निवृतमान केन्द्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त श्री एस.वाई. कुरैशी और नये केन्द्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त श्री वी.एस. सम्पत ने पदभार छोडऩे व ग्रहण करने पर दोनों ने ही यह बताया कि आयोग चुनाव प्रणाली में सुधार के कई महत्वपूर्ण बड़े प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेज चुका है. इन पर संसद में विचार-विमर्श भी होगा. दोनों ने आशा व्यक्ति की है कि जल्दी ही देश की चुनाव प्रणाली में व्यापक सुधार होंगे.

चुनाव की सबसे बड़ी समस्या इस समय अपराधियों का स्वयं चुनाव लडऩा और धन बल का भारी उपयोग होता है. हाल ही झारखंड से राज्यसभा के लिये भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रवासी भारतीय को राज्यसभा का टिकिट दे दिया और उसका भाई करोड़ों रुपयों की नगदी के साथ पकड़ा गया. जिससे वह झारखंड के विधायकों के वोट खरीदना चाहता था. चुनाव आयोग ने तुरन्त ही उस चुनाव की अधिसूचना राष्ट्रपति से रद्द करवा दी. बाद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी श्री अहलूवालिया हार गये और पार्टी की भी बड़़ी किरकिरी हो गई.

अपराध पर आयोग ने प्रस्ताव भेजा है कि जिन लोगों पर आपराधिक मामलों में चार्जशीट दायर हो चुकी है उन्हें चुनाव लडऩे की पात्रता न हो. एक विचार भी चला कि चुनाव के समय लागू होने वाली आचार संहिता को कानूनी रूप दिया जाए, लेकिन श्री कुरैशी इस बात के विरुद्ध है. अभी ऐसे उल्लंघनों…. पर आयोग तुरन्त निर्णय दे देता है. उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में मुस्लिम आरक्षण पर उसने केन्द्रीय विधि मंत्री श्री सलमान खुर्शीद व केन्द्रीय इस्पात मंत्री श्री बेनीप्रसाद वर्मा को नोटिस….भी दिया था. आयोग का विचार है कि यदि इसको कानूनी बना लिया गया तो ऐसे हर उल्लंघन पर मुकदमा कायम होगा और फैसला आने में बरसों लग जाएंगे.

केंद्रीय गृहमंत्री श्री चिदम्बरम सहित अभी सन् 2009 के लोकसभा चुनावों के संदर्भ में 115 सांसदों के विरुद्ध उनके चुनाव को चुनौती देने वाली 115 इलेक्शन पिटीशन चल रही है. सन् 2014 मे नये चुनाव हो जाएंगे और निश्चित तौर पर कई ऐसी पिटीशनों पर निर्णय ही नहीं हो पायेगा और कई मामले अपील में लटके होंगे. चुनाव सुधारों में यह व्यवस्था भी की जानी चाहिए कि चुनावों को चुनौती देने वाली याचिकाएं 6 महीने के अंदर स्वयं चुनाव आयोग उसी तरह तय कर दे जैसे यह आचार संहिता या अन्य मुद्दों व आपत्तियों पर तुरन्त कार्यवाही कर निर्णय भी देता है. नोटिस देकर एक-दो दिन में ही जवाब मांगता है. अदालत के सम्मन ही महीनों बरसों लटके रहते हैं.

चुनाव आयोग के अंतर्गत ही विशेष चुनाव अदालतें बना दी जानी चाहिए. राज्य निर्वाचन कार्यालयों में भी विधानसभा के चुनावों के लिये विशेष अदालतें बना दी जाए. यहां तुरन्त गति से काम होने चाहिए. चुनावों में सबसे ज्यादा सबसे प्रभावी चुनाव सुधार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री टी.एन. शेषन ने किये थे. प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के समय में यह व्यवस्था कर दी गई कि उम्मीदवार के मित्रों व सहयोगियों द्वारा जो राशि खर्च की जायेगी वह उम्मीदवार का खर्चा नहीं मानी जायेगी. इससे चुनावों में धन हावी हो गया और पूरी पद्धति विकृत हो गई. श्री शेषन केवल अपने ही आदेश से दोस्तों के द्वारा किये गये खर्चों की सीमा 10 रुपये कर दी जिनका कोई अर्थ यही नहीं रहा गया और उसका सबसे बड़ा अर्थ यही रहा कि चुनाव से रुपयों का प्रभाव खत्म हो गया. चुनाव सुधारों की प्रकिया जारी है और यही परम संतोष की बात है. आज भी सारी दुनिया में शेषन काल से भारत के चुनाव सबसे साफ सुधरे व निष्पक्ष माने जाते हैं.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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