर आयेगा. यहां 4 फरवरी से 28 फरवरी तक 7 चरणों में मतदान होगा.  चुनाव आयोग श्री हजारे के मामले सतर्क और विधिसंगत रहेगा.

उत्तराखंड में 70 सदस्यीय विधानसभा भाजपा एन.डी.ए. की साझा सरकार के मुख्यमंत्री श्री खंडूरी हैं. यहां 30 जनवरी को पूरा मतदान हो जायेगा. 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में अकाली दल व भारतीय जनता पार्टी की सरकार अकाली नेता श्री प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में है. यहां भी एक ही दिन 30 जनवरी को पूरा चुनाव हो जायेगा. यहां अकाली  दल अभी 48, भाजपा के 19 और कांग्रेस के 44 सदस्य है. कांग्रेस के नेता और भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री अमरेन्दर सिंह कड़ी टक्कर दे रहे हैं. उन्होंने पहले भी एक बार बादल की अकाली सरकार को उखाड़कर कांग्रेस की सरकार चलाई थी. यहां भी एक दिन 30 जनवरी को मतदान पूरा हो जायेगा. गोवा विधानसभा में 40 सीटें हैं और यहां कांग्रेस व शरद पवार की राष्ट्रीय कांग्रेस की मिली जुली सरकार है. यहां कांग्रेस के 16 व भाजपा के 14 सदस्य हैं. यहां बहुत कम अंतर से सरकार डांवाडोल चलती रहती है. यहां एक ही दिन 3 मार्च को मतदान हो जायेगा. उत्तर पूर्व के मणिपुर राज्य में विधानसभा में 60 सीटें है. यहां आतंक तो नहीं लेकिन राज्य की कबीलाई राजनीति में उग्रवाद हमेशा चला करता है. यहां के कूकू कबीले और पड़ोसी नागालैंड के नागा कबीले में खूनी संघर्ष चला करता है. हिंसा की दृष्टि से यह बड़ा अशांत राज्य है. वर्तमान में यहां कांग्रेस के भारी संख्या में 30 सदस्य हैं और बाकी पार्टियों के 5-4-3 की संख्या में सदस्य हैं. यहां भी एक ही दिन 28 जनवरी को चुनाव हो जायेगा.

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