निवर्तमान चुनाव आयुक्त ने जताई आशा

नयी दिल्ली, 10 जून. मुख्य चुनाव आयुक्त पद से आज सेवानिवृत्त हो रहे एस वाई कुरैशी को उम्मीद है कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के लिए बड़े खतर के रूप में उभरे पेड न्यूज को संज्ञेय अपराध बनाया जाएगा. आयोग में छह महत्वपूर्ण साल पूरा करने के बाद कुरैशी ने यह उम्मीद भी जतायी कि करीब दो दशक से लंबित प्रमुख चुनाव सुधार जल्दी ही वास्तविकता में तब्दील हो सकेंगे.

कुरैशी ने पीटीआई से कहा  हमने कुछ ठोस कदम उठाए हैं, जिसका लाभ मिला है. हम इस पर :पेड न्यूज: काबू पाने में कामयाब रहे हैं. हमने अब चुनाव सुधारों की सिफारिश की है ताकि इसे संज्ञेय अपराध बनाया जा सके. जब सुधार प्रस्ताव आगे बढ़ेंगे तो वह महत्वपूर्ण कदम होगा. अपने व्यापक साक्षात्कार में कुरैशी ने आदर्श आचार संहिता को वैधानिक अधिकार दिए जाने के सुझावों को भी खारिज कर दिया और दलील दी कि मौजूदा प्रणाली को हटाने का अलोकप्रिय असर होगा. मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए चयन मंडल :कालेजियम: के सुझावों पर कुरैशी ने एक अलग फार्मूला सुझाया. उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए नहीं बल्कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए विश्वसनीय विचार विमर्श तंत्र स्थापित किया जाए.

उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यापक चयन के बाद की जाए और उनमें सर्वाधिक वरिष्ठ को नियमों के अनुसार मुख्य आयुक्त बनाया जाए.  मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में छह साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद अवकाश ग्रहण कर रहे  कुरैशी ने कहा यह काफी चुनौतीपूर्ण रहा. संविधान द्वारा दी गयी जिम्मेदारी, लोगों का भरोसा, संचालन की व्यापकता और एक गलती के नतीजे ने मौजूदा पदधारक के लिए इसे चुनौती बना दिया. सब लोगों के समर्थन के बिना इस चुनौती का सामना करना असंभव था. मुझे खुशी होगी अगर हमने उस विरासत में कुछ योगदान किया जिससे भारतीय लोकतंत्र मजबूत होता है. चुनाव आयुक्त के रूप में मैंने 2009 के आम चुनावों सहित कई यादगार चुनावों में अपनी भूमिका निभायी. सौभाग्य से मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर मेरे कार्यकाल के दौरान 11 राज्यों में चुनाव हुए जिनमें कई काफी कठिन थे. चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं स्वतंत्र तरीके से संपन्न कराए गए.

एक और बड़ा अतिरिक्त संतोष यह रहा कि व्यवस्थित मतदाता शिक्षा कार्यक्रम के जरिए इन चुनावों में भागीदारी क्रांति की ओर हम बढ़ सके. नए योग्य युवाओं का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए 25 जनवरी को आयोजित राष्ट्रीय मतदाता दिवस कम समय में ही दुनिया में युवाओं को अधिकारसंपन्न करने के लिए प्रमुख आयोजनों में से एक हो गया. हमने चुनावों में धनबल के इस्तेमाल के खिलाफ विलंबित मगर प्रतिबद्धता के साथ संघर्ष शुरू किया और इसका असर दिख रहा है.

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